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राजस्व फास्ट ट्रैक अदालतें खोल दी हैं तो हलफनामे के साथ बताओ तैनात किए गए अधिकारियों के नाम

राजस्व मंडल सहित प्रदेश की राजस्व अदालतों की बदहाली के मुद्दे को लेकर लंबित जनहित याचिका पर सरकार को अब यह बताना...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 03:10 AM IST

राजस्व मंडल सहित प्रदेश की राजस्व अदालतों की बदहाली के मुद्दे को लेकर लंबित जनहित याचिका पर सरकार को अब यह बताना है कि सहायक कलेक्टर की 48 फास्ट ट्रैक अदालतें कहां स्थापित की है और उनमें नियुक्ति अधिकारियों की सूची भी देनी होगी। सरकार ने राजस्व मुकदमों की जल्द सुनवाई के लिए बड़े कदम के रूप में प्रदेश में 50 सहायक कलेक्टरों की फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करना बताया था।

इसके साथ ही यह भी कहा था कि यह कोर्ट ऐसे क्षेत्रों में स्थापित किए जा रहे हैं जहां राजस्व मुकदमों की संख्या ज्यादा है। सरकार अपनी बात पर कितनी खरी उतरी है यह जानने के लिए ही हाईकोर्ट ने फास्ट ट्रैक कोर्ट और उनमें तैनात अधिकारियों की सूची हलफनामे के साथ तलब की है। प्रकरण में 26 अप्रैल को सुनवाई होगी।

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर स्थित मुख्य पीठ के वकील मोती सिंह राजपुरोहित ने चार साल पहले राजस्व मंडल सहित प्रदेश की राजस्व अदालतों में मुकदमों की सुनवाई को लेकर भारी अव्यवस्थाओं की ओर ध्यान दिलाया था।

राजपुरोहित की याचिका के साथ ही हाईकोर्ट ने राजस्व मंडल की रेवेन्यू बार एसोसिएशन की ओर से दायर उस रिट को भी सम्मिलित कर दिया था जिसमें मंडल में आरएएस अधिकारियों को सदस्य बनाने पर आपत्ति की गई है। एक बार यह मामला पूरी सुनवाई होने के बाद फैसले की दहलीज तक पहुंच गया था इसके बाद इसे वापस रिलीज कर नए सिरे से फिर सुनवाई की जा रही है।

हाईकोर्ट की ओर से लगातार राजस्व अदालतों में सुनवाई की प्रक्रिया और कामकाज को लेकर दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं। राजस्व मंडल सहित राजस्व अदालतों के समय पर लगाने के अलावा मुकदमों के जल्दी निपटारे के लिए क्या किया जा रहा है इस पर सरकार से रिपोर्ट तलब की गई थी। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में बताया गया था कि प्रदेश में ऐसे क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं जहां राजस्व मुकदमों की संख्या ज्यादा है।

न क्षेत्रों में 50 सहायक कलेक्टर के फास्ट ट्रैक कोर्ट खोलने का दावा किया गया। बाद में यह बताया कि दो फास्ट ट्रैक कोर्ट निरस्त हो गए हैं 48 कार्यरत हैं। इसी माह हुई सुनवाई में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में जो अधिकारी नियुक्त किए गए हैं उनके नाम की सूची हलफनामे के साथ पेश किया जाए। सरकार ने इसके लिए समय चाहा है 26 अप्रेल को सुनवाई होगी तब सरकार को यह सूची पेश करनी होगी।

करीब 67 हजार मुकदमों को सुनवाई का इंतजार

गौरतलब है कि प्रदेश की राजस्व अदालतों के हालात को लेकर भास्कर लगातार खबरें प्रकाशित करता रहा है और इन खबरों सहित अन्य आंकड़ों के आधार पर वकील मोती सिंह राजपुरोहित ने जनहित याचिका में मुद्दा उठाया था। इसमें बताया गया है कि किस तरह प्रदेश की राजस्व अदालतों में करीब पांच लाख मुकदमे लंबित है और राजस्व मंडल में भी करीब 67 हजार मुकदमों को सुनवाई का इंतजार है। प्रदेश में कुल 457 राजस्व अदालतें हैं। इनमें 320 तो उपखंड अधिकारी और सहायक कलेक्टर की हैं। प्रशासनिक ढांचा ऐसा है कि इनमें नए आरएएस अफसर या प्रोबेशनरी आईएएस तैनात किए जाते हैं। जानकार नहीं होने के कारण वे फैसले लंबित करते हैं या क्वालिटी फैसला नहीं दे पाते। अधिकांशत: : अदालतों के बाबुओं या रीडरों के भरोसे रहते हैं। इन अदालतों में राजस्व कानूनों और न्यायालय प्रक्रिया के जानकार अफसरों की तैनाती पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो मुकदमों के अंबार में और बढ़ोतरी होती रहेगी। अकुशल अफसरों द्वारा दिए गए फैसले प्रदेश के सामाजिक ढांचे पर भी विपरीत असर डाल रहे हैं। फौजदारी मुकदमों का एक बड़ा कारण अकुशल अफसरों के फैसले ही होते हैं। राजस्व मंडल सहित कुछ बड़ी राजस्व अदालतों को छोड़ दिया जाए तो प्रदेश की 90 प्रतिशत राजस्व अदालतों में तो अफसर मुकदमों की सुनवाई के लिए अदालत में बैठते ही नहीं हैं। इन तमाम मुद्दों को राजपुरोहित ने जनहित याचिका में उठाया है।

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