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गायिकी में भावों का होना जरूरी

Dainik Bhaskar

May 01, 2018, 03:10 AM IST

Ajmer News - प्रख्यात गायक कलाकार लखबीर सिंह लक्खा का कहना है कि उनकी प्रसिद्धि और कैरियर के कामयाबी का सफर श्याम जगत से ही...

गायिकी में भावों का होना जरूरी
प्रख्यात गायक कलाकार लखबीर सिंह लक्खा का कहना है कि उनकी प्रसिद्धि और कैरियर के कामयाबी का सफर श्याम जगत से ही जुड़ा हुआ है। 1980 में बाबा श्याम के दरबार में भजनों की शुरुआत किए जाने के बाद सफलता की सीढ़ियां चढ़ते रहे। अजमेर में श्याम वार्षिकोत्सव के दौरान अजमेर आए लखबीर सिंह लक्खा ने भास्कर से विशेष बात करते हुए यह बात कही। लक्खा सिंह का कहना है कि अजमेर से उनका नाता 25 साल पुराना है। श्री श्याम प्रेम मंडल के वार्षिकोत्सव में उन्होंने तब प्रस्तुति दी थी जब इस मंडल की शुरुआत हुई थी, देश में कई जगहों पर वे कार्यक्रम देते हैं। मगर अजमेर में होने वाले कार्यक्रम में भव्यता के साथ-साथ भावना जुड़ी रहती है। इनका कहना है कि गायिकी के लिए किसी भी तरह के दिखावे के बजाए भावों का होना जरूरी है। भले ही कोई कितना सुंदर और अच्छा गायन कर ले, मगर जब तक गायक में अपने ईष्ट के प्रति भाव नहीं हो, वह गायिकी कर रही नहीं सकता।

प्रख्यात गायक लखबीर सिंह लक्खा से बातचीत

लक्खा का बेटा धार्मिक फिल्म में

लखबीर सिंह लक्खा का छोटा बेटा राजदीप गिल धार्मिक फिल्म मां पूर्णा गिरी में नजर आएगा। यह फिल्म आने वाले शारदीय नवरात्रि में रिलीज होगी। पूर्णा गिरी एक शक्ति पीठ मंदिर है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां सती की नाभि वहां गिरी थी। बड़ा बेटा पन्ना सिंह भी भजन गायिकी के क्षेत्र में आ चुका है।

खुद की पहचान से बने फेमस

कई भजन गायकों की ओर से खुद के नाम के आगे उप नाम के रूप में जूनियर लक्खा नाम लिखे जान के सवाल पर लखबीर सिंह का कहना है कि सभी लोग गाते हैं, यह अच्छी बात है। मगर जो भी भजन गायक गाए वह खुद की पहचान से ही फेमस हो। उनका नाम कोई और उपयोग करे, इसमें उन्हें हर्ज नहीं, मगर सभी की अपनी पहचान होनी चाहिए।

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