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बिगड़ी व्यवस्था | कलेक्टर ने जलदाय विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर चर्चा की

शहर में जब 48 घंटे में पेयजल सप्लाई करनी है तो 72 घंटे में पानी क्यों दिया जा रहा है? पाइप लाइन के लीकेज क्यों नहीं ठीक...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 04:10 AM IST

  • बिगड़ी व्यवस्था | कलेक्टर ने जलदाय विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ शहर की जलापूर्ति व्यवस्था पर चर्चा की
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    शहर में जब 48 घंटे में पेयजल सप्लाई करनी है तो 72 घंटे में पानी क्यों दिया जा रहा है? पाइप लाइन के लीकेज क्यों नहीं ठीक किए जा रहे हैं? पानी का प्रेशर कम आने के लिए बूस्टर्स लगाने वाले लोग भी जिम्मेदार हैं, इनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जा रही है? कुछ ऐसे ही तीखे सवालों के साथ पार्षदों ने गुरुवार को जलदाय विभाग के अधिकारियों को घेरा। कलेक्ट्रेट में गुरुवार को कलेक्टर आरती डोगरा ने शहर में पेयजल व्यवस्था को सुचारू करने के संबंध में नगर निगम के पार्षदोंं एवं जलदाय विभाग के अधिकारियों की साथ बैठक ली। इसमें पार्षदों ने अपने क्षेत्र की पेयजल से जुड़ी हुई समस्याओं से जिला प्रशासन को अवगत कराया। जमीनी स्तर पर पेयजल की समस्याओं के समाधान खुद पार्षदों द्वारा ही सुझाए गए।

    कलेक्टर डोगरा ने कहा कि वार्ड में पेयजल समस्या के निदान के लिए स्थानीय अधिकारियों द्वारा पार्षदों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा। जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी आपसी सांमजस्य के साथ पेयजल समस्याओं का निदान करेंगे। प्रत्येक क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था सुचारू करने के लिए निर्धारित समयावधि में कार्य किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों द्वारा सक्षम स्तर पर फॉलोअप किया जाएगा। साथ ही ठेकेदार के माध्यम से किए जाने वाले कार्यों की मॉनिटरिंग को प्रभावी किया जाएगा। शहरवासियों को निर्धारित समयावधि पर पूरे प्रेशर के साथ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए संपूर्ण शहर को लीकेज मुक्त किया जाएगा।

    शहर में पेयजल संकट पर पार्षदों ने उठाए सवाल... बोले : लोग परेशान हैं,72 घंटे में क्यों हो रही जलापूर्ति?

    पार्षदों को मिले 2 हैंडपंप की स्वीकृति

    नगर निगम के महापौर धर्मेंद्र गहलोत ने कहा कि पार्षद का जनता से सीधा जुड़ाव होता है, इसलिए इन्हें क्षेत्र की बारीकी से समझ होती है। इनके द्वारा दिया गया फीडबैक महत्वपूर्ण होता है। आमजन जलदाय विभाग से नियमित एवं पूरे प्रेशर के साथ पेयजल सप्लाई की अपेक्षा रखता है। अजमेर को स्मार्ट सिटी बनाने में फंड की कोई कमी नहीं है। इसका उपयोग संपूर्ण शहर में समान रूप से किया जाएगा। उन्होंने इस दौरान सुझाव भी दिया कि प्रत्येक पार्षद को अपने क्षेत्र में खुद के स्तर पर ही 2-2 हैंडपंप खुदवाने की स्वीकृति मिलनी चाहिए।

    कांग्रेसी पार्षदों ने लगाया भेदभाव का आरोप

    बैठक में कांग्रेसी पार्षदों ने राजनीतिक भेदभाव का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि उनके वार्डों में कोई काम नहीं किए जाते। समस्याओं का निराकरण करने में भी अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा आनाकानी की जाती है।

    शहर में चल रही पानी की समस्या को लेकर कलेक्टर आरती डोगरा ने पार्षदो संग बैठक ली।

    हैंडपंप ठेकेदार की शिकायत

    पार्षदों ने हैंडपंप मरम्मत करने वाले ठेकेदार सिकंदर की भी शिकायत की। उनका कहना था कि ठेकेदार पूरी तरह से हैंडपंप दुरुस्त नहीं करता, जिससे हैंडपंप फिर से जल्द खराब हो जाते हैं। इसके अलावा कई हैंडपंप नाकारा पड़े हैं, उन्हें ठीक नहीं किया जा रहा। इसके अलावा पार्षदों ने शहर में गंदे पानी की सप्लाई, कई इलाकों में नई पाइप लाइन बिछाने, कोली बस्ती, टीएमटी कॉलोनी, वाल्मीकि बस्ती कच्ची बस्ती, झलकारी नगर, यूआईटी कॉलोनी, प्रताप नगर, वैशालीनगर के क्षेत्रों, शहर के अंदरूनी इलाकों, नौसर आदि क्षेत्रों में पर्याप्त और समय पर जलापूर्ति की मांग उठाई।

    कंट्रोल रूम स्थापित

    जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता नेमाराम परिहार ने कहा कि शहर में पेयजल की समस्या के समाधान के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। इन पर टेलीफोन करके पेयजल के संबंध में शिकायत की जा सकती है। मुख्य कंट्रोल रूम के नंबर 0145-2628489 है। नल गोदाम फव्वारा चौराहा के लिए 0145-2621924, अलवर गेट के लिए 0145-2660943 पर भी संपर्क किया जा सकता है। बैठक में निगम के उप महापौर संपत सांखला, नगर निगम आयुक्त हिमांशु गुप्ता, अतिरिक्त जिला कलेक्टर अबु सूफियान चौहान आदि अधिकारी उपस्थित थे।

    24 घंटे का वादा, 72 घंटे में भी पानी नहीं

    अजमेर | शहर में रोजाना पानी देने की कार्य योजना पर कार्य प्रारंभ हो चुका है। इंजीनियर पूर्व में कई बार रोजाना पानी देने के वादे भी कर चुके हैं। पर, गर्मियों में हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि शहरवासियों को 48 घंटे में एक बार भी पानी नहीं मिल पा रहा। भीषण गर्मी में भी शहर के अंतिम छोर वाले इलाकों में पानी की सप्लाई 48 घंटे से बढ़कर 60 और 72 घंटे में हो रही है। गुरुवार को शहर में 60 घंटे में 5 तथा 72 घंटे में 12 जोन में पानी दिया गया। शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री अनिता भदेल जलदाय विभाग के प्रमुख शासन सचिव रजत मिश्रा की समीक्षा बैठकों एवं डांट-फटकार के बाद भी इंजीनियर जल वितरण को पटरी पर लाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। करीब एक महीने पहले नसीराबाद सहित अन्य जगहाें पर लीकेज को दुरुस्त करने के लिए गए शट-डाउन के बाद जलदाय विभाग पानी जल वितरण व्यवस्था को पटरी पर नहीं ला पाया है। शहर के वैशाली नगर, पंचशील नगर, चौरसियावास, ईदगाह, कोटड़ा, पत्रकार कॉलोनी, हरिभाऊ उपाध्याय नगर सहित अन्य इलाकों में अब भी 48 घंटे में एक बार पानी मिलना नामुमकिन सा है।

    एसई सत्येंद्र कुमार सिंह से सीधी बात

    सवाल-शहर में अब भी कई इलाकों में 48 घंटे में पानी नहीं मिल रहा?

    जवाब-शहर में 262 जोन हैं। इनमें से 10 से 15 प्रतिशत जोन में ही दिक्कत आ रही है, जो अंतिम छोर पर हैं। यह स्थिति अन्य जिलों से बेहतर है।

    सवाल- तमाम कोशिशों के बाद भी शहर में पानी की किल्लत जारी है?‌

    जवाब- मॉनिटरिंग की जा रही है, पहले से स्थिति बेहतर है, और बेहतर की जा रही है?

    सवाल-टैंकर के टेंडर नहीं हो पा रहे? जरूरतमंद जगहों पर पानी कैसे पहुंचेगा?

    जवाब- अजमेर, किशनगढ़ को छोड़ ब्यावर, केकड़ी में टेंडर में कोई नहीं आया। वापस टेंडर जारी किए गए है। जहां पीने के पानी की दिक्कत है, वहीं टैंकर भेजे जाते है।

    सिटी की मॉनीटरिंग अब जीनगर के पास

    जल वितरण व्यवस्था की मॉनीटरिंग का जिम्मा एक्सईएन सिटी-1 एसएल जीनगर को दी गई है। पहले यह एक्सईएन सिटी-2 गोपाल शर्मा के पास थी। दोनों इंजीनियरों में आपस में जल वितरण व्यवस्था को लेकर मतभेद थे।

    जिले में डेढ़ हजार हैंड पंप सूखे, टैंकर के टेंडर नहीं हो रहे

    भीषण गर्मी में शहर ही नहीं ग्रामीण इलाकों में भी पानी काे लेकर भयंकर किल्लत के हालात सामने आ रहे हैं। जिले में 20 हजार 455 हैंड पंप में से 2719 हैंड पंप खराब पाए गए। इनमें से 2694 हैंड पंप दुरुस्त किए जाने का दवा किया जा रहा है। भीषण गर्मी में गिरते जल स्तर के कारण 1545 हैंड पर सूख चुके हैं। यह मानसून के बाद पानी रिचार्ज के बाद भी चल पाएंगे। इधर, जिले में टैंकर से पानी सप्लाई को लेकर टेंडर ही नहीं हो पाए हैं। ब्यावर, केकड़ी में दो बार टेंडर जारी किए गए, मगर कोई फर्म आगे नहीं आई। किशनगढ़ शहरी क्षेत्र में टेंडर हुए हैं, ग्रामीण में नहीं हो पाए। रूपनगढ़ के लिए गुरुवार को टेंडर आए।

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