पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Ajmer
  • Ajmer News Rajasthan News Asiatic Cheetah Will Increase The Pride Of The Forests 10 Cheetahs Will Be Imported From Namibia

एशिएटिक चीता बढ़ाएगा जंगलों की शान, नामीबिया से इंपोर्ट किए जाएंगे 10 चीते

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

भारत में वर्ष 1952 से विलुप्त हुआ एशिएटिक चीता अब जल्द ही यहां के जंगलों में नजर आने लगेगा। सुप्रीम काेर्ट ने अफ्रीकी देशाें से एशिएटिक चीता इंपोर्ट करने की अनुमति प्रदान कर दी है। दस चीते भारतीय जंगलाें में लाए जाएंगे।

राजस्थान के जंगल भी इन चीताें के लिए अनुकूल हैं। यह जानकारी अफ्रीकी देश नामीबिया में भारत की आेर से सलाहकार नियुक्त रहे अजमेर निवासी डाॅ. विश्वास सक्सेना ने दी है। डाॅ. सक्सेना लंबे समय से नामीबिया से चीताें काे भारत लाने के लिए प्रयासरत थे। उन्हाेंने नामीबिया में नामक्यूसे, हम्मरस्टेइन, साॅसेसाेलाई आैर लेपर्ड लाॅज जैसे स्थानाें पर समय बिताकर चीते के रहन-सहन सहित अन्य गतिविधियाें पर गहन अध्ययन किया है।

अफ्रीकी देशाें में अच्छी तादात में मौजूद हैं चीते

नामीबिया सहित अन्य अफ्रीकी देशाें में इस प्रजाति की चीताें की काफी अच्छी तादात है, वहां चीता पालन के लिए जगह-जगह प्रायवेट फार्म्स बने हुए हैं। इंटरनेशनल यूनियन आॅफ कंर्जेवेशन आॅफ नेचर (आईयूसीएन) के अनुसार अफ्रीकी देशाें में इनकी संख्या 7 हजार 100 दर्ज की गई है। जबकि इसी एशिएटिक प्रजाति के 50 चीते ईरान में भी हैं। बाकी दुनियाभर में इस प्रजाति के चीते नहीं के बराबर हैं।

डाॅ. विश्वास ने बताया कि नामीबिया में हिंबा जनजाति के लाेग गाैरक्षक हैं, वे शरीर पर लाल मिट्टी आैर गाय का दूध का लेप लगाकर 12 माह नग्न अवस्था में रहते हैं। कबीले के लाेग गाेवंश काे बचाने के लिए मरने मारने पर अमादा रहते हैं।

चुनिदां स्थानाें पर लाया जा सकेगा चीता, राजस्थान भी अनुकूल | डाॅ. सक्सेना ने बताया कि काेर्ट ने कहा कि - अफ्रीकी चीते भारत में चुनिंदा स्थानाें पर लाए जा सकेंगे। 10 चीते लाने पर विचार किया जा रहा है। नामीबिया आैर राजस्थान की पारिस्थितिकी काफी हद तक समान है, इसलिए राजस्थान के जंगल वहां के चीते के लिए अनुकूल हैंं। गाेंडावाना लैंड व काॅटिंनेंटल ड्रिफ्ट थ्याेरी में भारत-अफ्रीका दाेनाें एक ही भूभाग हैं।

आगे के पैर, पीछे के पैराें से हाेते हैं ज्यादा लंबे

{ चीता 70 मील प्रति घंटे की रफ्तार से हवा की तरह एक राउंड में 300 गज तक दाैड़ता है। भाेजन की तलाश में लंबी दूरी तय कर वहीं प्रवास करता है।

{ चीते के आगे की दाेनाें पैर, पीछे के पैराें से थाेड़े लंबे हाेते हैं। जिससे वह सुगमता से दाैड़कर तेजगति पकड़ लेता है। चीता यदि मानव के संपर्क में रहता है ताे पालतू जैसा व्यवहार करने लगता है। फिर भी हिंसक प्रवृत्ति के कारण खतरा बना रहता है।

क्लाइमेक्स फाेरेस्ट स्टेट का है सूचक | डाॅ. विश्वास बताते हैं कि नामीबिया में जब उन्हाेंने चीते पर अध्ययन किया ताे वहां की सरकार ने इंडाेमिनिटी बांड साइन करवाया था। यह बांड चीते की हिंसक प्रवृत्ति के मद्देनजर साइन कराया जाता है। डाॅ. विश्वास ने बताया कि अजमेर में टाॅटगढ़-रावली वन क्षेत्र में भी अफ्रीकी चीता लाया जा सकता है। लेकिन चीते का भाेजन दिन जानवराें पर निर्भर हाेता है, उनकी यहां प्रचुर मात्रा हाेनी चाहिए। वन्यजीव प्रबंधन से यह संभव हाे सकता है। चीते का हाेना भी पारिस्थितिकी की भाषा में क्लाइमेक्स फारेस्ट स्टेट का सूचक है।

अफ्रीका में चीताें का अध्ययन करते डाॅ. विश्वास सक्सेना।
खबरें और भी हैं...