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निरस्त लाइसेंस बहाल कराने की अपील कोर्ट में खारिज

Dainik Bhaskar

Jan 12, 2019, 03:21 AM IST

Ajmer News - मदारगेट इलाके में दो साल पहले नकली दवा मामले में राज्य सरकार के औषधि नियंत्रण विभाग की ओर से निरस्त किए गए लाइसेंस...

Ajmer News - rajasthan news court rejects appeal for restoration of license
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मदारगेट इलाके में दो साल पहले नकली दवा मामले में राज्य सरकार के औषधि नियंत्रण विभाग की ओर से निरस्त किए गए लाइसेंस को बहाल करने की कोर्ट में अपील करने वाले दवा विक्रेता को मुंह की खानी पड़ी।

कोर्ट ने विभाग की ओर से पेश किए गए तथ्यों को सही ठहराते हुए निर्देश दिए कि दवा विक्रेता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाए और उसे और उसके परिवार के किसी भी सदस्य को दवा बेचने और खरीदने का लाइसेंस भविष्य में नहीं दिया जाए। क्लाक टावर थाना पुलिस ने औषधि नियंत्रण विभाग के संयुक्त निदेशक ईश्वर चंद्र यादव की रिपोर्ट पर आरोपी दवा विक्रेता हरीश चंचलानी और उसकी प|ी ऋतु चंचलानी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी भी होगी।

नकली दवा मामले में चंचलानी दंपती के खिलाफ मुकदमा दर्ज

कोर्ट ने विभाग की ओर से पेश किए गए तथ्यों को सही ठहराया

आरोपियों के कारोबार पर विभाग ने तीन साल में दो बार छापा मारा। तीन साल पहले नशीली दवा के इंजेक्शन की खरीद-फरोख्त में गंभीर अनियमितता पाई गई थी, इस मामले में हरीश मेडिकल्स के संचालक हरीश चंचलानी का लाइसेंस निरस्त किया गया था। आरोपी ने प|ी ऋतु चंचलानी के लाइसेंस पर नकली दवा बेचने का कारोबार शुरू कर दिया था। दूसरी बार विभाग की जयपुर और अजमेर की टीमों ने संयुक्त कार्रवाई कर 24 फरवरी 2017 को दबिश देकर आरोपियों की दुकान से स्किन लाइट और पेंटोसिड दवाएं नकली बरामद की थी। इस मामले में हरीश की प|ी ऋतु चंचलानी का भी लाइसेंस निरस्त कर दिया गया था।

चोरी और सीनाजोरी भारी पड़ी

लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई को चुनौति देते हुए आरोपियों ने कोर्ट में अपील की थी। आरोपियों ने कोर्ट में झूठे तथ्य पेश करते हुए बताया कि जांच के दौरान जो नकली दवाएं मिली हैं, उन्हें दिल्ली की फर्म से खरीदा था, इसलिए उसकी कोई गलती नहीं है। विभाग ने दवा विक्रेता की ओर से पेश किए गए बिल की जांच की तो उक्त फर्म ने बिल फर्जी बताते हुए पल्ला झाड़ लिया। इस पर आरोपी चंचलानी ने बैंक स्टेटमेंट पेश किया, जिसमें उक्त नकली दवाओं को खरीदने के एवज में राशि जमा कराने का हवाला दिया गया था। बैंक स्टेटमेंट को भी संबंधित बैंक प्रशासन ने फर्जी करार दिया। उक्त तथ्यों के मद्देनजर कोर्ट ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए उसके खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज मामले में मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश विभाग को दिए, इसपर अमल करते हुए विभाग की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया।

प|ी के लाइसेंस पर करने लगा नकली दवा का कारोबार

हरीश चंचलानी ने खुद को लाइसेंस निरस्त होने के बाद प|ी ऋतु चंचलानी के लाइसेंस पर हरीश मेडिकल एजेंसी संचालित करना शुरू कर दिया था। 24 फरवरी 2017 को विभाग की जयपुर व अजमेर टीम ने इस फर्म पर दबिश देकर स्किन लाइट और पेंटोसिड डीएसआर के नाम से नकली दवाएं बरामद की गई थी। इस मामले में ऋतु चंचलानी का लाइसेंस भी निरस्त किया गया था। मामले में क्लॉक टावर थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भादंसं की धारा 420, 468 470 120 बी और कॉपी राइट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।

Rs. 37 लाख के नशीले इंजेक्शन का नहीं मिला था हिसाब

औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारी ईश्वर चंद यादव ने बताया कि आरोपी हरीश चंचलानी के हरीश मेडिकल्स फर्म पर तीन साल पहले विभाग के दल ने दबिश देकर नशीले इंजेक्शन अवैध रूप से बेचने-खरीदने के कारोबार का खुलासा किया था। आरोपी हरीश की फर्म ने करीब 37 लाख रुपए के नशीले इंजेक्शन फोर्ट विन अवैध तरीके से बेचे थे। इस बारे में हरीश ने सफाई दी थी कि उसने इंजेक्शन जेएलएन अस्पताल में सप्लाई किए थे, लेकिन अस्पताल की संबंधित एजेंसी ने हरीश के उक्त कथन को झूठा बताया था। आरोपी ने इस संबंध में भी फर्जी लेटरहैड पेश किया था। इस प्रकरण में हरीश चंचलानी का लाइसेंस निरस्त किया गया था।

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