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512 अर्घ्यों के माध्यम से किया भगवान का गुणानुवाद

एक वर्ष पहले
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अजमेर | श्री पल्लीवाल दिगंबर जैन मंदिर पाल बीचला में इंदौर से अाईं ब्रह्मचारिणी बहन संगीता दीदी के सान्निध्य में अष्टानिका पर्व के सातवें दिन की पूजन व विधान धूमधाम व भक्ति भाव से की गई। पंच परमेष्ठी भगवान का विधान किया गया जिसमें पांचों परमेष्ठी भगवान का गुणानुवाद 512 अर्घ्यों के माध्यम से किया गया। सरिता जैन ने बताया कि ब्रह्मचारिणी बहन संगीता दीदी ने आध्यात्म की महिमा बताते हुए कहा कि प्रभु की भक्ति व पूजन व्यक्ति को अपने भीतर झांकने और आत्म विश्लेषण कर अपने विकृत परिणामों को सुधारने को प्रेरित करती है। हमारी धार्मिक क्रियाओं का उद्देश्य अपने जीवन को पांचों पापों,कषायों व राग द्वेष से बचाना है। राग द्वेष करने वाला व्यक्ति निरंतर अपना ही अहित करता रहता है। मनुष्य पर्याय को आत्म कल्याण में लगाकर मोक्ष मार्ग की ओर बढ़ना चाहिए।
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