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पाक में आरएएस अफसर सिंधी की पुश्तैनी संपत्तियाें पर काबिज इकबाल बाेला-अाप भी अाअाे पाकिस्तान, स्वागत है अापके घर में
पिछले कई सालाें से उर्स में ड्यूटी देने वाले सीनियर आरएएस सुरेश सिंधी की दिली ख्वाहिश थी कि काश! कभी उनके पाकिस्तानी पैतृक गांव से अाने वाले किसी जायरीन से मुलाकात हाे जाए ताकि वे वहां की मिट्टी की खुशबू काे महसूस कर सकें। इसी साल 29 फरवरी काे सुरेश सिंधी सेवानिवृत्त हुए आैर पाक में पैृतक संपत्तियाें पर काबिज व्यक्ति से मुलाकात के साथ उनकी दिली ख्वाहिश भी पूरी हाे गई। इस बार दरगाह जियारत के लिए पहुंचे पाक जायरीन के दल में सिंधप्रांत के नवाब शाह जिले के उसी गांव से जायरीन इकबाल भी अाया था, जहां से सिंधी के पूर्वज 1947 में विभाजन के दाैरान राजस्थान आए थे। इकबाल का परिवार सिंधी के पूर्वजाें की संपत्तियाें पर काबिज है। पाक जत्थे के साथ लाइजन आॅफिसर की ड्यूटी पर 26 सालाें से तैनात सिंधी हर बार प्रत्येक जायरीन से यह साेचकर मिलते कि कभी ताे मेरे पूर्वजाें के गांव से काेई आएगा, वहां के बारे में बताएगा। सिंधी से इकबाल मिला ताे उसके जेहन में गुजरे जमाने की यादें ताजा हाे गईं, उसने कहा-अाप भी अाअाे पाकिस्तान, स्वागत है अापके घर में।
पिताजी बताते थे -पाक में दुकान, मकान, खेत-खलिहान सबकुछ छाेड़ आए...
रिटायर्ड एडीएम (सिटी) सुरेश सिंधी ने बताया कि पिताजी डाॅ. पैरूमल्लह रामचंदानी व दादाजी जैसाराम पाक के नवाव शाह जिला सिंधप्रांत के खडड़ो गांव से 1947 में भारत-पाक विभाजन के दाैरान राजस्थान आकर बसे थे।
1961 में मेरा जन्म हुआ, पिता हमेशा यह बताया करते थे कि सिंध में अपनी बहुत संपत्तियां हैं। दुकान, मकान, खेत-खलिहान आदि सब कुछ है। बचपन से ही यह इच्छा थी कि अपने पूर्वजाें के ठिकाने के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटा सकूं आैर माैका मिले ताे कभी वहां जा भी सकूं। यह भी जानना चाहता था कि अब उन संपत्तियाें पर काैन काबिज है।
राजस्थान का राजपूत है इकबाल | सुरेश सिंधी ने बताया कि हर बार की तरह यह जानने के लिए मिल रहा था, तभी सिंध के नवाब शाह जिला स्थित खडड़ाे गांव का इकबाल चाैहान मिला। बात हुई ताे पता लगा वह राजस्थान का राजपूत है, आैर खडड़ाे में हमारी संपत्तियाें पर काबिज है।
इकबाल बाेला - याद है अब तक जैसाबाबा का चेहरा | सिंधी अाैर इकबाल में घंटाें तक बात हुई। इकबाल ने बताया कि विभाजन के दाैरान जैसाबाबा की संपत्तियां मुझे नसीब हुई, वर्तमान में उन्हीं पर मैं काबिज हूं आैर परिवार गुजर-बसर कर रहे हैं। इकबाल काे मैंने बताया कि जैसाबाबा का पूरा नाम जैसाराम रामचंदानी है, आैर वे मेरे दादाजी हैं।
पहनाई सिंधी टाेपी, पाक आने का दिया न्याेता
सुरेश सिंधी ने बताया कि 7 मार्च काे जब दल वापस लाैट रहा था, तब वे इकबाल चाैहान से वापस मिले। इकबाल खुशी से झूम उठा आैर सम्मान में सिंधी टाेपी पहनाकर गले में अजरक पहनाई। पाक आने का न्याैता देते हुए बाेला गरीब नवाज ने उससे मिला दिया, जिसके बारे में मैं आैर मेरा परिवार हमेशा साेचते थे... क्या कभी जैसाबाबा या उनके परिवार से मुलाकात का दुबारा माैका मिलेगा या नहीं। गरीब नवाज ने यह इच्छा पूरी कर दी।
इकबाल के साथ आरएएस अफसर सिंधी।