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रेतीले धाेराें काे प्लास्टिक मुक्त बनाने की पहल

एक वर्ष पहले
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ग्लोकल ग्रीन नामक स्वयंसेवी संस्था ने मेला मैदान समेत आसपास से सटे प्राकृतिक रेतीले धोरों को प्लास्टिक मुक्त करने का बीड़ा अपने हाथ में लिया है। संस्था की एक टीम करीब दो माह से अपने मिशन में जुटी हुई है। रविवार को संस्था की ओर से अपने अभियान का सातवां श्रमदान कैंप आयोजित किया। इस दौरान अभियान से जुड़े संस्था के 10 देशों के सौ से अधिक सदस्यों के साथ एसडीओं देविका तोमर, डीएसपी विनोद कुमार, तहसीलदार पंकज बडग़ुजर, थानाधिकारी राजेश मीणा आदि ने कर्मचारियों के साथ मास्क पहन कर मेला मैदान में श्रमदान कर लोगों को स्वच्छता का संदेश दिया।

एसडीओ तोमर ने श्रमदान कर रहे संस्था के देशी-विदेशी सदस्यों को मास्क वितरित किये। टीम प्रभारी विजय सिंह चौधरी ने बताया कि पुष्कर के रेतीले धोरों का प्लास्टिक मुक्त करने के लिये वे पिछले करीब दो माह से काम कर रहे है। इसके पहले उन्होंने सावित्री ट्रैक समेत आस-पास के इलाकों में श्रमदान कर रेतीले धोरों को प्लास्टिक मुक्त किया। उन्होंने बताया कि पुष्कर का डंपिंग ग्राउंड शहर से काफी दूर है। लिहाजा लोगों ने शहर के कैमल ग्राउंड को ही डंपिंग ग्राउंड बना दिया है। लोगों ने रेतीले धोरों की ब्यूटी को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। वे तीर्थ नगरी को प्लास्टिक फ्री कर पुष्कर को एक मॉडल सिटी के रूप में पेश करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुष्कर के अलावा उनकी टीमें अलग-अलग राज्यों के पर्यटन स्थलों को अपने मिशन पर काम कर ही है तथा लोगों को प्लास्टिक की जगह कपड़ों के बैग बनाने के लिये भी प्रेरित कर रहे हैं। रेतीले धोरों से एकत्रित अनुपयोगी प्लास्टिक से उपयोगी वस्तुएं बनाई जा रही हैं।

पुष्कर. धोरों में श्रमदान कर सफाई करते पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी।
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