पापाें काे छाेड़ने पर ही विधान करना सार्थक
अजमेर| आचार्य शशांक सागर ने कहा कि परमात्मा की भक्ति करने से भक्तों की महिमा अपने आप फैल जाती है। जैसे फूल को सूंघना नहीं पड़ता, उसकी सुगंध हवा के माध्यम से अपने आप मिल जाती है। सिद्धचक्र विधान के माध्यम से भगवान की आराधना भक्ति में क्या खोया क्या पाया है विचार करें। यदि हमने भीतर की कुछ बुराई एवं पापों को छोड़ दिया परिवर्तन हो गया, तो समझना तुम्हारा विधान करना सार्थक है। श्री दिगंबर जैन मंदिर पार्श्वनाथ काॅलोनी वैशालीनगर में आचार्य शशांक सागर महाराज ससंघ के सानिध्य मे चल रहे अष्टान्हिका महापर्व पर सिद्ध चक्र महामंडल विधान का मंगलवार को बड़े धूमधाम के साथ विश्व शांति महायज्ञ की पूर्ण आहुति दी।