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वेलफेयर फंड में शुल्क बढ़ाेतरी काे लेकर वकीलाें ने किया न्यायिक कार्य का बहिष्कार

एक वर्ष पहले
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एडवाेकेट वेलफेयर फंड में लाइफटाइम फीस काे 17 हजार 500 रुपए से बढ़ाकर एक लाख रुपए किए जाने के विराेध में जिला बार एसाेसिएशन अाैर राजस्थान रेवेन्यू बार एसाेसिएशन के अाह्वान पर वकीलाें ने गुुरुवार काे न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। वकीलाें की हड़ताल के चलते जिला न्यायालय सहित अधीनस्थ अदालताें में मुकदमाें की सुनवाई बाधित रही अाैर पक्षकाराें काे परेशानी उठानी पड़ी।

जिला बार एसाेसिएशन के अध्यक्ष अजय त्रिपाठी व सचिव समीर काले के नेतृत्व के वकीलाें के शिष्टमंडल ने कलेक्टर काे ज्ञापन साैंपकर राज्य सरकार से राजस्थान अधिवक्ता कल्याण निधि संशाेधन विधेयक 2020 में किए गए संशाेधन वापस लेने की मांग की है।

वकीलाें का कहना है कि जाे संशाेधन किए गए हैं वह वकीलाें के हिताें के विपरीत हैं। इन नियमाें से वकीलाें का कल्याण नहीं बल्कि अार्थिक शाेषण किया जा रहा है। एक अाेर जहां लाइफटाइम फीस काे 17 हजार 500 रुपए से बढ़ाकर एक लाख रुपए किया गया है वहीं वकालतनामे पर लगने वाले वेलफेयर टिकट का शुल्क बढ़ाकर साै व दाे साै रुपए कर दिया है। यह संशाेधन खासतौर से युवा अधिवक्ताओं के अधिकारों पर गहरा कुठाराघात है।

वकीलाें की मांग है कि बढ़ी हुई राशि को जल्द ही वापस लिया जा कर उचित लाइफटाइम वेलफेयर शुल्क का प्रावधान किया जाना चाहिए जिससे की आम अधिवक्ता भी लाइफटाइम वेलफेयर का मैंबर बन सके। ज्ञापन देने वालाें में दीपक शर्मा, राहुल भारद्वाज, संदीप यादव, पीयूष जैन, वैभव जैन, मनाेज डीडवानिया, पृथ्वीराज भाटी, जितेंद्र शर्मा, अजीत भटनागर, अनिल चाैधरी, शिवराज सिंह राठाैड़, राजीव शर्मा, शैलेंद्र सिंह परमार अादि शामिल थे।

इधर राजस्थान रेवेन्यू बार एसाेसिएशन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री काे पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। रेवेन्यू बार अध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा अाैर सचिव पवन सिंह चाैहान ने बताया कि 13 मार्च काे सांकेतिक रूप से न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया जाएगा। वहीं जिला बार एसाेसिएशन ने एलान किया है कि विवादित संशाेधन वापस नहीं लिए गए ताे अांदाेलन तीव्र किया जाएगा।

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