देश के 15 हजार से ज्यादा मंदिरों में होती है निम्बार्क संप्रदाय पद्धति से सेवा-पूजा
देश में 15 हजार से ज्यादा मंदिर ऐसे हैं, जिनमें निम्बार्क संप्रदाय की पद्धति से पूजा-उपासना होती है। इन मंदिरों में अब गोलोकवासी राधा सर्वेश्वर शरण महाराज की प्रतिमाओं को स्थापित करने का सिलसिला जारी है। इसी क्रम में शुक्रवार को पृथ्वीराज मार्ग स्थित श्री निम्बार्क कोट मंदिर में भी प्रतिमा की स्थापना की जा रही है।
कार्यक्रम में निम्बार्क पीठाधीश्वर जगदगुरु एवं पीठ के 49 वें आचार्य राधा सर्वेश्वर शरण श्रीजी महाराज भी पधारेंगे। निम्बार्क संप्रदाय से जुड़े भक्त इनके दर्शन करने के लिए आएंगे। शाम 4 बजे कार्यक्रम की शुरुआत हो जाएगी, प्रतिमा की स्थापना श्रीजी महाराज के कर कमलों से ही होगी। मालूम हो निम्बार्क पीठ विश्व के सबसे अति सूक्ष्म एवं सतयुगकालीन शालिग्राम के कारण भी पहचानी जाती है। जिसकी पूजा-अर्चना पीठ के आचार्यों के द्वारा लगातार होती आ रही है।
फूलडोल भी होगा, बहेगी भजन सरता : रंगपंचमी के मौके पर फूलडोल महोत्सव भी मनाया जाएगा। श्री निम्बार्कगोपीजनवल्लभ सेवा समिति के सचिव एवं प्रवक्ता अशोक तोषनीवाल ने बताया कि इस अवसर पर शाम 4 बजे से फाग के भजनों के साथ श्री राधा सर्वेश्वर प्रभु को फाग के भजनों से रिझाया जाएगा।
जीवन परिचय : गोलोकवासी श्रीजी महाराज
निम्बार्क पीठ के 48 वें आचार्य श्रीजी महाराज राधा सर्वेश्वर शरण महाराज का जन्म 10 मई 1929 को हुआ था। 7 जुलाई 1940 को उन्हें 47 वें आचार्य श्रीजी महाराज बालकृष्ण शरण ने वैष्णवी दीक्षा प्रदान की थी। वे 5 जून 1943 को आचार्य पद पर आसीन हुए। 74 साल तक निम्बार्क संप्रदाय का नेतृत्व करने के बाद 14 जनवरी 2017 को उनका गोलोकवास हो गया। इसके बाद सलेमाबाद में इनकी प्रतिमा स्थापित की गई थी, इसके बाद देशभर के मंदिरों में इनकी प्रतिमाएं लगने का क्रम जारी है।