सामाजिक मान्यताअाें के कारण हाेते हैं अधिकतर बाल विवाह : डॉ. विजेंद्र सिंह

Ajmer News - राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य डॉ. विजेंद्र सिंह ने कहा है कि समाज में व्याप्त सामाजिक मान्यताओं...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 06:32 AM IST
Ajmer News - rajasthan news most child marriages occur due to social beliefs dr vijendra singh
राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य डॉ. विजेंद्र सिंह ने कहा है कि समाज में व्याप्त सामाजिक मान्यताओं के कारण अधिकतर बाल विवाह होते हैं। एेसी मान्यताओं को समाप्त करने के लिए आमजन में जागरूकता पैदा करने की जरूरत है।

डॉ. सिंह शुक्रवार को इनडोर स्टेडियम सभागार में आयोजित बाल विवाह रोकथाम की जिला विशिष्ट कार्य योजना एवं बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार में बेटियों की भावना को समझना होगा। उसी अनुरूप उन्हें शिक्षा एवं संरक्षण जरूरी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक मान्यताएं बाल विवाह को बढ़ावा देती हैं लेकिन सभी को इसके दुष्प्रभावों को बताना होगा। इस कार्य में समाज एवं मीडिया सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवी संगठन इस कार्य को मिशन के रूप में ले। उनकी इस कार्य में महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। यह कार्य पंचायत स्तर से प्रारम्भ किया जाना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग इस कार्य में पूर्ण सहयोग प्रदान करेगा। कार्यशाला में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव डॉ. शक्ति सिंह शेखावत ने कहा कि सुदूर क्षेत्रों में बैठे व्यक्ति को संवेदनशील कर उसे बाल विवाह के दुष्प्रभावों की जानकारी देने की जरूरत है, इससे लोगों की मानसिकता भी बदलेगी। उन्होंने कहा कि बाल विवाह नैतिक दृष्टि से उपयुक्त नहीं है। इसके लिए कानून की पालना भी जरूरी है। इसकी रोकथाम के लिए बनाई गई कार्ययोजना में सभी विभाग अपनी महती भूमिका अदा करें। उन्होंने बताया कि विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा भी गत अप्रेल से जून तक 9 बाल विवाह रुकवाए गए। महिला एवं बाल विकास विभाग की उप निदेशक डॉ. अनुपमा टेलर ने बताया कि बाल विवाह होने से पूर्व ही उसकी जानकारी मिलते ही समझाइश की जानी जरूरी है ताकि लोगों को बाल विवाह प्रतिषेध नियम की जानकारी हो सके।

उन्होंने विभाग द्वारा अबूझ सावों पर होने वाले बाल विवाह की रोकथाम के लिए किए जाने वाले प्रयासों, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना कि क्रियान्विति तथा पोषण अभियान के संबंध में विस्तार से जानकारी दी।

महिला अधिकारिता विभाग के उप निदेशक जितेन्द्र शर्मा ने बताया कि प्रदेश को 2028 तक बाल विवाह मुक्त करने का प्रयास होगा। क्राई के प्रतिनिधि कृष्ण कुमार ने बताया कि गत तीन वर्षों में जिले में 81 बाल विवाह के मामले रुकवाए गए हैं। मातृ एवं शिशु कल्याण अधिकारी डॉ. रामलाल ने भी बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत किए जाने वाले कार्यों की जानकारी दी। इस मौके पर उप पुलिस अधीक्षक यातायात धर्मवीर जानू, उप निदेशक जनसंपर्क महेश चन्द्र शर्मा, महिला एवं बाल विकास अधिकारी सहित बाल कल्याण समिति एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाओं ने भाग लिया।

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