राजा माैज-मस्ती में, प्रजा परेशान

Ajmer News - जब राजा माैज-मस्ती में व्यस्त रहता है, ताे राज्य में चुगलखाेरी अाैर भ्रष्टाचार का बाेलबाला बढ़ जाता है। एेसे हालात...

Oct 13, 2019, 06:45 AM IST
जब राजा माैज-मस्ती में व्यस्त रहता है, ताे राज्य में चुगलखाेरी अाैर भ्रष्टाचार का बाेलबाला बढ़ जाता है। एेसे हालात में प्रजा के नसीब में दुख-दर्द ही हाथ अाते हैं। यही हकीकत समझाते हुए समय रहते सजग हाेने का संदेश “सैंया भये कोतवाल’ नाटक का मंचन करते हुए दिया गया। यह नाटक शुक्रवार शाम अपना थियेटर की अाेर से स्वामी काम्प्लेक्स में मंचित किया गया। बसंत सबनीस द्वारा लिखित इस विश्व प्रसिद्ध मराठी नाटक का यह हिंदी-राजस्थानी अनुवाद है। निरंजन-राजेन्द्र द्वारा निर्देशित इस नाटक के माध्यम से समकालीन राजनैतिक घटनाओं की प्रतीकात्मक तस्वीर पेश की गई। नाटक में खराब प्रशासन का शानदार तरीके से चित्रण किया गया। नाटक में अजमेर के वरिष्ठ रंगकर्मियों की तिगड़ी निरंजन कुमार, राजेन्द्र सिंह और योबी जार्ज ने अपनी भूमिका से प्रभावित किया। भामिनी निर्वाण, मनोज सोनी, जुम्मा खान और नवादित पार्थ शर्मा ने अपने अभिनय का लाेहा मनवाया। अंकित रंगा ने प्रकाश एवं मनोज सोनी ने ध्वनि संयोजन व मंच व्यवस्था में दीपक राठौड़, दिनेश कालेड़ा और राजीव सोनी ने सहयोग किया।

नाटक शुरू होता है एक ऐसे नगर से जहां भ्रष्टाचार, भाईचारा और चुगलखोरी प्रधान है। राजा शिकार और विदेश पर्यटन में व्यस्त है और उसके कारिंदे उसकी अनुपस्थिति का उपयोग करते हैं। इस बीच राज्य का कोतवाल मर जाता है और राजा प्रधान को उपर्युक्त व्यक्ति को नियुक्त करने का जिम्मा सौंपते हैं। पद का दावेदार हवलदार को सबसे बड़ा झटका तब लगता है जब प्रधान अपने साले को कोतवाल के पद पर नियुक्त कर देता है।

अपने पद को पाने के लिए किस तरह हवलदार कोतवाल को एक नृत्यकी के जाल में फंसा कर अपना पद प्राप्त करता है यही हास्यात्मक ताना बाना है ‘सैंया भये कोतवाल’। कंवलप्रकाश किशनानी ने आभार व्यक्त किया।

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