विपत्ति में साथ देने वाला ही सच्चा मित्र
गौतम आश्रम में किरीट भाई के सानिध्य में चल रही श्रीमद् ब्रह्म भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव का रविवार को समापन हुआ। उन्हाेंने 16 हजार 108 कन्याओं से विवाह के प्रसंग का वर्णन करते हुए भगवान कृष्ण के याैगिक स्वरूप की व्याख्या की। किरीट भाई ने पंच विकार, पंचतत्व, कर्मफल, पांडव मिलन, जरासंध वध के बाद 20 हजार 800 राजाओं की मुक्ति आदि प्रसंगों पर प्रकाश डाला। अंत में उन्हाेंने आयोजक परिवार व भागवत प्रेमियों के साथ विधिवत आरती उतार कर कथा का विराम दिया।
इससे पहले उन्होंने भागवत कथा से किसी के प्रति मन में दुर्भावना या ईष्या नहीं रखने की सीख लेने की शिक्षा दी। अंत में सुदामा चरित्र की व्याख्या करते हुए वे भाव विभाेर हो गए। किरीट भाई ने अपने उपदेश में कहा कि सच्चा दोस्त, मित्र, सखा वह है जो विपत्ति काल में आपका साथ नहीं छोड़ते हैं। इसलिए मित्रता सोच समझकर करनी और निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उन्हें जगत पिता की तपोभूमि में सात दिवसीय भागवत कथा करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। आयोजन समिति के कैलाश खंडेलवाल, ओम प्रकाश मंगल, घनश्याम अग्रवाल, मॉलेश्वर भट्ट, कालीचरण खंडेलवाल, डॉ. विष्णु चौधरी, अशोक टांक, रमेश अग्रवाल, किशन चंद बंसल, लक्ष्मीकांत शाह, हरिओम अग्रवाल, राजेंद्र अग्रवाल, कृष्णकांत ने महाप्रसादी वितरण में सहयोग प्रदान किया। लॉयन क्लब उमंग की अध्यक्ष इंदु टाक, विश्व हिंदू परिषद अजमेर महानगर के अध्यक्ष सत्यनारायण भंसाली, शशि प्रकाश इंदौरिया, बजरंग दल के लेखराज सिंह, ज्योतिषाचार्य पं. कैलाश नाथ दाधीच ने सत्कार किया।
गौतम आश्रम में श्रीमद् ब्रह्म भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के समापन पर भाव-विभोर होकर नृत्य करते श्रद्धालु।