यूनिफाॅर्मिटी ताेड़ने वाली स्कूल यूनिफाॅर्म...शिक्षा, स्कूल, लक्ष्य एक ताे यूनिफाॅर्म अलग क्याें?
मीनाक्षी राठौड़
महिला दिवस विशेष सीरीज -3
मोक्ष मंगलानी, अनुष्का नंबियार
यूनिफाॅर्म का मतलब है बराबर या यूनिटी का प्रतीक। है ना ? लेकिन स्कूलाें में ड्रेस काेड ही यूनिफाॅर्म नहीं। जरा स्कूलाें की यूनिफाॅर्म पर नजर डालिए जाे लड़के अाैर लड़कियाें के लिए अलग-अलग हाेती है। लड़काें के लिए शाॅर्ट्स या ट्राउजर्स ताे लड़कियाें के लिए स्कर्ट, ट्यूनिक या सलवार कमीज। कभी साेचा है अापने कि जब एजुकेशन एक, संस्थान एक, मकसद एक ताे यूनिफाॅर्म अलग क्याें? स्कूलाें में जेंडर न्यूट्रल यूनिफाॅर्म हाेनी चाहिए जिससे लड़केे अाैर लड़कियां शुरू से जेंडर न्यूट्रल अाैर जेंडर सेंसिटिव माहाैल के साथ बड़े हाें।
जेंडर न्यूट्रल यूनिफाॅर्म रही तो बच्चों में लड़का-लड़की का भेद जरूर खत्म होगा
जेंडर भेदभाव से किशोरियां डिप्रेशन का शिकार : रिसर्च**
द गार्डियन में सितंबर, 2017 में छपी एक रिपोर्ट चौंकाने वाली है। इस रिपोर्ट में यूके स्थित संस्थान गर्लगाइडिंग के एक सर्वे के अनुसार सोसाइटी में जेंडर स्टीरियोटाइपिंग यानी जेंडर के अाधार पर होने वाले भेदभाव के कारण दुनियाभर में लड़कियां 14 साल की उम्र तक आते-आते डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं। न्यूरोबायोलॉजिस्ट के अनुसार जन्म के समय लड़के और लड़कियों के दिमाग की क्षमता एक जैसी होती है। लेकिन जब वे किशोरावस्था में प्रवेश करते हैं ,दोनों की सोचने की क्षमता में फर्क आ जाता है। ऐसा उनके साथ हो रहे भेदभाव के बर्ताव अाैर पक्षपात भरे माहाैल के कारण होता है, जिसमें जेंडर के अाधार पर तय किए गए उनके कपड़ाें के रंग, खिलाैने अाैर उनकी अांखाें में भरे गए सपने शामिल हैं। भास्कर के 11 शहरों में 900 महिलाओं के साथ किए गए सर्वे में भी यूनिफॉर्म में भेदभाव की बात सामने आई। करीब 70% महिलाओं का मत था कि स्कूलों में यूनिफाॅर्म ऐसी हो जो महिला-पुरुष का भेदभाव खत्म करे। 11 शहराें में जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, कोटा, सीकर, अजमेर, अलवर, टोंक, भीलवाड़ा और भरतपुर शहर शामिल हैं।
प्रेरणा बी साहनी