राज्यपाल की अगवानी में यूनिवर्सिटी का कायाकल्प

Ajmer News - एमडीएस यूनिवर्सिटी में 30 अक्टूबर काे दयानंद शाेधपीठ में हाेने वाली संगाेष्ठी में राज्यपाल कलराज मिश्र अा रहे हैं,...

Oct 22, 2019, 06:41 AM IST
एमडीएस यूनिवर्सिटी में 30 अक्टूबर काे दयानंद शाेधपीठ में हाेने वाली संगाेष्ठी में राज्यपाल कलराज मिश्र अा रहे हैं, इसलिए प्रबंधन यूनिवर्सिटी काे चमकाने में जुट गया है। साेमवार काे अायाेजन काे लेकर जहां तैयारियाें काे लेकर सलाह मशविरा अाैर बैठकें हाेती रहीं, वहीं परिसर काे चमकाने के काम में भी अचानक तेजी अा गई। यूनिवर्सिटी की बाहरी दीवार से उगी झाड़ियाें काे जेसीबी से साफ कराने का काम किया गया। वहीं लाइब्रेरी के सामने बनाए जाने वाले फाउंटेन काे तैयार करने के लिए भी गति बढ़ाई गई है। सरस्वती मंदिर के जीर्णाेद्धार का काम भी अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इसके पास वाले हिस्से में जलजमाव काे खत्म करने के लिए काेई कदम नहीं उठाया गया है।

11 माह बाद पावर में अाए कुलपति अारपी िसंह की लिस्ट में यूनिवर्सिटी की दशा बदलने का काम पहली फेहरिस्त में ही था, लेकिन अब परिसर की खूबसूरती काे बढ़ाने के िलए कुछ कामाें काे 29 अक्टूबर से पहले ही पूरा कराने की जद्दाेजहद की जा रही है। परिसर में लाइब्रेरी के सामने एक फाउंटेन का निर्माण किया जा रहा है। साेमवार काे अचानक इसमें तेजी लाई गई है। इसे 30 अक्टूबर से पहले ही शुरू किया जाएगा। साफ सफाई, जेसीबी से झाड़ियां हटाई जा रही हैं। झाड़ियां हटाकर दीवार के पास पाैधे लगाने की जगह बना दी गई है।

ब्वाॅयज हॉस्टल बनने के बाद एक बार भी मरम्मत नहीं, गर्ल्स हाॅस्टल की दीवारें भी दरक रही हैं

अजमेर | एमडीएस यूनिवर्सिटी में इस साल भी हॉस्टल सुविधा से विद्यार्थियाें काे महरुम रहना पड़ा है। हालांकि जरूरत के लिहाज से गर्ल्स हॉस्टल में केवल 10 छात्राअाें काे रहने की मंजूरी दी गई थी। लेकिन नियमानुसार दाेनाें ही हॉस्टल में प्रवेश नहीं दिए गए। हॉस्टल की हालत इस कदर खराब है कि दीवारों पर हाथ रखने से ही दीवार का हिस्सा दरकने लगता है। चाैंकाने वाली बात यह है कि ब्वाॅयज हॉस्टल जब से बना है उसकी एक बार भी कभी मरम्मत नहीं कराई गई। एेसे में यह भवन खड़ा खड़ा ही जर्जर हाेता जा रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग पहले कुलपति नहीं हाेने की बात कह कर मरम्मत के कामाें से बचता रहा अाैर अब जब कुलपति अा चुके हैं अाैर सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारी भी बदल दिए गए हैं, उसके बाद भी हॉस्टल की हालत सुधारने की कवायद नहीं हुई है।

एमडीएस यूनिवर्सिटी में 40-40 विद्यार्थियाें की क्षमता के दाे हॉस्टल बनाए गए थे। एक हॉस्टल लड़कियाें के लिए बनाया गया था अाैर दूसरा हॉस्टल लड़काें के लिए। लड़काें लिए 2007 में हॉस्टल बनाया गया था। लेकिन तब से लेकर अाज तक इस हॉस्टल की मरम्मत का काम नहीं कराया गया। बताया जाता है कि इस हॉस्टल में 12 साल में कभी रंगाई पुताई तक नहीं कराई गई। यह जिम्मेदारी सामान्य प्रशासन विभाग के पास हाेती है, कई बार शिकायताें के बाद भी यहां किसी ने ध्यान नहीं िदया अाैर कराेड़ाें का यह भवन अब जर्जर हालत में पहुंच गया है। यही हाल गर्ल्स हॉस्टल का भी है। यहां बाथरूम अाैर किचन दाेनाें की हालात खस्ता है।


सरस्वती मंदिर भी तैयार, कई साल से खंिडत मूर्ति ही रखी हुई है...

लाइब्रेरी के ठीक सामने 2008-2009 में मां सरस्वती मंदिर का निर्माण किया गया था। यह मंदिर तत्कालीन कुलपति प्राेफेसर भगीरथ सिंह ने स्मार्ट बाेर्ड सप्लाय करने वाली एजेंसी से बनवाया था। पहले यह मंदिर ज्यादातर खुला ही था। कुछ समय बाद मां सरस्वती की मूर्ति खंडित भी हाे गई थी। सरस्वती के हाथाें में माैजूद वीणा टूट गई थी, जिससे कैमिकल से जाेड़कर वापस लगा दिया गया। तब से ही यह खंडित मूर्ति मंदिर में रखी हुई है। इस मंदिर के जीर्णाेद्धार का काम भी अंतिम चरण में है। हालांकि इसका उद्घाटन राज्यपाल के कार्यक्रम में शामिल नहीं है, लेकिन कहा जा रहा है कि राज्यपाल मंदिर में जाएंगे। एेसे में इस मंदिर काे पूरी तरह से बेहतर बनाने के लिए काम तेज गति से किया जा रहा है।

बिना उपयाेग जर्जर हाे रहे हैं यूनिवर्सिटी के हॉस्टल

अजमेर | एमडीएस यूनिवर्सिटी में इस साल भी हॉस्टल सुविधा से विद्यार्थियाें काे महरुम रहना पड़ा है। हालांकि जरूरत के लिहाज से गर्ल्स हॉस्टल में केवल 10 छात्राअाें काे रहने की मंजूरी दी गई थी। लेकिन नियमानुसार दाेनाें ही हॉस्टल में प्रवेश नहीं दिए गए। हॉस्टल की हालत इस कदर खराब है कि दीवारों पर हाथ रखने से ही दीवार का हिस्सा दरकने लगता है। चाैंकाने वाली बात यह है कि ब्वाॅयज हॉस्टल जब से बना है उसकी एक बार भी कभी मरम्मत नहीं कराई गई। एेसे में यह भवन खड़ा खड़ा ही जर्जर हाेता जा रहा है। सामान्य प्रशासन विभाग पहले कुलपति नहीं हाेने की बात कह कर मरम्मत के कामाें से बचता रहा अाैर अब जब कुलपति अा चुके हैं अाैर सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारी भी बदल दिए गए हैं, उसके बाद भी हॉस्टल की हालत सुधारने की कवायद नहीं हुई है।

एमडीएस यूनिवर्सिटी में 40-40 विद्यार्थियाें की क्षमता के दाे हॉस्टल बनाए गए थे। एक हॉस्टल लड़कियाें के लिए बनाया गया था अाैर दूसरा हॉस्टल लड़काें के लिए। लड़काें लिए 2007 में हॉस्टल बनाया गया था। लेकिन तब से लेकर अाज तक इस हॉस्टल की मरम्मत का काम नहीं कराया गया। बताया जाता है कि इस हॉस्टल में 12 साल में कभी रंगाई पुताई तक नहीं कराई गई। यह जिम्मेदारी सामान्य प्रशासन विभाग के पास हाेती है, कई बार शिकायताें के बाद भी यहां किसी ने ध्यान नहीं िदया अाैर कराेड़ाें का यह भवन अब जर्जर हालत में पहुंच गया है। यही हाल गर्ल्स हॉस्टल का भी है। यहां बाथरूम अाैर किचन दाेनाें की हालात खस्ता है।


अधूरे कार्य पूरा कर विश्वविद्यालय परिसर निखारने के लिए मशक्कत।

दलदल काे छिपाने के लिए कनात : मंदिर के एक तरफ परिसर के अगल अलग िहस्साे से अाया पानी जमा हाेता रहा है। पानी निकासी के लिए बनाए गए नाले में यूनिवर्सिटी की रद्दी अाैर कचरा इस कदर जमा हुअा है कि यहां से पानी निकास ही बंद पड़ी है। एेसे में लंबे समय से मंदिर के पास पानी जमा हाेता रहा है अाैर यहां दलदल बन गया है। राज्यपाल के मंदिर में अाने की संभावना के चलते इस दलदल काे छुपाने के लिए मंदिर के सामने दाेनाें तरफ कनात लगाने की रणनीति पर चर्चा की गई है।

सरस्वती मंदिर का जीर्णाेद्धार

न मेन गेट, न बाउंड्री, दीवारों से गिर रहे पत्थर| ब्वाॅयज हॉस्टल जिसे नचिकेता हॉस्टल के नाम से शुरू किया गया था। यहां की वर्तमान िस्थति इतनी खराब है कि न ताे यहां मेन गेट ही साबुत बचा है, न ही हॉस्टल की बाउंड्री वाॅल ही बनी हुई है। दस कमरे नीचे के फ्लाेर पर हैं, यहां के सभी बाथरूमाें की वायरिंग खराब हैं। दीवारों पर हाथ रखने भर से ही पत्थर गिरने लगते हैं।

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