झूठे जवाब पेश कर गुमराह क्यों कर रहा है एडीए!
विधायक वासुदेव देवनानी ने योजना की बदहाली पर उठाए सवाल
बाडी नदी के बहाव क्षेत्र में अवैध रूप से बनाए गए सेफ्टी टैंक सहित अन्य निर्माण काे लेकर दर्ज शिकायत पर एडीए प्रशासन ने मुख्यमंत्री संपर्क पाेर्टल पर भी गलत जानकारी अपलाेड कर सरकार काे गुमराह करने की काेशिश की है। एडीए की अाेर से पाेर्टल पर अपलाेड किए गए जवाब में कहा गया है कि विवादित निर्माण काे लेकर काेर्ट में मामला विचाराधीन है जबकि जिस मुकदमे काे विचाराधीन बताया गया है वह 4 जनवरी 2018 काे ही निस्तारित हाे गया था। अब इस प्रकरण में लाेकायुक्त अाैर मुख्यमंत्री काे शिकायत की गई है।
विधानसभा में पूछे गए प्रश्न पर गलत जानकारी देने के बाद अब यह नया मामला अाया है जिसमें सीएम पाेर्टल पर मनमर्जी से जानकारी अपलाेड कर दी गई है। जाे जानकारी अपलाेड की गई उससे यह भी संकेत मिलता है कि अवैध निर्माणकर्ता काे कहीं न कहीं बचाने का प्रयास किया जा रहा है। दरअसल हरिभाऊ उपाध्याय नगर के एक भूखंडधारी ने पास ही में बाडी नदी में अवैध रूप से निर्माण कर लिया जिसकी शिकायत मुख्यमंत्री संपर्क पोर्टल पर हुई ताे इसके जवाब में अधिशासी अभियंता अनूप टंडन ने मामला कोर्ट में विचाराधीन होना बता दिया जबकि कोर्ट में प्रकरण समाप्त हुए दो साल से ज्यादा समय हो चुका है।
विवादित भूखंडाें की सूची में गड़बड़ियां
पृथ्वीराज नगर याेजना के 567 भूखंडाें काे विवादित बताते हुए जाे सूची एडीए ने देवनानी के सवाल के जवाब में दी है, भास्कर ने एडीए की अाेर से पेश सूची काे लेकर कुछ अावंटियाें से बात की कई गड़बड़ियां सामने अाईं हैं। सूची काे याेजना के माैजूदा हालात व धरातल पर स्थिति काे लेकर खंगाला जाए ताे बड़े पैमाने पर गलतियां उजागर हो सकती हैं।
विधानसभा में पृथ्वीराज नगर के विवादित भूखंडों को लेकर पूछे सवाल पर दी गलत जानकारी
सिटी रिपोर्टर | अजमेर
एडीए की 13 साल पुरानी पृथ्वीराज नगर याेजना की बदहाली अाैर विवादित प्लाटाें काे लेकर विधायक वासुदेव देवनानी की अाेर से विधानसभा में उठाए गए मुददे पर एडीए प्रशासन ने जाे जवाब दिया, उसमें गड़बड़ी का मामला सामने अाया है। देवनानी की अाेर से 27 फरवरी काे जाे सवाल पूछे गए थे, उनके जवाब में एडीए ने विवादित प्लाटाें की सूची भी पेश की थी। ‘दैनिक भास्कर’ ने याेजना के कुछ अावंटियाें से जानकारी ली ताे पता चला कि एडीए की सूची में कई एेसे भूखंड हैं जाे विवादित नहीं है, जबकि जाे विवादित हैं उन्हें शामिल ही नहीं किया गया है।
4 जनवरी 2018 को निस्तारित हो गया था मामला
तोपदड़ा निवासी तरुण अग्रवाल ने बताया कि हरिभाऊ उपाध्याय नगर मुख्य में भूखंड संख्या बी-65-ए के आवंटी द्वारा भूखंड पर निर्माण के समय इसके पास से गुजर रही बाडी नदी में सेफ्टी टैंक बना लिया था। शिकायत एडीए काे हुई लेकिन कार्रवाई नहीं हुई ताे अग्रवाल ने अगस्त 2016 में स्थायी लोक अदालत में परिवाद पेश कर दिया। दिसंबर 2016 में एडीए की अाेर से स्थायी लाेक अदालत में राजीनामा किया कि अवैध निर्माण काे हटा दिया जाएगा। लेकिन एडीए अपनी बात पर कायम नहीं रहा अाैर अदालत में राजीनामा करने के बावजूद अवैध निर्माण नहीं हटाया। इसके बाद तरुण अग्रवाल ने अदालत में अवमानना याचिका संख्या 98/17 पेश की और कोर्ट की सख्ती के बाद चार जनवरी 2018 को अवैध निर्माण तोड़ दिया गया और मामला समाप्त हो गया।
शिकायत हुई बाेले - काेर्ट में प्रकरण विचाराधीन | एक बार अवैध निर्माण ताेड़ देने के कुछ समय बाद आवंटी ने दुबारा उसी जगह पर सेफ्टी टैंक बना लिया, जिसकी शिकायत तरुण अग्रवाल ने वापस एडीए से की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। 29 मार्च 2019 को सीएम संपर्क पोर्टल पर इसकी शिकायत संख्या 03191405356190 दर्ज कराई जिसका पांच माह बाद एडीए ने जवाब अपलोड कर बताया कि “प्रकरण कोर्ट में विचाराधीन है’।
विधायक देवनानी के 5 सवालों में विवादित प्लाटाें से जुड़े यह 2 सवाल शामिल हैं
 एडीए द्वारा 2007 में प्रारंभ की गई पृथ्वीराज नगर याेजना में अब तक कितने अावंटियाें काे भूखंडाें का कब्जा नहीं दिया गया है अाैर क्याें? वंचित अावंटियाें की कारण सहित सूची सदन की मेज पर रखें।
 पृथ्वीराज नगर याेजना में वर्तमान में कुल 567 अावंटियाें काे भूखंड का कब्जा नहीं दिया गया है। खातेदाराें के भूमि विवाद, न्यायालय के स्थगन अादेश एवं प्रकरण विभिन्न न्यायालयाें में लंबित रहने के कारण नहीं दिया जा सका है। वंचित अावंटियाें की सूची संलग्न है।
 उक्त वंचित अावंटियाें काे कब्जा देने के लिए सरकार द्वारा अब तक की गई कार्रवाई का विवरण सदन की मेज पर रखें।
 एेसे विवादित भूखंड जिनका अवाप्त भूमि के खातेदाराें के साथ प्रकरण न्यायालयाें में विचाराधीन हाेने के कारण माैके पर कब्जा नहीं दिया जा सका था, लेकिन बची हुई जमीन पर एेसे भूखंडधारियाें काे राहत प्रदान करने के लिए प्राधिकरण की वैकल्पिक भूखंड अावंटन समिति की बैठक 11 मई 2018 की पालना में इसी याेजना में समान क्षेत्रफल के 24 अन्य अविवादित वैकल्पिक भूखंडाें का अावंटन किया जा चुका है। शेष प्रकरणाें के संबंध में प्राधिकरण के स्तर पर कार्रवाई विचाराधीन है।
सीएम पाेर्टल पर 2 साल पहले निर्णीत हो चुके अवैध निर्माण संबंधी केस को बताया पैंडिंग
1. सतीश चंद गुुप्ता काे बी- 350 अावंटित हुअा था जिसे सूची में विवादित बताया गया। गुप्ता के अनुसार यह विवादित नहीं है।
2. सतीश चंद गुप्ता काे लैंड फाॅर लैंड के तहत बी-351 अाैर बी-352 भी अावंटित हुए थे जिन पर जाने का रास्ता तक नहीं है अाैर एडीए ने इन्हें विवादित प्लाट की सूची में शामिल ही नहीं किया है।
3. विनाेद गाेयल का प्लाॅट डी -545 विवादित सूची में है, जबकि गाेयल ने बताया कि उनका प्लाॅट विवादित नहीं है।
4. कैलाशचंद के प्लाॅट जी-7 मिला था, जाे विवादित नहीं है, इसे भी विवादित बताया गया है।
5. सतीश चंद काे अावंटित बी-243 अाैर बी-244 प्लाॅट िववादित हैं लेकिन इस सूची में दाेनाें प्लाट काे शामिल नहीं किया गया।
6. भंवरी देवी काे आवंटित ए-256 प्लाॅट एडीए ने विवादित बताया जबकि यह प्लाट भंवरी देवी बेच चुकी है।
7. शकुंतला बाल्दी काे प्लाट सी-187 का अावंटन 8 सितंबर 2017 काे किया, तब इसे विवादित नहीं बताया अब विवादित बताया गया।
8. शकुंतला बाल्दी के पक्ष में ही तत्कालीन सचिव इंद्रजीत सिंह ने सी- 416 का अावंटन पत्र अप्रैल 2019 को जारी किया, जबकि यह प्लाट गलती से पहले दाे लाेगाें काे अावंटित हाे गया था। यानी यह प्लॉट विवादित है। लेकिन इसे विवादित सूची से बाहर कर दिया है।
9. नवल किशाेर विजय काे सी-115 प्लाट दिया था जाे िववादित हाेने की वजह से उन्हें दूसरा प्लाट दे दिया गया लेकिन सूची में अब भी उनके नाम से ही अंिकत है।
हमें नहीं मिली है एेसी काेई शिकायत
हमने जाे जानकारी दी है वाे सही है। हमारे पास एेसी किसी अावंटी की काेई शिकायत नहीं अाई कि उनका नाम गलत बताया हाे। यदि एेसी काेई शिकायत अापके पास अाई है ताे उसकी जानकारी हमें दें। जांच करके उस बारे में पता लगाकर बताया जाएगा।
- गाैरव अग्रवाल, अायुक्त, अजमेर विकास प्राधिकरण, अजमेर
इस मामले की काेई जानकारी नहीं है। संबंधित अधिकारी एक सप्ताह के अवकाश पर है। यदि एेसा काेई मामला है ताे पूरे मामले काे देखा जाएगा उसी के बाद जानकारी दी जाएगी।
- गौरव अग्रवाल, अायुक्त, अजमेर विकास प्राधिकरण
अारटीअाई से ली जानकारी ताे पता चली एडीए की करतूत | अग्रवाल ने अारटीअाई के तहत एडीए से पूरी जानकारी ली ताे एडीए ने स्थाई लोक अदालत में प्रकरण संख्या 98/17 पर दर्ज होना बताया। अग्रवाल ने इसके बाद अायुक्त काे पत्र देकर चेताया कि अधीनस्थ अधिकारी गलत जानकारी दे रहे हैं लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब अग्रवाल ने लाेकायुक्त व सीएम को शिकायत भेजकर उक्त मामले में कार्रवाई की मांग की है।
हरिभाऊ नगर उपाध्याय योजना में बाडी नदी में वापस हुआ अतिक्रमण।