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उपकरण जांच पैनल के कई सदस्यों ने हाथ खड़े किए, गुणवत्ता पर सवाल

कौशल नियोजन एवं उद्यमिता विभाग के अधीन प्राविधिक शिक्षा निदेशालय, जोधपुर के अफसरों ने प्रदेश की 69 प्रस्तावित...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:15 AM IST

उपकरण जांच पैनल के कई सदस्यों ने हाथ खड़े किए, गुणवत्ता पर सवाल
कौशल नियोजन एवं उद्यमिता विभाग के अधीन प्राविधिक शिक्षा निदेशालय, जोधपुर के अफसरों ने प्रदेश की 69 प्रस्तावित आईटीआई के लिए उपकरणों की खरीद में बजट ठिकाने लगाने का काम ही नहीं किया, बल्कि उपकरणों की गुणवत्ता भी दांव पर लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आईटीआई के लिए जो उपकरण खरीद किए गए उनकी जांच के लिए (उपकरण विशेष की जांच ) जिन्हें विशेषज्ञ माना गया, उन्होंने अपने बचाव के लिए खुद लिखकर दे दिया कि वे उक्त काम के लिए विशेषज्ञता नहीं रखते। इसलिए वे सही जांच नहीं कर पाएंगे। अत: उन्हें इस काम से मुक्ति दे दी जाए। इससे उपकरणों की गुणवत्ता पर प्रश्न चिह्न लग गया है।

दरअसल विभाग की ओर से निर्देश जारी किए गए थे कि उपकरण आते ही उनकी जांच की जाए और सत्यापित करने के बाद इंस्टालेशन सर्टिफिकेट भी दिया जाए। ऐसे में तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा उपकरणों की जांच के सत्यापन के लिए विशेषज्ञों की टीमें बनाई गई। उदाहरण के तौर पर एसी एंड रेफ्रिजरेशन ट्रेड को लें। प्रदेश में इसके गिने चुने ही विशेषज्ञ अनुदेशक हैं। इस कारण उन अनुदेशकों को भी इस ट्रेड के उपकरणों की गुणवत्ता की जांच के सत्यापन के लिए बनाई गई कमेटी में शामिल कर लिया जिनका संबंध इससे है ही नहीं। जांच में कुछ गड़बड़ नहीं हो जाए इसलिए कमेटी के कुछ लोगों ने अपने बचाव के लिए लिखकर दिया है कि वे इस ट्रेड से संबंध नहीं रखते, इसलिए उपकरणों की जांच वे सही तरीके से कर ही नहीं पाएंगे।

अब परीक्षा कैसे कराएंगे

बिना बनी हुई इन आईटीआई के लिए इतने उपकरण आए हैं कि जिन आईटीआई में इन्हें रखवाया गया है वहां अब कमरे फुल हो गए हैं। बरामदों तक में उपकरण रखे हुए हैं। ऐसे में आईटीआई प्रबंधन के समक्ष समस्या हो गई है कि वे कक्षाएं कैसे लगाएं और दूसरे सेमेस्टर की परीक्षाएं कैसे कराएंगे। कुछ आईटीआई प्रबंधन का कहना है कि वे विभाग से निवेदन करेंगे कि या तो सेमेस्टर टू की परीक्षा के लिए उनकी आई आईटीआई में सेंटर ही नहीं बनाया जाए या फिर स्टूडेंट्स की संख्या कम कर दी जाए।

सरकार के आदेश की पालना तो करनी है

उपकरणों को सही तरीके से कमरों में रखवा दिया है। सुरक्षा और टूट-फूट का पूरा ध्यान रखेंगे। बरामदों में भी कुछ सामान रखा हुआ है तो जिम्मेदारी तो है ही। फिर भी सरकार के आदेश हैं तो पालना तो करनी ही है। -सुनील गुप्ता, आचार्य, आईटीआई, भिवाड़ी

कमरे फुल हो गए हैं

काफी संख्या में यहां उपकरण आए गए हैं। इन्हें यहां रखवाया गया है, जिस कारण कमरे फुल हो गए हैं। अब सेमेस्टर टू की परीक्षाएं कैसे कराएंगे। कोशिश करेंगे कि सेमेस्टर टू की परीक्षाओं के लिए यहां सेंटर नहीं हो और हो तो स्टूडेंट्स की संख्या कम की जाए। ताकि परीक्षा कराने में दिक्कत नहीं हो। -सुभाष स्वामी, सेंटर सुपरिटेडेंट, महिला आईटीआई, अलवर

रात को पहुंचाए उपकरण ताकि जल्दी मिल जाए रिसिप्ट

प्राविधिक शिक्षा निदेशालय, जोधपुर से इस प्रकार आदेश जारी किए गए कि फर्मों द्वारा उपकरण कभी भी आ सकते हैं, इसलिए अवकाश के दिनों में भी आईटीआई को खुला रखा जाए। उधर उपकरणों की आपूर्ति करने वाली फर्मों ने दिन देखा न रात उपकरण पहुंचाने में लग गई। कई आईटीआई में रात 12 बजे बाद तो किसी में अल सुबह 3 बजे उपकरणों की आपूर्ति की गई। ऐसे में सामान उतरवाना, उसकी गणना, बिल जांच, सही जगह रखवाना आदि कामों में वक्त बे-वक्त स्टाफ खपता रहा। उपकरणों की आपूर्ति करने वाली फर्मों ने इसका जमकर फायदा उठाया और काफी संख्या में उपकरण देर शाम या रात को पहुंचाए। यह समय स्टाफ के जाने का होता है और रात को पूरा स्टाफ मौजूद नहीं रह सकता। ऐसे में इस समय उपकरणों की आपूर्ति के बाद आपूर्तिकर्ता फर्मों को बड़ी आसानी से रिसिप्ट मिल गई और वे फ्री हो गई।

जिम्मेदारी बढ़ी

फर्मों ने तो जैसे-तैसे उपकरणों की आपूर्ति कर बिल पास करा लिए और अपनी जेबें भर ली। अब समस्या हो गई है आईटीआई स्टाफ की। क्योंकि जब तक संबंधित आईटीआई बन नहीं जाती जब तक उसके उपकरणों की जिम्मेदारी इन्हीं पर रहेगी। उपकरणों की सुरक्षा, आईटीआई बनने पर उपकरणों की फिर से लो डिंग और वहां अपलो डिंग, टूट-फूट की जिम्मेदारी और सही जगह पर इंस्टालेशन यह सब जिम्मेदारी बढ़ गई है।

विभाग के निदेशक ने फोन ही नहीं उठाया

इस संबंध में और जानकारी के लिए तथा विभाग का पक्ष जानने के लिए के निदेशक एके आनंद को उनके मोबाइल नंबरों पर कई बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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