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गांव की महिलाएं अब भी हिंसा झेलती हैं और सुनवाई नहीं होती : युविका

ओलिंपियन व कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट कृष्णा पूनिया का कहना है कि खेलों के बाद वे राजनीति में समाज सेवा का...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:30 AM IST

गांव की महिलाएं अब भी हिंसा झेलती हैं और सुनवाई नहीं होती : युविका
ओलिंपियन व कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट कृष्णा पूनिया का कहना है कि खेलों के बाद वे राजनीति में समाज सेवा का भाव लेकर शुरुआत करने जा रही हैं। इसमें आने का उद्देश्य महिलाओं की सामाजिक स्थिति को बेहतर बनाना है। रविवार को यहां किडजी स्कूल के उद्घाटन कार्यक्रम में भाग लेने आई पूनिया ने पत्रकारों को बताया कि खेलों में महिलाएं अपना पूरा दमखम दिखा रही हैं। माना जा रहा है कि विश्व स्तर पर भारतीय महिलाएं अपने आपको स्थापित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि खेल के बाद वे अब समाज का नजरिया बदलने के लिए राजनीति में आ रही हैं। उन्होंने कांग्रेस का भविष्य सुंदर बताया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि देश में महिलाओं की स्थिति वैसी नहीं है, जैसी होनी चाहिए। महिलाओं की सामाजिक स्थिति में बदलाव की आवश्यकता है। खेल हो या अन्य कार्य, महिलाएं अपने प्रदर्शन से जता रही हैं कि वे किसी अन्य देश की महिलाओं से कम ताकतवर नहीं हैं। बशर्त है सामाजिक पक्ष अपना दृष्टिकोण बदले।

फिल्म अभिनेत्री युविका चौधरी ने प्रश्न का जबाव सवाल से दिया। क्या समाज महिलाओं की दशा में सुधार के लिए कदम उठा रहा है? महिलाएं अपने आपको हर क्षेत्र में स्थापित कर रही हैं। इसके बावजूद आज भी गांवों व शहरों में महिलाओं की स्थिति वैसी नहीं है, जैसी होनी चाहिए। महानगरों में तो महिलाओं को कुछ करने के अवसर मिल रहे हैं। छोटे शहरों व कस्बों के हालात ठीक नहीं है। अन्यथा किसी को कन्या भ्रूण हत्या, महिलाओं पर हिंसा व समाज को झकझोर देने वाली अन्य घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाने की आवश्यकता नहीं होती। पूनिया के साथ स्कूल के उद्घाटन समारोह में आई अभिनेत्री युविका ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि परिवार के सदस्यों के साथ सामाजिक रूप से महिलाओं को बढ़ावा मिले तो वे सामाजिक रूप से एक बड़ा बदलाव ला सकती हैं। उन्होंने कहा कि फिल्में तो हमेशा महिलाओं के सुधार की पक्षधर रही हैं। सामाजिक रूप से सोच बदलनी चाहिए।

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