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दिल के डॉक्टर को जन्मदिन पर जनता का तोहफा, दिल खोलकर दिए वोट

अलवर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ.करण सिंह यादव ने भाजपा प्रत्याशी डॉ.जसवंत यादव को 1 लाख 96...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 04:15 AM IST

अलवर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ.करण सिंह यादव ने भाजपा प्रत्याशी डॉ.जसवंत यादव को 1 लाख 96 हजार 496 वोट के बड़े अंतर से हरा दिया है। अलवर सीट के लिए अब तक हुए चुनाव में कांग्रेस पार्टी की यह सबसे बड़ी जीत है। हालांकि 2014 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी महंत चांदनाथ ने 2 लाख 83 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी। एक फरवरी को डॉ.करण सिंह यादव का जन्मदिन भी है। यह संयोग है कि अलवर की जनता ने दिल के डॉक्टर को उनके जन्मदिन पर जीत का बड़ा तोहफा दिया है।

अलवर संसदीय सीट के लिए हुए उपचुनाव में कांग्रेस व भाजपा सहित कुल 11 प्रत्याशी मैदान में थे। 29 जनवरी को मतदान हुआ था। लोकसभा की सभी आठों विधानसभाओं में कुल 11 लाख 27 हजार 876 मतदाताओं ने वोट डाले। इनमें कांग्रेस प्रत्याशी डॉ.करण सिंह यादव को 6 लाख 42 हजार 416 तथा भाजपा प्रत्याशी डॉ.जसवंत यादव को 4 लाख 45 हजार 920 वोट मिले। इस प्रकार डॉ.करण सिंह यादव ने 1 लाख 96 हजार 496 वोट से जीत दर्ज की है।

9 प्रत्याशियों की जमानत जब्त, नोटा को मिले 15 हजार 93 वोट : शेष सभी 9 प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए। इस चुनाव में एक चौंकाने वाला आंकड़ा भी सामने आया। चुनाव में नोटा को 15 हजार 93 वोट दिए हैं। यह संख्या भाजपा व कांग्रेस के अलावा चुनाव लड़े अन्य सभी प्रत्याशियों को मिले मतों से ज्यादा है।

अलवर. जीत की खुशी में फूलबाग पैलेस में कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. करण सिंह, पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह एवं पूर्व मंत्री दुर्रु मियां।

पोस्टल बैलेट के कारण रुकी रही मतगणना

मतगणना स्थल पर डाक मतपत्रों की गणना में समय लगने के कारण ईवीएम के जरिए हो रही मतगणना को बीच में ही रोकना पड़ा। डाक मतपत्रों की गणना प्रत्येक मत को स्कैन करने के बाद उसकी वैधता के बाद ही होनी थी। एक-एक मत को स्कैन करने में लगे समय के कारण यह काम तय समय पर पूरा नहीं हुआ। इसके चलते फाइनल रिजल्ट देरी से जारी किए गए। इस बीच में ईवीएम की मतगणना को रोका गया।

भाजपा की हार के पांच प्रमुख कारण

जिले के विधायकों से जनता की नाराजगी।

चार साल के भाजपा शासन में जिले में विकास का कोई बड़ा काम नहीं हुआ।

सरकार से कर्मचारियों की नाराजगी।

जीएसटी व नोटबंदी से हुई परेशानी।

युवाओं को रोजगार नहीं मिलना।

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