--Advertisement--

आयकर सीमा न बढ़ने से 70 हजार करदाता हुए निराशा

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली की ओर से गुरुवार को पेश बजट से अलवर जिले के करीब 70 हजार आयकर दाताओं को निराशा हुई...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 04:15 AM IST
केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली की ओर से गुरुवार को पेश बजट से अलवर जिले के करीब 70 हजार आयकर दाताओं को निराशा हुई है। माना जा रहा था कि बजट में आयकर की छूट सीमा में बढ़ोतरी होगी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बजट घोषणा से जिले के करीब 35 हजार नौकरीपेशा लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। ऐसा वेतनभोगियों को 40 हजार रुपए की मानक कटौती के रूप में दिए गए लाभ के बारे में कहा जा रहा है। हालांकि इस बारे में 19,200 रुपए के परिवहन भत्ते व 15 हजार रुपए की चिकित्सा क्षतिपूर्ति वापस ली जा रही है। इससे लाभ केवल 5,800 रुपए होगा। किसानों व कृषि व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों को लाभ होगा। साथ ही उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद की जा रही है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए बैंक ब्याज सीमा 10 हजार से बढ़ाकर 50 हजार करने को राहत भरा कदम बताया जा रहा है। इससे करीब 23 हजार सेवानिवृत्त पेंशनर्स को राहत मिलेगी।

सीए नीरज गर्ग ने बताया कि बजट में विशेष राहत नहीं है। फिर भी औद्योगिक क्षेत्र में विशेष राहत देने वाला है। विशेष रूप से मध्यम, छोटे व अन्य उद्योगों को राहत दी गई है। इससे जिले में औद्योगिक विकास होगा। कुल कारोबार 250 करोड़ रुपए से अधिक नहीं करने वाली घरेलू कंपनियों के लिए वित्तीय वर्ष 2015-16 में 50 करोड़ रुपए की वर्तमान सीमा के मुकाबले 25 प्रतिशत कर देने के लिए उत्तरदायी होगा। मकान खरीदने पर डीएलसी की दरों पर 5 प्रतिशत का कमी या अधिकता स्थान के आधार पर हो सकेगी।

कला कॉलेज में अर्थशास्त्र के एसोसिएट डॉ. सत्यभान यादव का कहना है कि सरकारी वेतन भोगियों को कोई लाभ नहीं दिया गया है। साथ ही रोजगार के क्षेत्र में सरकार अपने वादे को निभा नहीं पा रही है। पहले सरकार ने दो करोड़ नौकरियां देने, फिर एक करोड़ नौकरियां देने और अब 70 लाख नौकरियां देने का लक्ष्य रखा है। यादव का कहना है कि ग्रामीण लोगों को लाभ देने के लिए इस बजट में प्रयास किए गए हैं। इन्हें अच्छा कहा जा सकता है। खेती का बाजार मजबूत करने के लिए 2000 करोड़ रु. के बजट से किसानों को लाभ मिलेगा।

उद्योग जगत से जुड़े मोहन निहलानी का कहना है कि लघु, मझौले व मध्यम औद्योगिक इकाइयों के लिए बजट में कुछ राहत है, लेकिन पिछड़े औद्योगिक क्षेत्रों के लिए रियायत नहीं दी गई है। अलवर के औद्योगिक विकास के लिए कुछ भी नहीं दिया गया है।

कृषि उपज मंडी के पूर्व अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल जलालपुरिया का कहना है कि खेती आधारित बाजार व किसानों को राहत देने के लिए उठाया कदम राहत भरा कहा जा सकता है। माना जा रहा है कि बजट लोक लुभावन नहीं है। फिर भी भविष्य में यह विकास को बढ़ाने वाला होगा।

गृहिणी मोना गुप्ता का कहना है कि सरकार ने पेट्रोल-डीजल की दर कम की है, लेकिन इसे राहत नहीं कहा जा सकता, क्योंकि पहले ही इनके दाम सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गए हैं। बजट में महिलाओं के लिए विशेष कुछ नहीं दिया गया है।

सीए नीरज गर्ग

डॉ. सत्यभान यादव

मोहन निहलानी

सुरेश जलालपुरिया

मोना गुप्ता

X
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..