• Home
  • Rajasthan News
  • Alwar News
  • हैदराबाद से लाकर की थी चामुुंडा माता की मूर्ति की स्थापना तभी से प्रज्वलित है अखंड ज्योत
--Advertisement--

हैदराबाद से लाकर की थी चामुुंडा माता की मूर्ति की स्थापना तभी से प्रज्वलित है अखंड ज्योत

सकट. बिद्याेता गांव िस्थत चामुंडा माता का मंदिर। बिद्योता में पहाडिय़ों से घिरा चामुंडा माता का मंदिर है जन-जन...

Danik Bhaskar | Feb 02, 2018, 04:15 AM IST
सकट. बिद्याेता गांव िस्थत चामुंडा माता का मंदिर।

बिद्योता में पहाडिय़ों से घिरा चामुंडा माता का मंदिर है जन-जन की आस्था का केंद्र

राजेंद्र मीणा | सकट

जिले की अंतिम सीमा में राजगढ़ पंचायत समिति के गांव बिद्योता में चारों ओर पहाडिय़ों से घिरे चामुंडा माता का मंदिर जन-जन की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहां प्रत्येक दिन माता के दर्शनों के लिए आसपास सहित दिल्ली, जयपुर, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, अलवर, दौसा, करौली, सवाईमाधोपुर एवं अन्य जगहों से श्रद्धालु पहुंचते है और माता के यहां हर मंगलवार व शनिवार एक या दो सवामणी श्रद्धालुओं द्वारा की जाती है।

मंदिर का इतिहास : बिद्योता गांव के पांचू राम शर्मा, सत्यनारायण पांचाल एवं धाना का गुवाड़ा के हरबकश मीणा आदि बुजुर्गों ने बताया कि यहां स्थित चामुंडा माता का मंदिर लगभग 1467 वर्ष पुराना है। मंदिर में माता की मूर्ति की स्थापना गांव के दो भाई काल एवं भोला ने हैदराबाद से लाकर की थी। उन्होंने बताया कि पहले चामुंडा माता को हींगाला देवी चावंड माता के नाम से जाना जाता था। यहां मंदिर में तब से लगातार 24 घंटे देसी घी की अखंड ज्योत जलती रहती है और यहां माता के मंदिर पर वैशाख मास की पूर्णमासी को माता का दो दिवसीय विशाल मेला आयोजित होता है। ग्रामीणों ने बताया कि चामुंडा माता की मूर्ति स्थापित करवाने वाले दोनों भाइयों ने एक भाई जिसका नाम काला था उसने बिद्योता व भोला नाम के भाई ने कुंडला गांव बसाया था जो दोनों ही गांव आज पंचायत मुख्यालय है।

आस्था का केंद्र

चामुंडा माता मंदिर

गांव की कॉमेडी के जिम्मे मंदिर की देखरेख का सारा संभाल

बिद्योता गांव पंचायत के सरपंच सुरेश चंद पांचाल एवं समाजसेवी लीला राम मीणा ने बताया कि मंदिर की देखरेख एवं सार संभाल के लिए ग्रामीणों ने गांव के एक स्थानीय ग्रामीणों की एक कमेटी बना रखी है जो मंदिर में आने वाले चढ़ावे से मंदिर का जीर्णोद्धार व मंदिर निर्माण कार्य को बढ़ाती है। यहां मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा कई धर्मशालाएं एवं पानी की टंकी बना रखी है। ग्रामीण बताते हैं कि आज बिद्याेता गांव की पहचान चामुंडा माता मंदिर के कारण दूर-दराज क्षेत्रों तक फैली हुई है।