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सामाजिक सुरक्षा अधिकारी को चैंबर से बाहर निकाला

अलवर | सरकारी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार के लगातार दबाव से अधिकारियों का बेकाबू होना शुरू हो गया है।...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 07:20 AM IST
अलवर | सरकारी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए सरकार के लगातार दबाव से अधिकारियों का बेकाबू होना शुरू हो गया है। उपचुनाव में मिली हार के बाद सरकार ने ब्यूरोक्रेसी को कसा तो इसके नतीजे सामने आना शुरू हो गए हैं। कहीं काम के दबाव में हाथापाई की नौबत आ रही है, तो कहीं तालमेल के अभाव में योजनाओं की क्रियान्विति मुश्किल हो रही है। ताजा मामला बहरोड़ के सामाजिक सुरक्षा अधिकारी से बहरोड़ सीएचसी के डॉक्टर देवेंद्र यादव द्वारा अभद्र व्यवहार करने और बांह पकड़कर मुख्य चिकित्साधिकारी के चैंबर से बाहर धकेलने का है। सामाजिक सुरक्षा अधिकारी हेमंत सैनी ने पूरे मामले की शिकायत कलेक्टर राजन विशाल से करते हुए जांच कराने और दोषी डॉक्टर पर कार्रवाई करने की मांग की है। हेमंत का कहना है कि डॉक्टर के व्यवहार के कारण वह तीन दिन तक मानसिक तनाव में रहा। सामाजिक रूप से डॉक्टर द्वारा अधिकारियों की मौजूदगी में गलत व्यवहार किया गया। ऐसे में कार्य करने में परेशानी होती है। इसलिए कार्रवाई की जाए। सामाजिक सुरक्षा अधिकारी हेमंत सैनी का कहना है कि कलेक्टर एवं एसडीएम द्वारा ली गई बैठक में मिले निर्देशों के बाद मैं बीसीएमओ व प्रोग्रामर के साथ सीएचसी में 24 फरवरी को गया था। यहां पहले डाटा मिसमैचिंग को ठीक किया। फिर जहां दिव्यांगों का प्रमाणीकरण होता है, वहां मॉनिटरिंग व व्यवस्था देखने गया था। जिस हॉल में प्रमाणीकरण होता था, वहां ताला लगा था। ताला लगा देख हमने अन्य कमरों में देखा तो डॉ. देवेंद्र वहां मिले। मैंने सिर्फ यह पूछा था कि हमें ही ढूंढना पड़ा तो दिव्यांगों को तो परेशानी होती होगी, डाक्टर साहब आज यहां कैसे बैठे हो? इतना पूछते ही वे आगबबूला हो गए और बोले कि आप कौन होते हो मुझसे यह पूछने वाले? मैंने कहा कि कलेक्टर व एसडीएम के आदेशों के बाद व्यवस्था देखने आए हैं, तो डाक्टर बोले कि कह दो कलेक्टर से, मेरा प्रिंसिपल सेक्रेट्री भी कुछ नहीं बिगाड़ सकते। कहो तो नंबर दूं। इसके बाद मुख्य चिकित्साधिकारी ने डाॅक्टर को बुलाया और बात की तो वहां भी मुझे देखकर अभद्रता की और मुझे बांह पकड़कर बाहर निकाल दिया। बाद में स्टाफ ने डाॅक्टर की तरफ से माफी मांगी, लेकिन मैं बिना कुछ कहे वहां से आ गया। मैं तीन दिन मानसिक तनाव में रहने के बाद कलेक्टर के यहां मामला लेकर पहुंचा।



चुनावों में हार के बाद अधिकारियों पर काम का दवाब, विवाद भी बढ़ने लगे