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गणगौर पूजा शुरू, गोर-गोर गोमती ईसर पूजे पार्वती... के स्वर गूंजने लगे

पूर्व राजपरिवार की ओर से निकाली जाएगी सवारी अलवर | होलिका दहन के अगले दिन धुलंडी को शुक्रवार से गणगौर पूजा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 04, 2018, 07:25 AM IST

गणगौर पूजा शुरू, गोर-गोर गोमती ईसर पूजे पार्वती... के स्वर गूंजने लगे
पूर्व राजपरिवार की ओर से निकाली जाएगी सवारी

अलवर | होलिका दहन के अगले दिन धुलंडी को शुक्रवार से गणगौर पूजा शुरू हो गई, जो 20 मार्च तक चलेगी। लड़कियों द्वारा मनचाहा वर प्राप्ति के लिए और सुहागन महिलाओं द्वारा अखंड सौभाग्य के लिए गणगौर पूजा की जाती है। गण के रूप में भगवान शिव और गौर के रूप में माता पार्वती की पूजा की जाती है। दूब, काजल, बिंदी, मेहंदी व फूल से गणगौर पूजा की जाती है। पूजा के दौरान मोहल्ले, काॅलोनियों व गांवों में गोर-गोर गोमती ईसर पूजे पार्वती... सहित गणगौर के अन्य गीतों की गूंज भी सुनाई देने लगी है। शाम को गणगौर पूजा के दौरान बिंदोरा भी निकाला जाएगा। 20 मार्च को गणगौर का मुख्य पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सूर्यास्त से पहले तालाब, नदी व कुओं में गणगौर के विसर्जन के साथ पूजा संपन्न होगी। पूर्व राजपरिवार के निजी सचिव नरेंद्रसिंह राठौड़ ने बताया कि पूर्व राज परिवार की ओर से 20 मार्च की शाम 5 बजे जनानी ड्योढ़ी से पालकी में गणगौर की सवारी निकाली जाएगी।

भस्मी से बनती है गणगौर : पं. यज्ञदत्त शर्मा के अनुसार होलिका दहन की भस्मी (राख) से गणगौर बनाने का महत्व है। यह शुभ मानी जाती है। भस्मी से ईसर और गौर की एक-एक प्रतिमा बनाई जाती है। बाजार में आजकल रेडिमेड गणगौर भी मिलती है, जो मिट्टी व लकड़ी से बनी होती है।

दूब का है विशेष महत्व : दूब को गणेशजी का प्रतीक माना गया है। गणेश जी पार्वती के पुत्र हैं। इसलिए गणगौर पर दूब से पूजा करने का विशेष महत्व है।

अलवर. ईसर-गणगौर की पूजा।

चेटीचंड पर निकालेंगे शोभायात्रा, बैठक आज

अलवर| झूलेलाल सिंधी पंचायत ट्रस्ट की रविवार को झूलेलाल मंदिर में बैठक होगी। इसमें 19 मार्च को मनाए जाने चेटीचंड महोत्सव की तैयारी पर चर्चा होगी। ट्रस्ट के प्रवक्ता ने बताया कि 19 मार्च को सुबह झंडारोहण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होगी। इसके बाद बेहराणा साहिब की ज्योत प्रज्जवलित की जाएगी। जनेऊ, मुंडन व सामूहिक विवाह का आयोजन होगा। दोपहर दो बजे सिंधु भवन से शोभायात्रा निकाली जाएगी, जो प्रमुख मार्गों से होती हुई मंगल परिणय मैरिज होम पहुंचकर संपन्न होगी। रात्रि को सिंधु भवन में सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा।

मुनि सुव्रतनाथ विधान का हुआ आयोजन

अलवर| दिगंबर जैन अग्रवाल पंचायती मंदिर की ओर से शुक्रवार को स्कीम 10 स्थित पार्श्वनाथ चौबीसी मंदिर में मुनि सुव्रतनाथ विधान का आयोजन हुआ। सुबह श्रीजी के अभिषेक के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई। इसके बाद शांतिधारा, पर्व पूजन, पं. प्रफुल्ल कुमार जैन शास्त्री के सानिध्य में मुनि सुव्रतनाथ विधान का आयोजन हुआ।

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