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सभी जनहित याचिकाएं अब चीफ जस्टिस सुनेंगे

नई दिल्ली | काम के बंटवारे को लेकर चार जजों के नाराजगी जताने के बाद सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था बदल गई है। गुरुवार को...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 05:45 AM IST
नई दिल्ली | काम के बंटवारे को लेकर चार जजों के नाराजगी जताने के बाद सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था बदल गई है। गुरुवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने काम के बंटवारे का राेस्टर जारी किया। इसमें तय किया कि कौनसे जज के पास किस सब्जेक्ट के केस जाएंगे। 5 फरवरी से अमल में आने वाली यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट में पहली बार लागू होगी। इसे चारों जजों के लिए झटके के तौर पर देखा जा रहा है। अब सभी जनहित याचिकाओं पर सिर्फ सीजे की बेंच ही सुनवाई करेगी। संविधान पीठ में जज भी वही तय करेंगे।

पांच फरवरी से अमल में आएगी व्यवस्था

चीफ जस्टिस ये देखेंगे

सभी जनहित याचिका, लेटर पिटीशन, बंदी प्रत्यक्षीकरण, आपराधिक, अवमानना, सिविल, जांच आयोग, कानूनी अधिकारियों की नियुक्ति, सामाजिक न्याय, संवैधानिक, सर्विस, चुनाव, आर्बिट्रेशन और संवैधानिक नियुक्तियों से जुड़े मामले चीफ जस्टिस की कोर्ट में आएंगे।

पुराना सिस्टम : चीफ जस्टिस की सलाह से रजिस्ट्री बांटती थी काम

काम आवंटन का कोई क्राइटेरिया नहीं था। चीफ जस्टिस की सलाह से रजिस्ट्री केस बांटती थी। सिर्फ चीफ जस्टिस ही जानते थे कि किसके पास कैसे मामले हैं। वह अपनी मर्जी से किसी के भी पास जनहित याचिका भेज सकते थे।

नई व्यवस्था : क्राइटेरिया तय, किसके पास-कौनसा सब्जेक्ट

व्यवस्था पारदर्शी हो गई। सबको पता होगा कि किस सब्जेक्ट की सुनवाई कौनसी बेंच करेगी। जनहित याचिकाओं पर सुनवाई सिर्फ चीफ जस्टिस की बेंच ही करेगी। यह सिस्टम कई हाईकोर्ट में पहले से लागू है।

नाराजगी जताने वाले चारों जजों के पास ये

जस्टिस जे चेलमेश्वर:
श्रम, अप्रत्यक्ष कर, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, साधारण सिविल, साधारण धन व गिरवी संपत्ति केस।

जस्टिस रंजन गोगोई: श्रम, अप्रत्यक्ष कर, कंपनी लॉ, सेबी, ट्राई, आरबीआई, अवमानना, पर्सनल लॉ, बैंकिंग आिद।

जस्टिस मदन बी लोकुर: भूमि अधिग्रहण, नौकरी, वन, वन्य जीवन, पर्यावरण असंतुलन, सामाजिक न्याय, साधारण सिविल केस, सशस्त्र बलों से जुड़े केस।

जस्टिस कुरियन जोसेफ: श्रम, किराया, नौकरी, अपराध, परिवार कानून, अवमानना, पर्सनल लॉ आिद केस।

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