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गांवों से अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की कोशिश

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 05:45 AM IST

राजीव कुमार उपाध्यक्ष, नीति आयोग ग्रामीण क्षेत्र के सारे पहलू देखने वाला विज़न। किसान की आय बढ़ी तो 10 फीसदी...
राजीव कुमार उपाध्यक्ष, नीति आयोग

ग्रामीण क्षेत्र के सारे पहलू देखने वाला विज़न। किसान की आय बढ़ी तो 10 फीसदी वृद्धि की आधारशिला स्थापित हो जाएगी।

स्वास्थ्य रक्षा योजना गेम चेंजर साबित होगी

पीके गुप्ता एमडी, रिटेल व डिजिटल बैंकिंग, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया

ऑर्गनिक खेती, मत्स्य व पशुपालन में क्रेडिट कार्ड सुविधा का विस्तार व ‘डेढ़ गुना’ आय का फॉर्मूला रचनात्मक कदम।

कनेक्टिविटी बढ़ाने से देश में बढ़ेगा रोजगार

दीप कालरा ग्रुप चेयरमैन एंड सीईओ, मेक माय ट्रिप

10 पर्यटन स्थलों को विकसित करने और अमृत प्रोग्राम के तहत सुविधाओं में वृद्धि सही दिशा में जाने के संकल्प की बानगी है।

बजट ऐतिहासिक है, क्योंकि कृषि क्षेत्र का आमूल परिवर्तन किया गया है। किसान की आय, उत्पादन और ग्रामीण क्षेत्र के सारे पहलुओं को एक साथ देखना और कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, ग्रामीण विकास और नीति आयोग जैसे चार विभागों को मिलकर काम करने को कहा गया हो कि किसान की आमदनी बढ़ाने के लिए काम करें तो यह बड़ी बात है। इसके लिए 14.5 लाख करोड़ रुपए रखे गए हैं। यदि ग्रामीण क्षेत्र की आमदनी बढ़ गई तो यह भारत की 10 फीसदी दर से वृद्धि की आधारशिला साबित होगी। हमारी सबसे बड़ी दिक्कत ही यह है कि इतना विशाल ग्रामीण क्षेत्र पिछड़ा हुआ रहा है। उसे जो नीचे से पुश मिलना चाहिए था, वह नहीं मिल रहा था। करदाता के लिए 40 हजार का स्टैंडर्ड डिडक्शन है तो बुजुर्गों को ब्याज से आय पर छूट की सीमा बढ़ाई है। स्वास्थ्य रक्षा योजना के दायरे में जो 10 करोड़ परिवार लिए हैं, उसमें बीपीएल के पांच करोड़ ही हैं, शेष तो मध्यम वर्ग ही है। बजट घोषणाओं से 70 लाख जॉब पैदा होने की बात कही है लेकिन, मुझे लगता है कि रोजगार इससे अधिक बढ़ेगा।

सरकार का फोकस कृषि, ग्रामीण विकास और वंचित तबकों पर है। वित्तमंत्री को बधाई कि बजट भविष्य के लिए नया विज़न देता है। किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा का विस्तार कर ऑर्गनिक खेती, मत्स्यपालन और पशुपालन को बल दिया गया है। किसानों के सोलर पैनल से पैदा अतिरिक्त बिजली वितरण कंपनियों को देने और कृषि उपज की लागत का ‘डेढ़ गुना’ का फॉर्मूला रचनात्मक कदम हैं। वरिष्ठ नागरिकों के लिए कई सकारात्मक बातें हैं। बैंकों व डाकघरों में जमा पर ब्याज से होने वाली आय पर छूट 10 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर दी गई है। सोने के लिए व्यापक नीति बनाना महत्वपूर्ण घोषणा है। 10 करोड़ गरीब परिवारों को स्वास्थ्य रक्षा का फायदा देने की योजना ‘जन सुरक्षा योजना’ की तरह गेम चेंजर होगा और देश के करोड़ों लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाएगी। अब 250 करोड़ से कम टर्नओवर वाले मध्यम व छोटे उद्योगों को कॉर्पोरेट टैक्स कम देना होगा। इसका फायदा ऑटो एंसिलरी, एमएमसीजी, फर्टिलाइजर और बहुत से अन्य उद्योगों को मिलेगा।

जीएसटी लागू होने के बाद पहला और मौजूदा एनडीए सरकार का अंतिम पूर्ण बजट नि:संदेह एेतिहासिक और अवसरों से भरा बजट है। अपेक्षाओं के अनुरूप सरकार ने वाकई एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण और छोटे विमानतलों के नवीनीकरण के लिए काफी अच्छा काम किया है। उड़ान 2.0 कम इस्तेमाल होने वाले 56 विमानतलों और हेलिपैड तक कनेक्टिविटी देगी। यह तृतीय-चतुर्थ वर्ग के शहरों तक कनेक्टिवटी हासिल करने की दिशा में सही कदम है। देश में अधिक विदेशी पर्यटक आकर्षित करने के लिए 10 पर्यटन स्थलों को विकसित करने की योजना और अमृत प्रोग्राम के तहत सुविधाओं में वृद्धि सही दिशा में जाने के संकल्प की बानगी है। रेलवे के लिए वाई-फाई और सीसीटीवी जैसी स्टेट-ऑफ-द-आर्ट सुविधाओं के लिए 1,48,528 करोड़ रुपए स्वागतयोग्य कदम है। इससे न सिर्फ घरेलू पर्यटन बढ़ेगा बल्कि होटल व उड्‌डयन सेक्टर में सकारात्मक प्रभाव भी पड़ेगा, जिसके बदले में रोजगार तथा जीडीपी में इस क्षेत्र का योगदान बढ़ेगा। मेक माय ट्रिप में हम भविष्य की वृद्धि और अवसरों को लेकर बहुत उत्साहित हैं।

वित्तमंत्री साहस कब दिखाएंगे?

बजट में ग्रामीण क्षेत्र के विकास पर जोर देकर कई उद्‌देश्य साधने की कोशिश की गई है। लेकिन, लगभग न के बराबर वजूद रखने वाली जिला स्तरीय अर्थव्यवस्था को एक ही साल में खड़ा करने की उम्मीद ठीक नहीं है। वित्तीय घाटे को पहले की तरह अनुशासन के दायरे में रखना भी बजट को दूरदर्शी बनाता है। चुनाव को ध्यान में रखकर ही सही, अंतत: खेती सरकार के फोकस में आई है।

प्रीतीश नंदी

वरिष्ठ पत्रकार

गुरचरण दास स्तंभकार व लेखक

शेखर गुप्ता एडिटर इन चीफ, द प्रिंट

वेदप्रताप वैदिक भारतीय विदेश नीति परिषद के अध्यक्ष

देविंदर शर्मा कृषि विशेषज्ञ

राम सिंह दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स

यह अच्छा किया

किसानों को काफी कुछ मिल सकता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने का पुराना वादा पूरा हुआ। खरीफ फसल से उन्हें 50 फीसदी के मुनाफे की गारंटी है। स्वास्थ्यरक्षा में पहल का स्वागत है। गरीब परिवार एक गंभीर बीमारी के प्रहार से पूरी तरह बर्बाद हो जाते हैं। उम्मीद है यह राष्ट्रीय स्वास्थ्य रक्षा कार्यक्रम का हिस्सा बनेगा। कई कम आय वाले परिवार हेल्थकेयर की बढ़ती लागत से निपट सकें।

वित्तमंत्री अरुण जेटली के इस कार्यकाल का यह अंतिम पूर्ण बजट दूरदर्शी बजट है। इसमें वित्तीय घाटे को जीडीपी के 3.5 फीसदी के बराबर पर रोक दिया गया है। आदर्श स्थिति तो यह होती कि यह 3 फीसदी होता। लेकिन आम चुनाव के पहले वाले बजट में यह जिम्मेदारी भरा व्यवहार है। इसमें बहुत सारी लोकलुभावन बातें नहीं हैं और खैरात नहीं बांटी गई हैं।

बजट को हम नींद के रूपकों से वर्णित करते हैं। ‘ड्रीम,’ ‘नाइटमेयर’ आदि बजट। निर्भर इस बात पर है कि अाप किस ओर हैं। इस बजट में दिखने वाली चीजें चाहे न हों पर यह ‘ड्रीम’ साइड का बजट है। इस मायने में कि अंतिम बजट में दबाव में आई सरकार लोकलुभावन घोषणाओं और खैरात बांटने के लालच में आ सकती थी। लेकिन मोटेतौर पर यह जिम्मेदारी भरा बजट है।

स्वास्थ्य रक्षा योजना और बुजुर्गों को ब्याज से आय पर छूट की सीमा बढ़ाना अच्छे कदम हैं। किसानों को फायदा देने की कई घोषणाएं हैं। एक साल में इन पर कितना अमल होता है, यह देखने की बात होगी। ग्रामीण भागों के विकास के लिए काफी घोषणाएं हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आकार देने की कोशिश है। ऐसा होता है तो शहरों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी।

सरकार ने स्वामीनाथन समिति की रिपोर्ट को लागू किया है। यह लंबे समय से अपेक्षित था। 22 हजार मंडियों का नेटवर्क बनाने की घोषणा बहुत अच्छा कदम है। क्रेडिट कार्ड को किसान के लिए आय के अन्य स्रोतों जैसे मत्स्यपालन पशुपालन आदि में लागू करना भी स्वागतयोग्य है। प्याज, टमाटर व आलू जैसी उपज को बाजार की अस्थिरता से बचाने के लिए कार्यक्रम की घोषणा की है।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज से आय पर टैक्स से छूट की सीमा 50 हजार रुपए तक बढ़ाना। रोड और रेलवे के बुनियादी ढांचे को बल। दूरवर्ती गांव व सीमा क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने पर फोकस। नेशनल हाईवे अथॉरिटी को 70,544 करोड़ रुपए और रेलवे को 1,48,528 करोड़ रुपए अपग्रेडेशन के लिए। 250 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स घटाकर 25 फीसदी करना।

यह होना चाहिए था

मध्यवर्ग को वाकई कुछ नहीं मिला। बल्कि उसे तो कैपिटल गेन्स टैक्स भी देना होगा, जो शेयर बाजार का उत्साह खत्म कर देगा। निवेशक शेयर और इक्विटी म्युच्यूअल फंड में पैसा लगाने के पहले दो बार सोचेंगे। जेटली स्मार्ट हैं, जानते हैं कि दुनिया में क्या चल रहा है। वे हर बार खुद को वह करने से रोक क्यों लेते हैं, जो भारत की आर्थिक नियति बदल सकता है? यही बात चिंतित कर देती है।

बजट में खेती के संकट पर ध्यान दिया गया है और बड़ी आबादी को स्वास्थ्य रक्षा के दायरे में लाने की पहल भी अच्छी है, पर बजट आर्थिक वृद्धि को अधिक रफ्तार देने वाला होना चाहिए। रोजगार बढ़ाने की बातें इतने दिनों से हो रही हैं। युवा आबादी का फायदा लेने की चुनौती है। इसे देखते हुए बजट को अधिक नौकरियां पैदा करने वाला होना चाहिए था।

किसानों का मूड फसलों के दो सीजन में नहीं बदल सकते। इतनी बड़ी बीमा योजना साकार नहीं कर सकते। साल में 1 लाख करोड़ देकर आप ग्रामीण क्षेत्र को अचानक खुशनुमा अहसास नहीं दे सकते। दो डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉरिडोर एक साल में स्थापित नहीं कर सकते। इनमें से कई आइडिया सरकार के पहले साल में ही आने चाहिए थे। पूर्व की सरकारों की तरह शहरी वर्ग को ही निचोड़ा गया है।

सरकार के खर्च में कोई कमी नहीं है और उसकी बचत भी ज्यादा नहीं है। नोटबंदी और जीएसटी के कदमों के नुकसान के बाद लाभ अब तक सामने नहीं आए हैं। सारा कुछ अर्थव्यवस्था में तेजी आने पर निर्भर है। जीएसटी का लाभ भी तभी दिखेगा। एनडीए की सरकार ने ये सारी घोषणाएं करने में देर कर दी। सत्ता में आने के बाद से ही पांच साल की सुविचारित योजना पर काम करना था।

न्यूनतम समर्थन मूल्य को लागत से डेढ़ गुना करने की घोषणा का सभी जगह स्वागत हो रहा है। कहा गया कि रबि फसल में यह दे दिया गया है। कब दिया गया इसका कोई पता नहीं है। बाजार की अस्थिरता से बचाने के लिए जिस कार्यक्रम की घोषणा की गई है उसमें 500 करोड़ रुपए का प्रावधान है, जो ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। किसान पर बकाया कर्ज की कोई बात नहीं की गई है।

देश के मध्यम वर्ग को आयकर छूट सीमा बढ़ने की उम्मीद थी पर इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ। वेतनभोगियों को 40 हजार का स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया तो 35 हजार रुपए का ट्रांसपोर्ट और मेडिकल अलाउंस ले लिया। स्वास्थ्य व शिक्षा में आवंटन बढ़ाया तो है पर अपर्याप्त है। सरकार चाहती है कि निजी क्षेत्र ये सेवाएं दें, जो अच्छा विचार नहीं है।

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सभी उभरते सेक्टरों को बढ़ावा देने वाला बजट

कुमार मंगलम बिड़ला चैयरमैन, आदित्य बिड़ला ग्रुप

छोटे व मध्यम उद्योग, कृषि, पशुपालन इकाइयां, टैक्सटाइल, लेदर, निर्माण आदि को बढ़ावा दिया गया है ताकि रोजगार बढ़ें।

वे घोषणाएं करनी थीं जिनके नतीजे तुरंत मिलते

डीके जोशी चीफ इकोनॉमिस्ट क्रिसिल

ग्रामीण क्षेत्र की परेशानियां खत्म करने का उद्‌देश्य तो है। देखना होगा कि सरकार अपना यह उद्‌देश्य प्राप्त कैसे करती है।

वित्त व्यवस्था सुधार के उपायों पर ज्यादा जोर

रशेष शाह प्रेसिडेंट फिक्की और चेयरमैन, एडिलवाइज़

सरकार ने नेशनल गोल्ड पॉलिसी लाने और गोल्ड एक्सचेंज की व्यवस्था लाने की बात कही है, जो स्वागतयोग्य है।

वित्तमंत्री ने रोड, रेलवे और विमानतलों सहित बुनियादी ढांचा सुधारने के लिए 50 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। भारत को इसके विशाल भीतरी क्षेत्रों को जोड़ने के लिए यह जरूरी है। 100 करोड़ से नीचे कमाने वाली कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स को 30 से घटाकर 25 फीसदी करने का खासतौर पर एमएसएमई सेक्टर को फायदा मिलेगा। सबसे ज्यादा फोकस कृषि पर रहा। वित्तमंत्री का इरादा 2022 तक किसान की आय दोगुनी करने का है। 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख रुपए सालाना का मेडिकल कवर बहुत बड़ा कदम है। कुछ अन्य बड़े सामाजिक संदेश भी हैं जैसे आठ करोड़ परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन। इससे वायुु प्रदूषण घटने के साथ जीवनस्तर भी सुधरेगा। शिक्षा को डिजिटल युग में लाने का इरादा जाहिर किया गया है। बजट की कुल थीम समावेशी वृद्धि है यानी देश के उभरते क्षेत्रों को प्रोत्साहन देना- छोटे व मध्यम उद्योग, कृषि, पशुपालन इकाइयां, टैक्सटाइल, लेदर, निर्माण आदि। इन क्षेत्रों में सीधे पैसा देकर उम्मीद की गई है कि इससे नौकरियां व आमदनी पैदा होगी। इस तरह अधिक व टिकाऊ खपत का पैटर्न बनेगा।

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने 2015 के अपने पहले पूर्ण बजट में बड़ी उम्मीदें जगाई थीं। उसके बाद इस सरकार का यह चुनाव पूर्व का साल है, जिसमें ऐसे कदम उठाने चाहिए थे, जिनके परिणाम तुरंत मिल सकें। बजट के प्रमुख एजेंडें में विकास को फिर पटरी पर लाने और ग्रामीण क्षेत्रों की परेशानियों को खत्म करना शामिल है। लेकिन, यहां देखना होगा कि सरकार अपने उद्देश्यों की प्राप्ति कैसे करेगी। बजट में वित्त मंत्री ने कहा कि वृद्धि दर 2018-19 में 7.2 तक पहुंच सकती है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 6.5 फीसदी है। क्रिसिल का अनुमान है कि वर्ष 2018-19 में जीडीपी वृद्धि दर 7.6 फीसदी हो सकती है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आय को लेकर बहुत कुछ किया जाना बाकी है। यह इसलिए क्योंकि किसानों को अच्छी कीमतें नहीं मिल पा रही हैं। ग्रामीण आवास और सड़कों के विकास की घोषणाओं में जॉब तैयार करने पर फोकस होना चाहिए था। सरकार ने सभी पक्षों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिश की है। कहा जा सकता है कि इस बजट में अच्छी आर्थिक और राजनीतिक भावना बनाने की कोशिश की गई है।

बजट में यह स्पष्ट है कि सरकार ने वित्तीय क्षेत्र में सुधार के उपायों पर ज्यादा फोकस किया है। ये ऐसे प्रयास हैं, जो पिछले तीन वर्ष से जारी हैं। इस बजट में मुझे जो सबसे अच्छा और प्रभावी लगा, वह है प्रत्येक परिवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 5 लाख का बीमा। इसके दायरे में करीब-करीब एक तिहाई परिवार शामिल हो जाएंगे, यह घोषणा/फैसला इस बजट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके अतिरिक्त सरकार ने लघु एवं मध्यम स्तर के उद्योगों (एमएसएमई) को आसानी से वित्त मुहैया कराने एवं उन्हें बढ़ावा देने के प्रयास भी किए हैं, जिसका लाभ प्रत्येक व्यक्ति के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को भी होगा। सरकार ने वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में उपाय किए हैं जो अच्छे हैं, इसमें अवैध लेन-देन को बढ़ावा देने वाली क्रिप्टोकरेंसी को सिस्टम से हटाने के प्रावधान भी हैं। सरकार ने नेशनल गोल्ड पॉलिसी लाने और गोल्ड एक्सचेंज की व्यवस्था लाने की बात कही है, जो स्वागतयोग्य है। इससे कंज़्यूमर गोल्ड डिपॉज़िट अकाउंट खोलने के प्रति आकर्षित होंगे।

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Web Title: गांवों से अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने की कोशिश
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