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मॉब लिंचिंग मामला: गृहमंत्री ने कहा था- पुलिस कस्टडी में हुई रकबर की मौत, चार्जशीट में पुलिस ने कहा- भीड़ ने मारा

रामगढ़ पुलिस ने पेश की अधूरी चार्जशीट, अंडरटेकिंग देने पर ही कोर्ट ने स्वीकारी

Danik Bhaskar | Sep 08, 2018, 12:38 AM IST
मृतक रकबर (फाइल) मृतक रकबर (फाइल)

रामगढ़ (अलवर). अलवर जिले के रामगढ़ क्षेत्र स्थित ललावंडी गांव में 20 जुलाई को गोतस्करी के शक में पीट-पीटकर हुई रकबर उर्फ अकबर मेव (28) की मौत के मामले में पुलिस फिर विवादों में घिरती नजर रही है। पुलिस ने शुक्रवार को कोर्ट में अधूरी चार्जशीट पेश कर दी। कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद पुलिस ने अंडरटेकिंग दी तब कोर्ट से इसे मंजूर किया। प्रदेश के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया की ओर से रकबर की मौत पुलिस हिरासत में होने की बात माने जाने के बाद भी चार्जशीट में किसी पुलिसकर्मी को दोषी नहीं बताया गया है। 25 पेजों की इस चार्जशीट में पुलिस ने कई लोगों पर हत्या की धाराएं लगाई हैं। इस संबंध में डीएसपी चौहान ने कहा कि पुलिस हिरासत में मौत हुई या नहीं, इसकी अलग से न्यायिक जांच चल रही है।

पुलिस की भूमिका पर हर बार सवाल: 20 जुलाई को हरियाणा का कोलगांव निवासी रकबर उर्फ अकबर साथी असलम के साथ गाय लेकर ललावंडी से निकल रहा था। तभी लोगों ने उन्हें घेर लिया। असलम तो बचकर निकल भागा, लेकिन रकबर की पिटाई की गई। उसने दम तोड़ दिया।

पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया: घटना के बाद पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर ललावंडी निवासी दो युवकों धर्मेंद्र यादव और परमजीत को 21 जुलाई को गिरफ्तार किया। तब भीड़ की पिटाई से मौत की बात कही गई। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने यह आरोप भी लगाया कि उन्होंने पुलिस को एक युवक की पिटाई करते हुए देखा था। पुलिस की भूमिका पर संदेह बढ़ा और कई तरह के सवाल उठे।

मौत पुलिस कस्टडी में हुई - गृहमंत्री: 24 जुलाई को गृहमंत्री कटारिया रामगढ़ पहुंचे। घटना स्थल का दौरा किया। कहा रकबर की मौत पुलिस कस्टडी में हुई। हालांकि पुलिस ने उसे पीटा नहीं। पुलिस गायों को पहले गोशाला ले गई, रकबर को अस्पताल ले जाने में देरी की।

पुलिस की चार्जशीट में ये बातें: परमजीत सिंह, नरेश व धर्मेंद्र सहित कई लोगों पर हत्या की धाराएं लगाई। विजय को मफरूर बताया। वहीं, रकबर के खिलाफ गोतस्करी का केस दर्ज नहीं।

कोर्ट ने इस पर जताई आपत्ति: चार्जशीट में एफएसएल रिपोर्ट नहीं थी। कोर्ट ने एक बार इसे अस्वीकार कर दिया। उपाधीक्षक (द.) अशाेक चाैहान ने 1 माह में विसरा रिपोर्ट पेश करने की अंडरटेकिंग दी। तब कोर्ट ने स्वीकारी।

सुप्रीम कोर्ट ने रकबर की हत्या पर रिपोर्ट मांगी: मॉब लिंचिंग और गोरक्षा के नाम पर हिंसा रोकने संबंधी सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस पर 29 में से 20 राज्यों ने अमल नहीं किया है। सात में से पांच केंद्र शासित प्रदेशों की भी यही स्थिति है। कोर्ट ने शुक्रवार को सख्ती दिखाते हुए राज्यों से एक हफ्ते के अंदर अमल संबंधी रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट दाखिल नहीं करने वाले राज्यों के गृह सचिवों को खुद सुप्रीम कोर्ट में पेश होना पड़ेगा। कोर्ट ने राजस्थान सरकार से रकबर की हत्या पर की कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है।

इस मामले में राजस्थान के मुख्य सचिव और पुलिस प्रमुख सहित अन्य अधिकारियों पर अवमानना कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला ने याचिका दायर कर रखी है। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वह अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर मॉब लिंचिंग के खिलाफ गाइडलाइंस जारी करें। मामले की अगली सुनवाई 13 सितंबर को होगी।