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7 घंटे तक दहशत में रहे शहर के लोग, दीवार फांदकर मकान की तीसरी मंजिल पर जाकर बैठ गया तेंदुआ, तस्वीरों में देखें कैसा था आतंक

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 12:33 PM IST

राजस्थान न्यूज: जानिए कब क्या हुआ... 4 थानों की पुलिस लगानी पड़ी, पकड़ने के लिए बनाई 80 अधिकारियों की टीम

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अलवर (राजस्थान)। शुक्रवार को जंगल से भटक कर एक पैंथर शहर में आ गया। करीब 7.30 घंटे तक वन विभाग की टीम इसे पकड़ने का प्रयास करती रही और आखिरकार इसे पकड़ कर दोबारा से जंगल में छोड़ दिया गया। इस दौरान लोग दहशत में रहे। सुबह करीब 6 बजे स्कीम नंबर एक स्थित मकान नंबर 217 की तीसरी मंजिल पर पैंथर बैठा दिखा तो हड़कंप मच गया। यह घर सीए नीरज गर्ग का है। पैंथर इस मकान की तीसरी मंजिल पर बने कबाड़ रूम में करीब 6 घंटे यानि दोपहर 12 बजे तक बैठा रहा। इस दौरान मकान के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस और वन विभाग की टीम भी पहुंच गई।

टीम ने पैंथर को पकड़ने के प्रयास किए तो पैंथर यहां से निकलकर इसी कॉलोनी के प्लॉट नंबर 305 में घुस गया और गैराज में खड़ी एक वैन के नीचे जाकर छिप गया। करीब 1 घंटा 25 मिनट तक पैंथर यहीं रहा। यह गैराज खाली प्लॉट में होने के कारण पैंथर को बेहोशी का इंजेक्शन देने में वन विभाग के कर्मचारियों काे आसानी हुई। बेहोश होने के बाद वन विभाग की टीम ने पैंथर को पिंजरे में बंद कर सरिस्का के जंगल में ले जाकर छोड़ दिया। इस दौरान प्रशासनिक, वन विभाग सहित अन्य विभागों के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे। भीड़ इतनी थी कि उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा था।


परंपरागत साधनों के भरोसे वन विभाग, टेंट हाउस की दरी, डंडे और लकड़ियां लेकर पहुंची टीम

वन विभाग व सरिस्का बाघ परियोजना से आई टीम परंपरागत साधनों से पैंथर को पकड़ने का प्रयास करती रही। वनकर्मियों के पास आधुनिक उपकरण व अन्य जरूरी सामान नहीं होने के कारण प्रशिक्षित टीम को पैंथर को पकड़ने में दिक्कत आई। स्थिति यह रही कि वन कर्मियों के पास जाल तक नहीं था। वे टेंट हाउस की दरी, डंडे व लकड़ियां लेकर पैंथर को पकड़ने का प्रयास करते रहे। यही कारण रहा कि एक बार सड़क पर पैंथर चार मिनट के लिए दौड़ा तो लोगों के सामने मौत दौड़ गई। लोगों ने इधर-उधर दौड़ कर जान बचाई। पैंथर के पकड़े जाने के बाद लोगाें ने राहत की सांस ली। इससे पहले पूरे क्षेत्र में लोग दहशत में रहे।

ऐसे पकड़ में आया पैंथर

वन विभाग के डीएफओ आलोक नाथ गुप्ता ने बताया कि भीड़ इकट्ठी होने के कारण पैंथर कबाड़ में जा छुपा। इसके बाद उसे बाल भारती स्कूल की छत से देखा गया। वहां से पैंथर को सरिस्का से आए शंकर सिंह शेखावत ने ट्रेंक्युलाइज करने का प्रयास किया। सफलता नहीं मिली तो गर्ग के घर के सीढिय़ों के ऊपर बने टॉवर में छेद कर वहां से ट्रेंक्युलाइज करने का प्रयास किया। शंकर सिंह शेखावत ने बताया कि बालभारती स्कूल से भी सफलता नहीं मिली। सीए गर्ग के घर से प्रयास किया तो वहां पैंथर कबाड़ के पीछे छुप गया। वहां कूलर के जाल व बांस व अन्य सामान में जाकर पैंथर छिप गया। बाद में उसे प्लॉट संख्या 305 में एक मारुति वैन के नीचे से ट्रेंक्युलाइज किया गया।

जानिए कब क्या हुआ...

सुबह 6 बजे : पैंथर मकान की तीसरी मंजिल पर दिखा।
12 बजे तक : सीए गर्ग के मकान में पैंथर को बेहाेश करने के प्रयास चलते रहे।
12.04 बजे : सीए के मकान की छत से कूद कर पैंथर सड़क पर आया। खाली प्लाॅट की झाड़ी में जा छुपा। वहां से निकलकर सड़क पर दौड़ा।
12.08 बजे : पैंथर खाली प्लाॅट संख्या 305 में पहुंचा।
1.16 बजे : बेहोशी के लिए पहला इंजेक्शन लगा।
1.24 बजे : बेहोशी के दूसरा इंजेक्शन लगाया गया।
1.26 बजे : वन्य जीव व्यवहार विशेषज्ञ चिन्मय मैसी ने जांच कर बताया कि पैंथर पूरी तरह बेहोश है
1.30 बजे : बेहोश पैंथर को दरी में लपेट कर पिंजरे तक लाया गया। वाहन में रखे पिंजरे में पैंथर को लिटाकर भेजा गया।

पैंथर को पकड़ने के लिए 80 अधिकारियों व कर्मचारियों की लगी टीम

पैंथर को रेस्क्यू करने के लिए वन विभाग के डीएफओ आलोकनाथ गुप्ता, एसीएफ राजीव लोचन पाठक सहित करीब एक दर्जन वन विभाग के कर्मचारी व अधिकारी लगाए गए। इसी तरह पुलिस की ओर से एडिशनल एसपी सुरेश खींची, सिटी सीओ दिनेश कुमार सहित चार थानाधिकारी व 60 पुलिसकर्मी, प्रशासन की ओर से एसडीएम डॉ. नीलाभ सक्सेना सहित एडीएम, तहसीलदार मौजूद रहे। इस प्रकार पैंथर को रेस्क्यू करने के लिए करीब 80 प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारियों की टीम लगाई गई।

दरवाजे बंद करके कराई बोर्ड परीक्षा, जल्दी हुई छुट्टी

पैंथर जिस मकान की तीसरी मंजिल पर सबसे पहले दिखा, उसके समीप स्थित बाल भारती स्कूल में 12वीं बोर्ड की परीक्षा चल रही थी। पैंथर की हरकतों को देखने के लिए एकमात्र लोकेशन स्कूल की छत ही थी। ऐसे में बड़ी संख्‍या में लोगों की आवाजाही के चलते परीक्षा में व्यवधान हुआ। जिन कमरों में परीक्षा चल रही थी, उनके दरवाजों को बंद करा दिया गया। प्रिंसिपल तारावती शर्मा ने बताया कि जहां से लोगों की आवाजाही थी और जहां परीक्षा चल रही थी, उस पोर्शन को एक बड़े पर्दे से अलग-अलग किया हुआ था। रेस्क्यू टीम से मिले निर्देशों के बाद बच्चों की छुट्टी 11 बजे ही कर दी गई। सामान्यतः स्कूल का समय 8 से 1 बजे तक का है।

सबसे पहले पड़ोसी अभिषेक ने देखा पैंथर

स्कीम एक स्थित मकान नंबर 217 की तीसरी मंजिल की छत पर पैंथर को बैठे हुए सबसे पहले इसी मकान के सामने रहने वाले अभिषेक जैन ने देखा। अभिषेक ने समझा कि मकान पर खिलौनानुमा कोई बड़ी वस्तु लाकर रखी गई है। बाद में पैंथर हिला तो उसे माजरा समझ में आया। इसके बाद उसने मकान मालिक नीरज गर्ग को सूचना दी।

सीए की पत्नी बोली-दहशत भरा रहा दिन

नीरज की पत्नी राखी गर्ग ने बताया कि यह सुनते ही हमारे तो होश उड़ गए। हम सभी दहशत में आ गए। हम अपने मकान से निकल कर पड़ोस में आ गए। इसके बाद हमने पुलिस व अन्य विभागों को इसकी सूचना दी। नगर परिषद में जमादार पद पर कार्य करने वाले ज्योति का कहना था कि सफाई कर्मियों ने भी पैंथर को सड़क पर देखा। बाद में वह मकान की छत पर पहुंच गया।

पैंथर को पकड़कर ले जाते वनकर्मी, (इनसेट) दरवाजे से झांकता हुआ पैंथर पैंथर को पकड़कर ले जाते वनकर्मी, (इनसेट) दरवाजे से झांकता हुआ पैंथर
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वन विभाग की टीम का पहला ट्रैंक्यूलाइज प्रयास विफल होने के बाद मकान की छत से कूदकर भागता पैंथर। वन विभाग की टीम का पहला ट्रैंक्यूलाइज प्रयास विफल होने के बाद मकान की छत से कूदकर भागता पैंथर।
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पैंथर की दहशत से घरों में छिप गए लोग। पैंथर की दहशत से घरों में छिप गए लोग।
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पैंथर को ट्रैंक्यूलाइज करने के बाद पिंजरे में डालकर ले जाती वन विभाग की टीम एवं मौजूद लोगों की भीड़। पैंथर को ट्रैंक्यूलाइज करने के बाद पिंजरे में डालकर ले जाती वन विभाग की टीम एवं मौजूद लोगों की भीड़।
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पैंथर को पकड़कर ले जाते वनकर्मी, (इनसेट) दरवाजे से झांकता हुआ पैंथरपैंथर को पकड़कर ले जाते वनकर्मी, (इनसेट) दरवाजे से झांकता हुआ पैंथर
वन विभाग की टीम का पहला ट्रैंक्यूलाइज प्रयास विफल होने के बाद मकान की छत से कूदकर भागता पैंथर।वन विभाग की टीम का पहला ट्रैंक्यूलाइज प्रयास विफल होने के बाद मकान की छत से कूदकर भागता पैंथर।
पैंथर की दहशत से घरों में छिप गए लोग।पैंथर की दहशत से घरों में छिप गए लोग।
पैंथर को ट्रैंक्यूलाइज करने के बाद पिंजरे में डालकर ले जाती वन विभाग की टीम एवं मौजूद लोगों की भीड़।पैंथर को ट्रैंक्यूलाइज करने के बाद पिंजरे में डालकर ले जाती वन विभाग की टीम एवं मौजूद लोगों की भीड़।
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