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7 साल में 8 वर्ग किमी घना जंगल हो गया साफ, अब भी बेलगाम कटाई जारी, राजगढ़ निशाने पर

Alwar News - सरकार जंगल बचाने के नाम पर हर साल करोड़ों का बजट जारी करती है। वन विभाग प्लांटेशन लगाने का दावा करता है, दूसरी तरफ...

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 04:10 AM IST
Mala kheda News - in 7 years 8 sq km of dense forest became clean still unbridled harvesting on rajgarh target
सरकार जंगल बचाने के नाम पर हर साल करोड़ों का बजट जारी करती है। वन विभाग प्लांटेशन लगाने का दावा करता है, दूसरी तरफ पूरे लकड़ी माफिया धड़ल्ले से हरे पेड़ों को काट कर बेचने में लगा है। पूरे जिले में सरिस्का के बाद सर्वाधिक घना राजगढ़ उपखंड क्षेत्र में होने से बड़े पैमाने पर अवैध आरा मशीनें लगा ली गई हैं। हर रात करीब 10 बजे बाद इन आरा मशीनों से 5 से 6 ट्रक भरकर हरी लकड़ियां अलवर के रास्ते दिल्ली की ओर भेजी जा रही हैं। हैरानी की बात यह है कि वन विभाग ने पिछले छह माह में मुश्किल से दस वाहन भी नहीं पकड़े हैं। गौरतलब है कि अलवर जिले में राजगढ़ और थानागाजी में सबसे ज्यादा जंगल है। तेजी से कटान के कारण बीते 7 साल में जिले से 8 वर्ग किलोमीटर घना और मध्यम घना जंगल साफ हो चुका है। इसमें दो वर्ग किमी जंगल एक साल के भीतर खत्म हुआ है। भारत सरकार के फॉरेस्ट सर्वे 2017 के मुताबिक अलवर में वन क्षेत्र 1197 वर्ग किलोमीटर बचा है। जबकि वर्ष 2011 की इसी रिपोर्ट में 1205 वर्ग किमी था। जो बिल्कुल साफ हो चुका है। अगर झाडियों वाला जंगल भी शामिल कर लें तो जिले से कुल 17 वर्ग किलोमीटर यानी आधे अलवर शहर के बराबर क्षेत्र होता है।

कुटीर उद्योग का लाइसेंस, काम अवैध चिराई का: कई वैध आरा मशीन संचालकों ने कुटीर उद्योग और लकड़ी के प्रोडक्ट बनाने के नाम पर पंजीकरण करा रखा है, लेकिन इन पर निर्धारित से बड़े आकार के व्हील की लकड़ी चिराई मशीनें लगाकर काम किया जा रहा है। पूरे क्षेत्र में वैध से ज्यादा अवैध आरा मशीनें संचालित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों पर इन्हें लगाया गया है। जहां चोरी की बिजली और डीजल पंप सेट से आरा मशीनें चलाई जाती हैं। पुराना राजगढ़ सड़क मार्ग, ढंढेडान ग्राम, रेलवे स्टेशन सड़क मार्ग सहित दूरस्थ गांवों में करीब दो दर्जन अवैध आरा मशीन चल रही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि स्थानीय प्रशासन को शिकायत करने के बावजूद भी कोई कार्यवाही नहीं की जाती। वन विभाग को सूचना देने पर वे मामला राजस्व भूमि से कटाई का बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। जबकि पटवारी और राजस्व अधिकारी वन विभाग या पुलिस के माथे ठीकरा फोड़ देते हैं। इससे अवैध आरा मशीन चलाने वालों के हौंसले बुलंद हैं। पेड़ों की लकड़ी से भरे साधनों को चालक इतनी तेज गति से लेकर आते है जिससे कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

आधा दर्जन नाके और चौकी, फिर पार होती लकड़ी: सूत्रों का कहना है कि राजगढ़, लक्ष्मणगढ़, रैणी, मालाखेड़ा क्षेत्र से रोजाना करीब 6 ट्रक लकड़ी के राजगढ़-सिकंदरा मेगा हाइवे से होकर निकलते हैं। अलवर तक इनके रूट में करीब आधा दर्जन, वन और पुलिस विभाग के नाके पड़ते हैं। टोल भी आते हैं, लेकिन कहीं इन्हें रोका नहीं जाता। मिलीभगत से ये वाहन हर रात 10 से मध्यरात्रि बाद दो बजे की अवधि में अलवर शहर पहुंच यहां हनुमान चौराहे होते हुए दिल्ली की ओर निकल जाते हैं।


राजगढ़. कस्बे के औद्योगिक क्षेत्र से सटे वन क्षेत्र में काटकर पटके गए हरे पेड़।

कुटीर उद्योग का लाइसेंस, काम अवैध चिराई का

कई वैध आरा मशीन संचालकों ने कुटीर उद्योग और लकड़ी के प्रोडक्ट बनाने के नाम पर पंजीकरण करा रखा है, लेकिन इन पर निर्धारित से बड़े आकार के व्हील की लकड़ी चिराई मशीनें लगाकर काम किया जा रहा है। पूरे क्षेत्र में वैध से ज्यादा अवैध आरा मशीनें संचालित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों पर इन्हें लगाया गया है। जहां चोरी की बिजली और डीजल पंप सेट से आरा मशीनें चलाई जाती हैं। पुराना राजगढ़ सड़क मार्ग, ढंढेडान ग्राम, रेलवे स्टेशन सड़क मार्ग सहित दूरस्थ गांवों में करीब दो दर्जन अवैध आरा मशीन चल रही हैं।

इन इलाकों में हो रहा अवैध कटान

राजगढ़ औधौगिक क्षेत्र, झरना, अलेवा धाम, झाझीरामपुरा सहित अरावली की पहाड़ियों से सटे हर वन क्षेत्र में पेड़ों का कटान किया जा रहा है। काटी गई लकड़ियों को राजगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र गांवों में लगी अवैध आरा मशीनों पर पहुंचाया जाता है। दिन भर इन आरा मशीनों पर लट्ठे चिराई का काम होता है, लेकिन वन विभाग ने आज तक इनमें से किसी पर जांच और कार्रवाई ही नहीं की है। स्थानीय लोगों का यहां तक कहना है कि वन अधिकारियों और स्टाफ को जानकारी देने के बावजूद कार्रवाई नहीं होती।

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