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शिक्षकों की कमी से सरकारी बीएससी नर्सिंग कॉलेज पर अगले साल की मान्यता का खतरा

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 04:10 AM IST

शिक्षकों की कमी से सरकारी बीएससी नर्सिंग कॉलेज पर अगले साल की मान्यता का खतरा
यूनिवर्सिटी की टीम इसी महीने निरीक्षण को आएगी, कॉलेज में 24 ट्यूटर की जरूरत, जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर के 10 ट्यूटर्स ने संभाल रखी है कमान

भास्कर संवाददाता | अलवर

सरकारी बीएससी नर्सिंग कॉलेज पर अब राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की मान्यता रद्द होने का खतरा मंडरा रहा है। कॉलेज में छात्र-छात्राओं को पढ़ाने वाले शिक्षकों की कमी है। यहां जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर के शिक्षक दोनों संस्थानों को चला रहे हैं। सरकार ने बीएससी नर्सिंग कॉलेज तो शुरू कर दिया और इस साल चौथा बैच भी आने वाला है, लेकिन सरकार अभी तक शिक्षकों की कमी को पूरा नहीं कर सकी है। स्ववित्त पोषित योजना के तहत संचालित कॉलेज में न तो सरकार ने ही पद सृजित किए हैं और न ही कांट्रेक्ट पर ट्यूटर लगाने की अनुमति दे रही है। ऐसी स्थिति में जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर के शिक्षकों ने ही बीएससी नर्सिंग कॉलेज की कमान संभाल रखी है। 60 सीट के बीएससी नर्सिंग कॉलेज में 4 बैच के लिए 24 शिक्षकों की जरूरत है, जबकि यहां जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर के 10 ट्यूटर्स ने ही कमान संभाल रखी है। हालात ये हैं कि इसी महीने कॉलेज की आगामी वर्ष की मान्यता को लेकर राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की टीम निरीक्षण करेगी। भवन, हॉस्टल व शिक्षकों को लेकर मार्च 2015 में आईएनसी ने दोनों संस्थानों को मान्यता तो दे दी, लेकिन लगातार चल रही शिक्षकों की कमी को लेकर एकबार फिर बीएससी नर्सिंग कॉलेज पर विश्वविद्यालय की हर साल मिलने वाली मान्यता को खतरा पैदा हो गया है। अगर मान्यता नहीं मिली तो विश्वविद्यालय कॉलेज में छात्र-छात्राओं की परीक्षा पर रोक लगा सकता है। अभी जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर के 18 में से 10 शिक्षक बीएससी नर्सिंग कॉलेज में पढ़ा रहे हैं। उनके वेतन का भुगतान जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर से ही हो रहा है। अब जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर में मात्र 8 ही शिक्षक बचे हैं, जबकि 4 डेपुटेशन पर लगाए हुए हैं।

कॉलेज प्रिंसीपल ने पत्र लिखा तो सरकार ने प्रदेश के नर्सिंगकर्मियों को दिया ऑफर : बीएससी नर्सिंग कॉलेज के प्रिंसीपल ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) को पत्र लिखकर नर्सिंग फैकल्टी की कमी से विश्वविद्यालय की मान्यता पर खतरा बताया तो अधिकारी हरकत में आए हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग के अतिरिक्त निदेशक बचनेश अग्रवाल ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) को ऑफर देकर प्रदेशभर में राजकीय सेवा में कार्यरत इच्छुक एमएससी व बीएससी नर्सिंगकर्मियों को कार्य व्यवस्था के तहत नर्सिंग कॉलेज में लगाने के निर्देश दिए हैं। 11 अप्रैल के आदेश के बाद अभी तक ट्यूटर नहीं लगे हैं और विश्वविद्यालय की टीम निरीक्षण के लिए आने वाली है।

कॉलेज को अगले साल की मान्यता के लिए विश्वविद्यालय की टीम शीघ्र ही निरीक्षण करेगी। सभी व्यवस्थाएं पूरी होने पर ही अगले साल की मान्यता मिलेगी। यहां शिक्षकों की कमी की पूर्ति के लिए चिकित्सा एवं शिक्षा विभाग को पत्र लिखा गया है। इस पर विभाग के अतिरिक्त निदेशक ने प्रदेश के सभी जिलों में सीएमएचओ व पीएमओ के अधीन कार्यरत इच्छुक एमएससी व बीएससी नर्सिंगकर्मियों को कॉलेज में लगाने के निर्देश दिए हैं। -संदीप अवस्थी, राजकीय बीएससी नर्सिंग कॉलेज, अलवर

बीएससी नर्सिंग कॉलेज। फाइल फोटो

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Web Title: शिक्षकों की कमी से सरकारी बीएससी नर्सिंग कॉलेज पर अगले साल की मान्यता का खतरा
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