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24 साल पुराने गबन के मामले में वसूली योग्य राशि तय नहीं कर पा रहे निदेशक

चौबीस साल पहले हुए गबन के मामले में न तो निदेशक वसूली योग्य राशि तय कर पा रहे हैं और न ही जिला शिक्षा अधिकारी।...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 04:15 AM IST
चौबीस साल पहले हुए गबन के मामले में न तो निदेशक वसूली योग्य राशि तय कर पा रहे हैं और न ही जिला शिक्षा अधिकारी। निदेशालय द्वारा राशि वसूले जाने के संबंध में आदेश दिए जाने के बावजूद अधिकारी अभी तब यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि आखिर कितना पैसा वसूल किया जाना है। मामला एसएमडी स्कूल में वर्ष 1994 में तत्कालीन प्रिंसिपल राधा सक्सेना व कैशियर अचल द्वारा विकास मद व छात्र कोष से किए गए गबन की राशि का है। निदेशक ने राशि वसूलने के आदेश कर दिए हैं, लेकिन यह नहीं बताया कि कितनी राशि वसूल की जानी है। प्रिंसिपल राधा सक्सेना इसी महीने रिटायर हो रही हैं, इसलिए उनके हिस्से की राशि वसूल किया जाना जरूरी है। इसे लेकर अधिकारियों के हाथ-पांव फूले हुए हैं। कैशियर अचल की सेवाएं जारी रहने के कारण निदेशक ने वसूली की राशि किस्तों में वसूलने के आदेश दिए हैं और अचल की 14 हजार रुपए मासिक किस्त राजकोष में जमा की जा रही है। राधा सक्सेना का वर्तमान पदस्थापन मालाखेड़ा होने के कारण यह वसूली डीईओ माध्यमिक द्वितीय के द्वारा की जानी है।

किसने क्या कहा? : डीईओ माध्यमिक द्वितीय वीरसिंह बेनीवाल का कहना है कि वसूली के आदेश मिले हैं, लेकिन वसूली कितनी की जानी है, इस बारे में डीईओ माध्यमिक प्रथम द्वारा नहीं बताया गया है। प्रिंसिपल राधा सक्सेना का कहना है कि डीडी की जांच में गबन का प्रकरण ही नहीं माना गया। इसके बावजूद निदेशालय ने मेरा पक्ष जाने बिना वसूली के आदेश कर दिए। डीईओ माध्यमिक प्रथम अरुणेश सिन्हा का कहना है कि प्रकरण में स्पष्ट वसूली योग्य राशि के लिए निदेशालय से मार्गदर्शन मांगा गया है।

क्या है मामला

एसएमडी स्कूल में 1994 से 2004 तक की हुई स्पेशल ऑडिट में यह खुलासा हुआ था कि प्रिंसिपल राधा सक्सेना और कैशियर अचल द्वारा विकास मद व छात्र कोष के पैसे तो वसूल किए गए, लेकिन इनका इंद्राज कैशबुक में नहीं किया गया। इसके बाद हुई स्पेशल ऑडिट में वसूली निकाली गई। उपनिदेशक की जांच में गबन की राशि को मय ब्याज वसूलने के आदेश जारी किए गए थे। यह राशि रिटायरमेंट पर मिलने वाले उपार्जित अवकाशों से वसूली जाएगी।