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यूआईटी मई से शुरू कर सकती है पट्‌टे देना

यूआईटी मई माह के तीसरे सप्ताह तक पट्टे जारी करने का काम शुरू कर सकती है। यूआईटी ने पिछले 6 माह से पट्टे जारी नहीं किए...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 04:15 AM IST

यूआईटी मई माह के तीसरे सप्ताह तक पट्टे जारी करने का काम शुरू कर सकती है। यूआईटी ने पिछले 6 माह से पट्टे जारी नहीं किए हैं क्योंकि हाईकोर्ट ने बिना जोनल डवलपमेंट प्लान इनके नियमन पर रोक लगा रखी है। पिछले दिनों यूआईटी द्वारा तैयार 6 जोनल डवलपमेंट प्लान को मुख्य नगर नियोजक एनसीआर ने स्वीकृति दे दी है। फिलहाल न्यास स्तर पर 5 जोन के अनुसार कुल 14 सेक्टर प्लान तैयार किए गए हैं। उसमें न्यास की योजनाएं, गैर योजना व कृषि भूमि की कॉलोनियां के ले-आउट प्लान को न्यास स्तर पर हरी झंडी मिलने के बाद मुख्य नगर नियोजक एनसीआर को स्वीकृति के लिए भिजवाया जाएगा। तैयार किए गए जोनल डवलपमेंट प्लान के लिए जनता से आपत्ति और सुझाव भी मांगे जाएंगे।

जोनल प्लान को स्वीकृति मिल चुकी है। न्यास स्तर पर बनाए गए 14 सेक्टर डवलपमेंट प्लान को बैठक में अनुमोदन के लिए रखा जाएगा। इन सेक्टर प्लान में मुख्य रूप से रोड नेटवर्क को दर्शाया है। लोगो से अपत्ति मांगने के बाद उम्मीद है 15 मई तक पट्टे जारी करने का काम शुरू हो जाएगा। - कान्हा राम, सचिव यूआईटी

मास्टर प्लान के अनुरूप शहर के जोनल और सेक्टर प्लान तैयार, 6 जोन और 21 सेक्टर में बांटकर करेगी शहर का विकास

यूआईटी द्वारा तैयार जोनल व सेक्टर प्लान।

फिलहाल 5 जोन और 21 सेक्टर में बांटा गया है शहर को

जानकारी के अनुसार स्वीकृत जोनल प्लान में अ, ब, स, द, य, ल कुल 6 जोन है। जोनल में पेरिफेरियल कन्ट्रोल बैल्ट शामिल है। शेष कुल 5 जोन में 21 सेक्टर शामिल किए गए है। फिलहाल न्यास स्तर पर कुल 14 सेक्टर प्लान तैयार किए गए है। कनिष्ठ अभियंताओं ने मौके का सत्यापन भी कर लिया है। एक सेक्टर करीब 500 से 900 एकड़ में विकसित किया जाएगा।

क्या है प्लान : यूआईटी के प्रभारी अधिकारी आयोजना लक्ष्मण सिंह राठौड़ ने बताया कि जोनल डवलपमेंट प्लान मास्टर प्लान का ही एक छोटा रूप है। इसमें पूरे मास्टर प्लान एरिया को छोटे-छोटे जोन में बांटकर उस क्षेत्र की प्लानिंग की जाती है। मास्टर प्लान में पूरे रीजन में आने वाली बड़ी सेक्टर रोड और भू-उपयोग को दर्शाया जाता है। जबकि जोनल प्लान में इनके अलावा में मौजूदा फेसेलिटी की जमीनों और भविष्य के लिए प्रस्तावित या आरक्षित जमीनों को भी मैपिंग के जरिए दर्शाया जाता है। इससे आमजन को पता चल सकेगा कि इस क्षेत्र में कहां-कहां फेसेलिटी की जमीनें हैं और भविष्य में कहां-कहां कौन सी फैसेलिटी डवलप होगी।

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