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लाइफ लाइन की दुकान पर थमाया जा रहा है 32 रुपए वाला प्रोटीन पाउडर 195 में

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 04:15 AM IST

लाइफ लाइन की दुकान पर थमाया जा रहा है 32 रुपए वाला प्रोटीन पाउडर 195 में
महिला अस्पताल प्रभारी मरीजों को ही ठहरा रहे दोषी, बोले-बिना डॉक्टर की पर्ची लिए क्यों खरीदते हो

राजकुमार जैन | अलवर

महिला अस्पताल में सहकारी उपभोक्ता भंडार की दवा दुकान पर फार्मासिस्ट बिना डॉक्टर की पर्ची देखे प्रोटीन पाउडर सहित कई दवाएं बेच रहा है। इन दवाओं का न तो वह बिल दे रहा है और न ही ये दवाएं उपभोक्ता भंडार के रिकार्ड में दर्ज हैं। लाइन लाइन की इस दुकान पर निजी स्तर पर दवाएं खरीद कर बेची जा रही हैं और पूरी कमाई फार्मासिस्ट की जेब में जा रही है। उधर, इस दवा दुकान से उपभोक्ता भंडार को घाटा हो रहा है। इसके बावजूद उपभोक्ता भंडार के महाप्रबंधक और महिला अस्पताल के प्रभारी फार्मासिस्ट पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। महिला अस्पताल के प्रभारी डॉ. श्याम बिहारी जारेड़ा से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने मरीजों को ही इसके लिए दोषी ठहरा दिया। डॉ. जारेड़ा ने कहा कि ये मरीजों की गलती है, वे डॉक्टर के बिना लिखे अपनी मर्जी से दवा खरीद रहे हैं। फार्मासिस्ट 32 रुपए में जेनरिक प्रोटीन पाउडर के डिब्बे को बाजार से खरीद कर 195 रुपए के अंकित मूल्य (एमआरपी) पर बेच रहा है। इसी प्रकार 8.90 रुपए की कैल्शियम टेबलेट 45 रुपए में और 11 रुपए की आइंटमेंट 55 रुपए में बेची जा रही है। इस दुकान पर प्रसूताओं को दवाओं की बिक्री बिना बिल के हो रही है। इस दुकान की बिना बिल निजी स्तर पर रोजाना करीब 11 हजार रुपए की बिक्री है, जबकि पिछले महीने की उपभोक्ता भंडार की एक महीने में करीब 6600 रुपए की दवाएं इस दुकान से बेची गई हैं। इस दवा दुकान पर घपले की उपभोक्ता भंडार को भनक तक नहीं है। वहीं अस्पताल में भी फार्मासिस्ट को पूरा संरक्षण मिल रहा है। उल्लेखनीय है कि लाइफ लाइन की दुकान पर फूड सप्लीमेंट प्रॉडक्ट की बिक्री बंद है, जबकि दूसरी दवाएं बिल पर ही बेची जा सकती हैं।

अलवर. लाइफ लाइन दवा दुकान से खरीदा प्रोटीन का डिब्बा व कैल्शियम की दवा दिखाती प्रसूता की सास साहडोली निवासी समीना।

इस स्थिति के लिए ये दोनों हैं जिम्मेदार

ये मरीजों की कमी है, जो डॉक्टर के बिना लिखे ही लाइफ लाइन के फार्मासिस्ट के कहने पर दवा खरीद रहे हैं। मरीजों की जिम्मेदारी है कि वे दवा लेने के बाद डॉक्टर को दिखाएं, जिससे बताया जा सके कि कोई गलत दवा तो नहीं दी है। इसके लिए मरीज और उनके परिजनों को जागरूक होना पड़ेगा। - डॉ. श्याम बिहारी जारेड़ा, प्रभारी महिला अस्पताल

महिला अस्पताल में फार्मासिस्ट सरकारी दवाओं की बिक्री पर ध्यान नहीं दे रहा है। पिछले महीने बिक्री बेहद कम है। दुकान खोलने का उद्देश्य मरीजों को कम दर पर दवाएं उपलब्ध कराना है। इस दुकान की जांच कराई जाएगी। सुरेन्द्र शर्मा, महाप्रबंधक सहकारी उपभोक्ता भंडार

डिस्चार्ज 40 प्रसूताएं रोजाना खरीद रही दवाएं

लाइफ लाइन की इस दुकान से अस्पताल से रोजाना डिस्चार्ज होने वाली 50 में से 40 प्रसूताएं को दवाएं बेची जा रही हैं। इन जेनरिक दवाओं की करीब 11800 रुपए की बिक्री में से एक दिन में करीब 9700 रुपए से ज्यादा की शुद्ध कमाई हो रही है। अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाली प्रसूताओं को डॉक्टर आयरन और कैल्शियम की दवा ही लिख रहे हैं। आयरन की दवाएं तो अस्पताल के दवा वितरण केन्द्र पर मिल रही हैं, लेकिन कैल्शियम की दवा के लिए प्रसूता और उनके परिजन जब लाइफ लाइन की दुकान पर पहुंचते हैं तो वह उस टेबलेट की आड़ में उन्हें प्रोटीन पाउडर और टांकों पर लगाने के लिए आइंटमेंट थमा रहा है। सभी दवाएं बिना बिल के बेची जा रही हैं। इनके अलावा ओपीडी में आने वाली गर्भवती महिलाएं भी प्रोटीन पाउडर और कैल्शियम की टेबलेट भी खरीदती हैं।

ऐसे होती है मरीजों को दवा खरीदने में गफलत

महिला अस्पताल में दवा खरीदने में प्रसूताओं और गर्भवती महिलाओं को दवा खरीदने में गफलत इसलिए होती है कि जब वे लेने जाती हैं तो रजिस्ट्रेशन काउंटर के पास फ्रंट में ही लाइफ लाइन की दुकान है। वे उसी दुकान को ही अस्पताल की दवा की दुकान समझ बैठती हैं। अस्पताल में पूछने पर भी कर्मचारी उसी दुकान को बताते हैं, जबकि निशुल्क दवा वितरण केन्द्र अस्पताल की गैलरी में है। वहां जानकारी के अभाव में कम लोग ही पहुंच पाते हैं।

इस दुकान पर सरकारी दवाओं की बिक्री काफी कम है। यहां प्रोटीन पाउडर सहित अन्य दवाएं मरीजों की सुविधाओं के लिए रखी हुई हैं। हम जबरन मरीज और प्रसूताओं को दवा नहीं दे रहे हैं। उनके मांगने पर ही देते हैं। - आशीष अग्रवाल, फार्मासिस्ट लाइफ लाइन दुकान, महिला अस्पताल

दुकान में रखे प्रोटीन पाउडर के डिब्बे व कैल्शियम की टेबलेट के डिब्बे।

अस्पताल की दवा दुकान पर नहीं हैं कैल्शियम की टेबलेट

शहर के महिला अस्पताल के निशुल्क दवा वितरण केन्द्र पर करीब एक महीने से कैल्शियम की टेबलेट नहीं हैं। ये दवाएं मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना की सप्लाई में नहीं आ रही हैं। इसी कारण अस्पताल की ओपीडी में आने वाली गर्भवती महिलाओं और डिस्चार्ज होने वाली प्रसूताओं को कैल्शियम की दवा बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं।

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