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1 वर्ष में 107 साइबर ठगी, पुलिस 4 केस में ही पकड़ सकी अपराधी
अलवर पुलिस जिले में साल 2019 में साइबर अपराध के 107 मुकदमे दर्ज हुए। इनमें से 4 मुकदमों में ही पुलिस चालान पेश कर 8 आरोपियों की गिरफ्तार कर पाई। 65 मुकदमों में पुलिस ने एफआर लगाई तथा 38 मुकदमे पेंडिंग हैं। इस साल जनवरी में 11 मुकदमे दर्ज हुए। एक भी अाराेपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। भिवाड़ी पुलिस जिले के नौ थानों में साल 2019 में 33 मुकदमे दर्ज हुए। चार मामलों में 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। चार मामलों में एफआर लगा दी गई व 25 मामले लंबित हैं।
ठगी के बाद तत्काल पुलिस व बैंक को दें जानकारी : ठगी के बाद पैसा बैंक खाते से किस माध्यम से और कहां पैसा गया है, इसकी जानकारी बैंक के पास होती है। तुरंत बैंक जाकर खाते से पेमेंट रुकवा दें। ठगी की राशि किसी वॉलेट पर होगी, तो उसके वापस होने की संभावना अधिक होगी। ठगी के बाद पुलिस को सूचना देने और बैंक से जानकारी लेने में जितनी देरी होगी, उतना ही रिकवरी की गुंजाइश कम होगी।
यह भी समस्या : बैंक से समय पर पूरी जानकारी नहीं मिल पाती। लोग ठगी होने कई दिन बाद पुलिस का सूचना देते हैं। कई केसों में लोग पुलिस के पास पहुंचते हैं लेकिन पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती। अगर कर भी ले तो आगे जांच नहीं होती।
ये हैं ठगी के तरीके
ऑनलाइन साइट से शॉपिंग : ठग फोन कर बताते हैं कि अापकाे कंपनी की तरफ से लकी कस्टमर चुना गया है। 50 हजार का मोबाइल सिर्फ 7 हजार या 10 हजार में मिलेगा। इसके लिए आपको ये पैसे कंपनी के अकाउंट में जमा कराने होंगे।मिलती जुलती वेबसाइट : ठग कंपनियों की वेबसाइट के नाम से मिलती-जुलती दूसरी साइट बना देते हैं। ओपन करने पर असली जैसी दिखती हैं। वे इनमें काफी कम कीमत में सामान बेचने का लालच देते हैं। सस्ते के चक्कर में ग्राहक ऑनलाइन पेमेंट कर बैठता है। वे सामान की डिलीवरी नहीं करते अाैर अगर करते हैं ताे ऑर्डर किए सामान की जगह दूसरा सामान भेज देते हैं। पेमेंट वापस करने के लिए ऑर्डर नंबर, मोबाइल नंबर व नाम की जानकारी लेकर बैंक से पैसा निकालते हैं।ओटीपी की मदद से ठगी : ठग फोन करके यूजर को किसी नंबर पर एसएमएस करने को कहते हैं या लिंक भेजकर शेयर कराते हैं। इसके बाद उसका नंबर खुद अपने पास एक्टिवेट करवा लेते हैं। यूपीआई पर अपना एकाउंट बनाकर नंबर एक्टिवेट करवाते हैं। इसके बाद उस नंबर से रजिस्टर्ड बैंक अकाउंट या वॉलेट से पैसे अपने खाते में ट्रांसफर कर लेते हैं।लोन दिलाने के नाम पर घर पहुंचकर ठगी : साइबर अपराधी अब लोगों के खाते से पैसा उड़ाने के लिए लोगों के घर तक पहुंच रहे हैं। लोन दिलाने के नाम पर आधार कार्ड, बैंक की पासबुक की फोटो कॉपी ले लेते हैं। वे कैंसिल चेक लेकर उनके खाते से रुपए उड़ाते हैं।कार्ड व एक्सपायरी डेट सेव नहीं करें: बहुत से लोग ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट आदि उसी साइट पर सेव कर रख लेते हैं, ताकि बाद में भी शॉपिंग के दौरान आसानी हो, लेकिन ऐसा भूल कर भी नहीं करें।
{एटीएम कार्ड बदलकर या उसका क्लोन बनाकर ठगी। {फर्जी बैंक अधिकारी, आयकर या इंश्योरेंस कंपनी का अधिकारी बनकर एटीएम की गोपनीय जानकारी पूछना। {फेसबुक फ्रेंड बनकर गिफ्ट देने और उसे छुड़ाने के नाम पर पैसा लेना। {नौकरी लगाने के नाम ठगी। {सिमकार्ड अपडेट करने के बहाने ठगी। {फर्जी ईमेल के माध्यम से ठगी। {मोबाइल मैसेज सर्विस के माध्यम से ठगी। {मेट्रिमोनियल वेबसाइट के माध्यम से शादी का झांसा देकरअकाउंट में पैसा डलवा लेते हैं। {मोबाइल टॉवर लगाने के नाम पर ठगी।
इंटरनेट बैंकिंग में बरतें सावधानी: इंटरनेट बैंकिंग के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए जरूरी है कि इंटरनेट ब्राउजर एड्रेस बार में जाकर ही अपने बैंक का यूआरएल टाइप करें। कभी भी ईमेल से भेजे गए लिंक पर क्लिक नहीं करें। आशंका रहती है कि हैकर फर्जीवाड़े के लिए बैंक की ओरिजिनल वेबसाइट जैसी साइट डिजाइन कर दें। अगर ऐसी फर्जी वेबसाइट पर एक बार लॉग-इन कर जानकारी डाल दी तो एकाउंट से पैसे निकाले जा सकते हैं। नेट बैंकिंग के दौरान अपने पासवर्ड को नियमित रूप से बदलते रहें। पासवर्ड किसी के साथ साझा नहीं करें। पासवर्ड को ऑनलाइन की बजाय ऑफलाइन रखें। नेट बैंकिंग का इस्तेमाल कभी भी सार्वजनिक कंप्यूटर पर नहीं करें।कार्ड व एक्सपायरी डेट सेव नहीं करें: बहुत से लोग ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान कार्ड नंबर, एक्सपायरी डेट आदि उसी साइट पर सेव कर रख लेते हैं, ताकि बाद में भी शॉपिंग के दौरान आसानी हो, लेकिन ऐसा भूल कर भी नहीं करें।