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18 दिवसीय पूजा शुरू, 27 काे मनाई जाएगी गणगाैर

एक वर्ष पहले
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अलवर| हाेली के अगले दिन धुलंडी पर मंगलवार से गणगाैर पूजा प्रारंभ हाे गई। इसके साथ माेहल्ले, गलियाें व काॅलाेनियाें में गणगाैर के गीत सुनाई देने लगे हैं। हाेली की भस्मी काे मिट्टी में मिलाकर गणगाैर तैयार की जाती है। गणगाैर पूजा काे लेकर लड़कियाें अाैर महिलाअाें में खासा उत्साह है। सुयाेग्य वर प्राप्त करने के लिए लड़कियां अाैर अखंड साैभाग्य के लिए महिलाएं गणगाैर पूजन कर रही हैं। 27 मार्च तक चलने वाली गणगाैर पूजा में भगवान शिव अाैर पार्वती की पूजा हाेती है गण यानी शिव के रूप में ईसर अाैर गाैर यानी पार्वती की पूजा हाेती है। इस बार गणगाैर पूजा की खास बात यह है कि 20 व 21 मार्च काे द्वादशी तिथि हाेने के कारण 16 दिन की बजाय 18 दिन गणगाैर पूजा हाेगी। 27 मार्च की शाम गणगाैर काे पानी पिलाने के बाद तालाब व नदी में विसर्जित की जाएगी। इसी के साथ गणगाैर पूजा संपन्न हाेगी।

सर्वार्थ सिद्धि याेग, राजयाेग व रवि याेग का शुभ संयाेग: पं. यज्ञदत्त शर्मा का कहना है कि 27 मार्च काे गणगाैर वाले दिन सर्वार्थ सिद्धि याेग, राजयाेग व रवि याेग का शुभ संयाेग बन रहा है। इस दिन सुबह 6.27 से 10.9 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि याेग, सुबह 10.9 से रात 10.13 बजे तक राज याेग व सुबह 10.9 से पूरी रात रवि याेग है।
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