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~2.27 करोड़ की फर्जी बैंक गारंटी से लिया 22 करोड़ का ठेका, कंपनी पर केस दर्ज
फर्जी बैंक गारंटी देकर एक ठेकेदार कंपनी ने जलदाय विभाग से 22 करोड़ रुपए की पेयजल सुदृढ़ीकरण योजना का ठेका ले लिया। कंपनी दो साल तक काम भी करती रही, लेकिन जलदाय विभाग के अधिकारियों को पता ही नहीं चला। तय अवधि में काम पूरा नहीं होने पर गारंटी जब्त करने की नौबत आई तो पोल खुली। इसके बावजूद जलदाय विभाग के अधिकारी किसी तरह मामला टालने में लगे रहे। दबाव बढ़ने पर अधिकारियों ने 3 मार्च को ठेकेदार कंपनी के खिलाफ मामला तो दर्ज कराया, लेकिन पुलिस व जलदाय अधिकारी लगातार मामले को छिपाते रहे। फर्जी बैंक गारंटी की जांच को लेकर कठघरे में घिरे अधिकारी अब कह रहे हैं कि उक्त कंपनी की अन्य गारंटी भी उनके पास जमा है। यह रकम उसमें समायोजित की जाएगी। बहरोड़ थानाधिकारी िजतेन्द्र सिंह साेलंकी के अनुसार जलदाय विभाग के अधिशासी अभियंता धर्मेंद्र कुमार सोनी एवं कनिष्ठ अभियंता मनीष कुमार ने मामला दर्ज करवाया कि वर्ष 2017 में मै. डीम कंट्रक्शन कंपनी को जलदाय विभाग ने बहरोड़ शहर में 22 करोड़ रुपए की पेयजल सुदृढ़ीकरण योजना का कार्य ठेके पर दिया। उक्त कंपनी ने काम की एवज में 2 करोड़ 27 लाख रुपए की बैंक गारंटी विभाग के पास जमा करवाई। विभाग ने संबंधित गारंटी देने वाली स्टेट बैंक अॉफ इंडिया की जेवीपीडी मुम्बई शाखा से संपर्क किया। उन्होंने गारंटी को सही बताया। इसी दौरान डीम कंपनी ने सड़कों की खुदाई कर पाइप लाइन बिछाने, नलकूप एवं उच्च तथा भूमिगत टंकी बनाने का काम शुरु कर दिया। मगर कंपनी समय पर काम पूरा नहीं कर पाई। तो विभाग उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। जहां से बैंक गारंटी जब्त करने के निर्देश आए। ठेकेदार कंपनी डीम कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा जमा बैंक गारंटी एसबीआई जेवीपीडी शाखा मुम्बई की थी। विभाग ने उक्त बैंक शाखा में संपर्क किया तो पता चला कि उक्त शाखा गारंटी ही जारी नहीं करती है। मामला उच्चाधिकारियों को बताया गया। इसके बाद डीम कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ धोखाधड़ी करने, फर्जी गारंटी जमा करने सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कराया है। जांच सब इंस्पेक्टर शेरसिंह को दी गई है।
शहर की सड़के उधेड़ करोड़ों का नुकसान किया, विभाग को भी लगाया चूना : जलदाय विभाग से अनुबंधित कंपनी ने केवल जलदाय विभाग को 2.27 करोड़ रुपए की फर्जी बैंक गारंटी से चूना नहीं लगाया। बल्कि शहर में करोड़ों रुपए की सड़कों को उधेड़ने के बाद मरम्मत भी नहीं की। इससे सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ है। कंपनी को वर्ष 2017 में ठेका देकर डेढ़ साल में काम पूरा करना था लेकिन ढाई साल बाद भी पाइपलाइन नहीं डली। पुरानी जलापूर्ति व्यवस्था भी चौपट पड़ी है। हर जनसुनवाई और बैठक में शहर के लोगों व जनप्रतिनिधियों ने अधूरे काम की समस्या उठाई। इससे विभाग पर दबाव बढ़ा तब जाकर उसे ब्लैक लिस्टेड करने का कदम उठाया गया।
बड़ा सवाल : आखिर अफसर क्यों बने रहे अनजान, मामला छिपाया क्यों ?
ठेकेदार कंपनी के फर्जीवाड़े में जलदाय विभाग के अफसर भी शक के दायरे में हैं। हैरान करने वाली बात ये है कि 22 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट लेने वाली कंपनी की बैंक गारंटी की जांच तक नहीं की गई। डेढ़ साल कंपनी काम करती रही। कंपनी फेल हुई तो भी 1 साल से अधिकारी कागजी घोड़े दौड़ाते रहे। इसके बाद दबाव बढ़ा तो 3 मार्च काे मामला दर्ज कराने के बावजूद मीडिया से मामला छिपाते रहे। उधर, पुलिस अफसराें ने भी मामले में अनुसंधान की बात कह पर्दा डालने का प्रयास किया। अब एक्सईएन सोनी का कहना है कि उक्त कंपनी की अन्य गारंटी भी जमा है। उक्त 2.27 करोड़ रुपए उसमें समायोजित कर काटे जाएंगे।