मीसाबंदियों व डीआईआर की पेंशन बंद करने के निर्णय पर गुस्सा

Alwar News - मीसाबंदी पेंशन ले रहे अस्सी साल के रघुनाथ बबेजा ने सरकार से सवाल पूछा है कि पेंशन बंद करने से पहले एक बार हमारी...

Oct 15, 2019, 08:25 AM IST
Alwar News - rajasthan news anger over decision to discontinue pension of misabandis and dir
मीसाबंदी पेंशन ले रहे अस्सी साल के रघुनाथ बबेजा ने सरकार से सवाल पूछा है कि पेंशन बंद करने से पहले एक बार हमारी स्थिति का तो पता कर लेते। वे कहते है कि जब आपातकाल में हम जेल से घर आए तो सब्जी के लिए पैसे नहीं थे, गोलगप्पे का पानी मांगकर दो रोटी खाते थे। आज पूरी तरह बेरोजगार है, सरकार की पेंशन के भरोसे जीवन कट रहा था, पेंशन बंद होने से जीवन में परेशानी बढ़ जाएगी। सरकार को इस पर विचार करना चाहिए कि जब अनेक योजनाएं शुरू की जा रही है तो इसे बंद क्यों किया जा रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की केबिनट में मीसाबंदियों की पेंशन बंद करने के निर्णय के बाद भास्कर ने इसकी पड़ताल की तो पता लगा कि अलवर के 38 मीसा व डीआईआर बंदियों के पेंशन और मेडिकल सुविधाओं का हक छिन गया है। ये 38 वो लोग थे जिन्होंने 1975 में लगे आपातकाल का विरोध जताया था। प्रदेश में इस तरह के हजारों लोग जीवित हैं जो केबिनेट के इस निर्णय से प्रभावित होंगे। पेंशन प्राप्त कर रहे लोगों का कहना है कि सरकार का यह निर्णय गलत है। क्योंकि अधिकांश पेंशन प्राप्त कर रहे लोग 68 वर्ष से अधिक के हैं और उनके सामने संकट खड़ा हो जाएगा। फिलहाल हरियाणा और मध्यप्रदेश में यह पेंशन अभी दी जा रही है। 2015 में पेंशन के रूप में 12 हजार रुपए और 1200 रुपए मेडिकल के एवज में मिलते थे। वर्तमान में यह राशि बीस हजार रुपए पेंशन व चार हजार रुपए मेडिकल के थे।

जानिए कौन हैं मीसा व डीआईआर बंदी, जिनकी पेंशन बंद हुई है

बंदी के रूप में पेंशन प्राप्त कर रहे ये वो लोग थे जिन्होंने आपातकाल का विरोध जताया था। इनमें मीसा बंदी वो थे जिन्हें कलेक्टर के आदेशों से विरोध जताने के लिए जेल भेज दिया गया था। जबकि डीआईआर बंदी वो थे जो आपातकाल के समय धरना व प्रदर्शन करने के कारण जेल गए थे।

ये थे मीसा और डीआईआर बंदी : अलवर में जीतमल जैन, तिलकराज, मोतीलाल गौड़, हरिशंकर, चंद्रशेखर, भूदेव शर्मा, राधेश्याम स्वामी, देवेंद्र सिंह राघव, रामजीलाल गुप्ता, हरनाम सिंह,अजय शर्मा एडवोकेट,बाबूलाल, वैद्य रामदेव शर्मा,अमरचंद जाट,भूरिंसिंह राजपूत ,भूरिसिंह पुत्र नत्थी सिंह सहित 38 लोग मीसा व डीआईआर बंदियों में शामिल थे और पेंशन प्राप्त कर रहे थे। अलवर के दो लोग उम्मेदी लाल अग्रवाल व सत्यनारायण गुप्ता जयपुर से पेंशन ले रहे है।

जेल से घर आए तो सब्जी के लिए पैसे नहीं थे, गोलगप्पे के पानी से रोटी खाते थे, आज सरकार को हमारी पेंशन बोझ लगने लगी

कांग्रेस आपातकाल को सही ठहराती है इसलिए बंद की पेंशन : गोयल

पेंशन पा रहे एडवोकेट हरिशंकर गोयल ने कहा कि आपातकाल श्रीमती इंदिरागांधी ने लगाया था , इस कारण कांग्रेस सरकार उसे सही ठहराती है, इस कारण ही पेंशन बंद करने का निर्णय लिया है। इस पर फिर से विचार करना चाहिए। क्योंकि पेंशन प्राप्त करने वालों के पास इस समय परिवार चलाने के लिए कोई साधन नहीं है। उनका कहना है कि उस समय जेल जाने के कारण हमारी आर्थिक स्थिति भी खराब हो गई थी। मेरी प|ी का अलवर में एसटीसी में प्रवेश भी नहीं हो पाया था।

राजनैतिक द्वेषता के चलते गलत निर्णय लिया : जैन

आपातकाल में जेल में बंद रहे पूर्व विधायक व मीसा बंदी जीतमल जैन का कहना है कि सरकार ने राजनैतिक द्वेषता के चलते गलत निर्णय लिया है। जेल रहने के दौरान हमारी घर की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। हमारा पूरा कारोबार ठप हो गया था। सरकार के निर्णय से मुझे ही नहीं मेरे जैसे मीसा बंदियों को बडा नुकसान हुआ था। हमें मिल रही पेंशन बुढ़ापे में बडा सहारा था। हालांकि मुझे तो विधायक की पेंशन मिलती रहेगी लेकिन मेरे अलावा कइयों का गुजरा तो इस पेंशन से ही चल रहा था। पेंशन बंद करने का सरकार का निर्णय सही नहीं है। निर्णय कांग्रेस सरकार ने लिया है, अब हम तो क्या कर सकते हैं? अब भारतीय जनता पार्टी को हमारी आवाज उठानी चाहिए।

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