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पहलू खां मॉब लिंचिंग : 6 बालिग अाराेपी बरी हाे चुके, अब दाे नाबालिग दोषी करार

एक वर्ष पहले
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दोनों बाल अपचारी 3-3 साल के लिए विशेष सुरक्षित गृह भेजने के आदेश

बहुचर्चित पहलू खां मॉब लिंचिंग मामले में 6 बालिग आरोपियों के बरी होने के 8 माह बाद अब दो नाबालिग दोषी करार दिए गए। इन्हें किशोर न्याय बोर्ड ने तीन-तीन साल के लिए जयपुर के विशेष सुरक्षित सुधार गृह में भेजे जाने के आदेश दिए। बोर्ड की प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट सरिता धाकड़, सदस्य रामभरोसा जाट व दीपा गौड़ ने शुक्रवार काे यह फैसला सुनाया। बाेर्ड ने चिकित्सकों के बयान अाैर रिपोर्ट पर सवाल उठाए अाैर चिकित्सकाें से जवाब तलब किया है। बोर्ड ने पहलू खां को कैलाश हॉस्पिटल बहरोड़ में भर्ती कराने के दौरान चोटों का मुआयना करने वाले डॉ. अखिल सक्सेना, डाॅ. बीडी शर्मा, डाॅ. अारसी यादव व डाॅ. जितेंद्र भताेलिया का आचरण संदिग्ध माना है। बाेर्ड ने फैसले में लिखा कि इन चिकित्सकों ने अलग-अलग बात कही। एक चिकित्सक कहता है कि काेई चोट नहीं थी। दूसरे चिकित्सक ने पसलियों में फ्रेक्चर की बात कही। इन्हाेंने एक स्वर में पहलू खां की मौत का कारण हृदयाघात माना, लेकिन यह भी संदेहास्पद है। बोर्ड ने फैसले में इन चिकित्सकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है कि किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए गंभीर चोट से हुई मौत का कारण हार्ट अटैक में बदल दिया गया। बोर्ड ने अपने फैसले में माना कि पहलू की माैत मारपीट के दौरान छाती व पेट में गंभीर चोटों के कारण हुए रक्तस्त्राव व शॉक से हुई। बोर्ड ने पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के बयानों को आधार मनाते हुए कहा कि पहलू खां को कोई हृदयाघात नहीं हुअा था, उसकी हत्या मारपीट से हुई।

बता दें कि अपर जिला सेशन संख्या एक की न्यायाधीश डाॅ. सरिता स्वामी ने पिछले साल 14 अगस्त को 6 आरोपियों विपिन यादव, रविंद्र, कालू राम, दयानंद, योगेश कुमार व भीम राठी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। इन दाे बाल अपचारियों के खिलाफ भी चालान पेश हुअा था, जिनकी सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड की ओर से की जा रही थी। पर्चा बयान के अनुसार 1 अप्रैल 2017 को पहलू खां अपने दाे बेटों आरिफ व इरशाद खान के साथ पिकअप गाड़ी में जयपुर के पशु हटवाड़ा से गोवंश लादकर अपने गांव जयसिंहपुर (नंूह) ला रहा था। बहरोड़ पुलिया के आगे निकलते ही कुछ लोगों ने उनकी पिकअप को रोक लिया था और मारपीट की थी। इसके बाद 4 अप्रैल को इलाज के दौरान पहलू की मौत हो गई थी।

इन्होंने सुनाया फैसला

किशोर न्याय बोर्ड की प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट सरिता धाकड़, सदस्य रामभरोसा जाट व दीपा गौड़ ने फैसले में लिखा कि मॉब लिंचिंग के दोषी बाल अपचारियों के लिए सुधार गृह में शिक्षा, कौशल सहित अन्य क्रियाकलाप का आवश्यक रूप से ध्यान रखा जाए।

बाेर्ड ने चिकित्सकों के बयान व रिपोर्ट पर उठाए सवाल : बोर्ड ने पहलू खां को कैलाश हॉस्पिटल बहरोड़ में भर्ती करवाने के दौरान उसकी चोटों का मुआयना करने वाले डॉ. अखिल सक्सेना, डाॅ. बीडी शर्मा, डाॅ. अारसी यादव व डाॅ. जितेंद्र भताेलिया का आचरण संदिग्ध माना है। बाेर्ड ने फैसले में लिखा कि इन डॉक्टरों ने चोटों के बारे में भिन्न-भिन्न कथन किए हैं। एक डॉक्टर कहता है कि काेई चोट नहीं थी। दूसरे ने चोट होने व पसलियों में फ्रेक्चर होने की बात कही। कोई चिकित्सक कहता है कि सोनोग्राफी जांच में चोट नहीं पाई गई। ऐसे में चिकित्सकों के उक्त कथन संदेहास्पद हैं।

गाेमाता की रक्षा में उपद्रव हुअा, एेसा काेई माता नहीं चाहेगी : किशाेर बाेर्ड

किशाेर न्याय बोर्ड ने घटना के दौरान डिजिटल साक्ष्य जैसे वीडियाेग्राफी व फाेटाेग्राफ सहित मोबाइल लोकेशन को मुख्य अाधार मानते हुए दाेनाें बाल अपचारियों को दोषी माना। इन बाल अपचारियों की घटना स्थल पर मौजूदगी बताने वाली 13 फाेटाेग्राफ व 3 वीडियाे क्लिप बोर्ड में पेश की गई थीं। प्रिंसिंपल मजिस्ट्रेट सरिता धाकड़ ने फैसले में लिखा कि यह घाेर शर्मनाक कांड है। यह दिन मानव समाज के लिए दुखद व खेदजनक रहेगा। इस कांड को गाेमाता की रक्षा में किए गए उपद्रव के रूप में पेश करने का प्रयास किया गया। कोई भी माता अपने पुत्रों को कभी भी उसका नाम लेकर नृशंस हत्याकांड व उपद्रव करने की इजाजत नहीं देगी। यदि भीड़ अनियंत्रित हाेकर खुद ही फैसला करने लगे अाैर कानून ताेड़ने लगे ताे देश में कानून व्यवस्था ठप हा़े जाएगी। कुछ समाजकंटक देश के नौजवानों को दिशाहीन व भ्रमित कर धर्म व सम्प्रदाय के नाम पर इस तरह की हत्याएं व अमानवीय कृत्य करने के लिए कानून की धज्जियां उड़ाते हैं।

पहलू खां

किशोर न्याय बोर्ड का फैसला : डाॅक्टराें ने मारपीट से हुई माैत काे हार्ट अटैक क्याें बताया, जवाब दें
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