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भाजपा ने हर दूसरे दिन सदन से वाॅकआउट या सदन कूप में नारेबाजी कर सरकार को घेरा

एक वर्ष पहले
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राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा पार्ट 10 फरवरी से प्रारंभ हुआ। इसके बाद से ही भाजपा आक्रामक मूड में है। अलग अलग मुद्दों पर या तो भाजपा के विधायकों ने वाकआउट कर सदन में अपना विरोध जोरदार तरीके से दर्ज कराया या फिर सदन कूप में प्रवेश कर नारेबाजी की। चाहे जो हो, लेकिन भाजपा का यह आक्रामक रवैया पहले दिन से ही जारी है। इस बार नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया और उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने अपनी उपस्थिति जोरदार तरीके से दर्ज कराई है। दोनों की जुगलबंदी का यह आलम है कि वे सरकार को घेरने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देना चाहते। दाेनाें ने ही हर मुद्दे काे सदन में प्रमुखता से रखा।

यह भी जानिए... सदन में कब-कब विपक्ष ने किस मुद्दे पर किया वॉकआउट

10 फरवरी: फूल सिंह मीणा (उदयपुर ग्रामीण) ने ट्राइबल एरिया में अिधक राशि (50-50 हजार रुपए) के बिल आने का मुद्दा उठाया। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि यह बिजली दरों पर बहस है। विरोध बढ़ा तो भाजपा के सदस्य सदन से प्रस्थान कर गए।

11 फरवरी: ब्यावर के शंकर सिंह रावत ने प्रश्नकाल में दीपिका पादुकोण की छपाक फिल्म को टैक्स फ्री करने के मामले पर हंगामा हो गया और भाजपा के सदस्य सदन कूप में आ गए और नारेबाजी करने लगे।

12 फरवरी: रघु शर्मा ने कोटा में बच्चों की मौत का मुद्ा उठाया। इस दौरान राजेंद्र राठौड़ बीच में बोलने लगे। मामले में किरण माहेश्वरी और अनिता भदेल, मदन दिलावर भी कूद पड़े। इसके बाद भाजपा के सदस्यों ने सदन कूप में प्रवेश किया और नारेबाजी करने लगे।

17 फरवरी: अशोक लाहोटी ने बजरी माफिया और अवैध संचालित बसों का मुद्दा उठाया। कहा कि रोजाना 50 हजार रुपए बजरी माफियाओं के माध्यम से उगाही होती है। इस पर हंगामा होता रहा। धारीवाल ने कहा कि 30 पर कार्रवाई हुई है। बीच में राजेंद्र राठौड़ ने बीच में टोका। इस पर भाजपा ने सदन से वॉकआउट किया।

18 फरवरी: धारीवाल ने कटारिया पर किसानों के लिए झूठे आसूं रोने का आरोप लगाया और किसानों की आत्महत्या को लेकर एक बयान का जिक्र किया। इस पर कटारिया गुस्से में आ गए। हंगामा होता रहा और फिर भाजपा वाकआउट कर गई।

25 फरवरी: राजकीय समारोहों में विधायकों के प्रोटोकॉल पर धारीवाल शासकीय वक्तव्य दे रहे थे तो राठौड़ ने कहा कि अगर किसी कार्यक्रम के अंदर जनप्रतिनिधि का सम्मान नहीं होगा तो विशेषाधिकार हनन का मामला बनता है। इसके बाद भाजपा ने दो बार सदन कूप में प्रवेश किया। नारेबाजी की।

26 फरवरी: राजस्थान विनियोग विधेयक 2020 को लेकर राजेंद्र राठौड़ ने डिविजन की मांग पर भी बहस छिड़ी। कटारिया ने सभापति महोदय से डिविजन की मांग की। इसके बाद सभी भाजपा सदस्य वाकआउट कर गए। वहीं लूणकरनसर में हिरणों के शिकार को लेकर हुए आंदोलन व रेंजर के निलंबन आदेश में बार बार परिवर्तन पर वन मंत्री सुखराम विश्नोई ने मुद्दा उठा। इस पर भी बहस छिड़ी तो विपक्ष ने वाकआउट किया।

27 फरवरी: बूंदी में बस के नदी में गिरने की घटना पर धारीवाल वक्तव्य दे रहे थे। इस पर हंगामा हो गया और भाजपा ने सदन से वाकआउट किया।

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