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डीसी जांच करने आए तो गेट पर ताला लगा दिया ताकि शिकायत करने वाले ना आएं
मत्स्य विश्वविद्यालय में कनिष्ठ लिपिक, स्टेनोग्राफर, निजी सहायक एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 23 पदों के लिए हुई भर्ती में गड़बड़ी की शिकायत की जांच करने गुरुवार को संभागीय आयुक्त केसी वर्मा अलवर पहुंचे। उन्होंने कुलपति कक्ष में भर्ती के समय विवि में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों सहित कुल 5 लोगों के बयान दर्ज किए। विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने संभागीय आयुक्त के अंदर जाते ही विवि के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया और शाम 4.30 बजे तक शिकायतकर्ता और मीडिया कर्मियों को संभागीय आयुक्त से नहीं मिलने दिया। शिकायतकर्ता विष्णु चावड़ा ने संभागीय आयुक्त काे फाेन कर इसकी शिकायत की, जिसके बाद संभागीय आयुक्त ने विवि के विधि सलाहकार नीलेश पाड़े को बुलाकर फटकार लगाई और उनसे ताला लगाने का कारण पूछा। इसके बाद संभागीय आयुक्त ने कार्यवाहक कुलसचिव रोहिताश्व को बुलाकर सभी को अंदर भेजने के आदेश दिए। जिसके बाद सहायक कुलसचिव आशुतोष ने सभी को फोन कर संभागीय आयुक्त से मिलने के लिए बुलाया। संभागीय आयुक्त वर्मा ने बताया कि उन्होंने ताला लगाने और खुद से किसी काे नहीं मिलने देने जैसे कोई आदेश नहीं दिए। उन्होंने बताया कि भर्ती संबंधी प्राप्त शिकायत के आधार पर जांच का मुख्य विषय विश्वविद्यालय में हुई भर्ती के दौरान विवि के अधिकारी और कर्मचारियों के रिश्तेदारों एवं जानकारों को नौकरी देने और रिजल्ट जारी करने के 12 घंटे के भीतर कर्मिकों को नियुक्ति देना आदि बिंदु शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 5 कर्मिकों से इस मामले को लेकर विभिन्न सवाल किए गए। संभागीय आयुक्त ने बताया कि कुल 22 लोगों के बयान दर्ज होने हैं। वे दुबारा 21 मार्च को जांच के लिए आएंगे। संभागीय आयुक्त ने तत्कालीन कुलसचिव एवं कॉलेज शिक्षक अनूप सिंह, जितेन्द्र सिंह नरूका, वित्त नियंत्रक रोहिताश्व यादव, व्याख्याता महेन्द्र प्रताप ब्याला व कनिष्ठ लिपिक मयंक नैना के बयान दर्ज किए। दोनों शिकायत कर्ता विवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुमंत चावड़ा और उनके भाई मत्स्य विवि संघर्ष समिति के संयोजक विष्णु चावड़ा के बयान भी दर्ज किए गए। जांच दोपहर 2 बजे शुरू हुई और बयान शाम 5.15 बजे तक लिए गए।
23 मार्च 2018 को जारी हुआ था भर्ती का विज्ञापन, शिकायत पर एसीबी ने दर्ज किया था मामला
23 मार्च 2018 को यूनिवर्सिटी ने कनिष्ठ लिपिक, स्टेनोग्राफर, निजी सहायक एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पद के लिए विज्ञापन जारी कर भर्तियां की थीं। भर्ती में धांधली की शिकायत मिलने पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने परिवाद दर्ज किया था। एसीबी ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार से भर्ती का रिकॉर्ड तलब किया है। भर्तियों में धांधली को लेकर पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुमंत चावड़ा व विष्णु चावड़ा ने एसबी के जयपुर कार्यालय में शिकायत की थी।
नियम विरुद्ध रजिस्ट्रार का चार्ज व्याख्याता को देने का आरोप : विष्णु चावड़ा ने संभागीय आयुक्त को विवि के संविधान का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि तत्कालीन कुलपति ने नियमों काे ताक पर रखते हुए प्रतिनियुक्ति पर लगे व्याख्याता अनूप सिंह को रजिस्ट्रार का चार्ज दिया और उन्हीं से भर्ती प्रक्रिया पूरी करवा ली। जबकि इस पद पर सिर्फ प्रशासनिक अधिकारी को ही जिम्मेदारी दी जा सकती है। उस समय सरकार ने अनूप सिंह को रिलीव करने के आदेश भी विवि को भेजे हुए थे। लिखित शिकायत में वित्त नियंत्रक रोहिताश्व यादव के सगे साले सत्यनारायण यादव को कनिष्ठ लिपिक पद पर और अन्य कर्मिकों को उनके रिश्तेदार व परिचितों को भर्ती करने का आरोप लगाया गया है। रोहिताश्व के पास फिलहाल कुलसचिव का कार्यभार भी है।
विवि के मुख्य गेट पर लगा ताला।