क्षमावाणी पर्व सभी धर्माें अाैर समाजाें का त्याेहार, प्रयाेग करके देखें सकारात्मक परिणाम मिलेगा

Alwar News - क्राेध, अहंकार, कपट, लाेभ, असत्य व अज्ञान के कारण मनुष्य क्षमा के महत्व काे समझ नहीं पाता है। क्षमा के महत्व काे...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 06:47 AM IST
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क्राेध, अहंकार, कपट, लाेभ, असत्य व अज्ञान के कारण मनुष्य क्षमा के महत्व काे समझ नहीं पाता है। क्षमा के महत्व काे विश्वव्यापी रूप से समझा जाना चाहिए। जिसने अज्ञान के कारण क्षमा के प्रभावकारी महत्व काे नहीं जाना, वह अपना ही नुकसान करता है। प्राणी जगत में क्षमा का महत्व है। यह मानसिक, शारीरिक, धार्मिक व स्वास्थ्य सहित अन्य कारकाें काे प्रभावित करता है। इसलिए क्षमावाणी पर्व केवल जैन समाज का ही नहीं अपितु सभी समाजाें सहित पूरे विश्व की मानव जाति का त्याेहार है। जिसने भी क्षमा काे अपनाया है, उसे प्रसन्नता, ज्ञान, वृद्धि, समृद्धि, रिद्धि- सिद्धि मिली है। जिसने क्षमा का प्रयाेग करके देखा है, उसे सकारात्मक परिणाम मिले हैं। यह कहना है अलवर में चातुर्मास कर रहे दाे जैन संताें अभिनंदन सागर महाराज व विनम्र सागर महाराज का। दाेनाें से अलग-अलग हुई विशेष बातचीत के अंश:-

क्षमा कर व क्षमा मांग कर देखिए, अाप खुद जान जाएंगे इसका असर: विनम्र सागर महाराज

दशलक्षण पर्व की शुरुआत उत्तम क्षमा से अाैर समापन क्षमावाणी से हाेती है। सीधी तरह से कहा जाए ताे मन में क्षमा का प्रभाव जगाने से लेकर वचन, शरीर व जीवन में क्षमा काे उतारने की पूरी प्रक्रिया हाेती है। यह प्रक्रिया किसी भी धर्म के मानव पर असर डालती है। इसलिए क्षमावाणी पर्व केवल जैन समाज का पर्व नहीं बल्कि विश्व की मानव जाति का त्याेहार है। अाप जब भी क्राेधित हुए हैं, अपना कितना नुकसान किया है। अहंकार, कपट व लाेभ ने आपकी मानसिक शांति काे किस तरह प्रभावित किया है? साेचिए आपने किसी काे क्षमा किया या किसी से क्षमा मांगी ताे अापकाे कितनी प्रसन्नता मिली? तनाव गायब हाे गया अाैर मन शांत हाे गया। भावनात्मक रूप से अाप पर सकारात्मक असर हुअा। इन सबके बीच जीवन में क्षमा काे उतार लिया जाए ताे अाप पर क्या असर हाेगा, इसे समझें। तनाव मुक्त रहने से शारीरिक रूप से 30 मांसपेशियाें की ऊर्जा की बचत हाेती है। यह हमें ताकतवर बनाती है। 1600 श्वेत कणिकाएं उत्पन्न हाेती है, जाे राेगाें से बचाकर हमें स्वस्थ बनाती है। क्षमा से मानव धर्म का पालन हाेता है। दुश्मन भी मित्र बन जाते हैं। यहां तक खुदा का फरमान भी यही है कि तू किसी पर रहम कर तुझे रहमान बुलाएगा। क्षमा के महत्व काे हर धर्म में माना गया है। विश्व में भाईचारे की भावना क्षमा से स्थापित हाे सकती है। जिसने जीवन में क्षमा काे उतार लिया, उस व्यक्ति के मन में भाव निर्मल, वचन में सत्यता अाैर जीवन में प्रसन्नता काे स्थान मिलता है।

जैन संत विनम्र सागर महाराज

क्षमा मांग व दान वे ही कर सकते हैं, जाे अपनी इंद्रियाें पर काबू रखना जानते हैं : अभिनंदन सागर महाराज

मनुष्य के मन का क्राेध अाैर अहंकार उसकी भावनाओं काे पूरी तरह प्रभावित करते हैं। इनके कारण आवेश में अाए मानव काे कितनी कीमत चुकानी पड़ती है? अापके साथ क्या कभी एेसा हुअा है? अब सिर्फ पछताने के अलावा कुछ मिल रहा है क्या? साेचिए उस समय अाप अपनी इंद्रियाें पर अाैर गुस्से पर काबू रखते अाैर दूसरे काे माफ कर दिया हाेता या अपनी गलती पर किसी से क्षमा मांग ली जाती ताे परिणाम सकारात्मक हाेता। इसलिए क्षमा के पर्व काे जैन धर्म का ही नहीं पूरे विश्व का पर्व मना जाता है। जिन्हाेंने इसे अपनाया उन्हाेंने तरक्की की है। जिन्हाेंने अहंकार में इसे नहीं अपनाया, उनका नुकसान हुअा है। भगवान पार्श्वनाथ अाैर कमठ के बीच लगातार दस जन्माें तक क्षमा अाैर अहंकार की प्रतिद्वंद्विता चली। अंत में अहंकार काे क्षमा के अागे झुकना पड़ा। यह अाप पर निर्भर है कि अपने क्राेध, अहंकार, असत्य व अज्ञान के कारण अाप आपने तन, मन, धन व मानव धर्म काे नुकसान पहुंचाएंगे, या क्षमा काे अपनाएंगे। जिसके मन में क्षमा, सत्य व अहिंसा जाग्रत है, वे अपने कर्म से खुद की, समाज की व देश की उन्नति करते हैं। महात्मा गांधी का ही उदाहरण ले लें। पूरा अंग्रेजी साम्राज्यवाद अपने अहंकार के कारण देश में दमन की नीतियाें काे अपना रहा था। इन नीतियाें के अागे गांधीजी की सत्य, अहिंसा, क्षमा व भाईचारे की नीति प्रभावी साबित हुई। आखिर में अंग्रेजाें काे भी भारत छाेड़कर जाना पड़ा। यह क्षमा का प्रभाव ही है।

जैन संत अभिनंदन सागर महाराज

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