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सरकारी कर्मचारी भी बेराेजगारी भत्ता लेने के प्रयास में, अावेदन किए निरस्त
तीन-साढ़े तीन हजार रुपए महीने के बेरोजगारी भत्ते का लालच सरकारी कर्मचारियाें काे भी लुभा रहा है। सरकारी सेवा में कार्यरत युवा भी खुद को बेरोजगार बताते हुए भत्ता उठाने के प्रयास में पीछे नहीं हैं। ऐसे ही मामले का खुलासा विभाग की ओर से कराए गए सर्वे व जांच में हुआ है। दरअसल, राज्य सरकार के आदेशों के बाद रोजगार विभाग की ओर से कुल आवेदनों में 2 प्रतिशत आवेदनों की जांच विभिन्न अधिकारियों द्वारा पिछले साल जुलाई-अगस्त महीने के दौरान करवाई गई। इस जांच में 117 आवेदकों का चयन किया गया। इसके बाद इनका भौतिक सत्यापन किया गया। जांच में सामने आया कि ऐसे 6 आवेदक भत्ता लेने की फिराक में थे जिन्होंने पूर्व में भी ऑफलाइन भत्ता उठा लिया था और कुछ सरकारी सेवा में कार्यरत हैं। विभाग ने ऐसे आवेदनों को तुरंत निरस्त करते हुए कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है और मुख्यालय को इसकी रिपोर्ट दी है।
इन आवेदकों ने विभाग को किया गुमराह, आवेदन निरस्त : विभाग को गुमराह करते हुए शिवाजी पार्क निवासी संदीप गौड़, थानागाजी क्षेत्र के प्रतापगढ़ निवासी अमित कुमार टांक, बानसूर निवासी निधि, किशनगढ़बास निवासी पीयूष कालरा, बाघोर निवासी प्रमोद कुमार और मोलिया लक्ष्मणगढ़ निवासी मजीद खान ने आवेदन किए थे, जिन्हें निरस्त कर दिया गया। इनमें से बानसूर की निधि आईटीबीपी जम्मू एंड कश्मीर में कार्यरत है और बाकी 5 अावेदकाें ने पहले भी भत्ता ले लिया था।
उदाहरण ऐसे भी जिन्होंने खुद ही बेरोजगारी भत्ता लेने से किया मना : रोजगार विभाग में ऐसे भी उदाहरण मौजूद हैं जिसमें आवेदकों ने खुद ही भत्ता लेने से मना कर दिया। दरअसल ये ऐसे आवेदक थे जो भत्ते का आवेदन करने के बाद एसटीसी व बीएड तथा पोस्ट ग्रेजुएशन करने में जुट गए। उन्होंने अपना दायित्व समझते हुए विभाग को सूचित किया कि उनका भत्ता बंद कर दिया जाए। विभाग में ऐसे 15 आवेदकों ने पत्र लिखकर खुद का भत्ता बंद कराया।
सरकार के आदेश पर किए गए सर्वे व जांच में 6 आवेदक ऐसे मिले जिन्होंने गुमराह करते हुए बेराेजगारी भत्ता उठाने की कोशिश की। ऐसे आवेदनों की जांच करते हुए सभी को निरस्त कर दिया है और प्रकरण उच्चाधिकारियों को भिजवा दिए हैं।
-श्यामलाल साटोलिया, जिला रोजगार अधिकारी