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पिछले साल पांच बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों का बाजार मूल्य 144 लाख करोड़ रु. बढ़ा

Alwar News - शेयर मूल्यों में बनावटी उछाल की आशंकाएं भी सामने आईं दरअसल, बड़ी टेक कंपनियों का मूल्य मजबूत बुनियाद पर टिका...

Feb 22, 2020, 06:40 AM IST
Alwar News - rajasthan news last year the market value of five big technology companies was rs 144 lakh crore increased
शेयर मूल्यों में बनावटी उछाल की आशंकाएं भी सामने आईं

दरअसल, बड़ी टेक कंपनियों का मूल्य मजबूत बुनियाद पर टिका है। पिछले 12 माह में पांच बड़ी टेक कंपनियों ने पूंजी लगाने के बाद 12.80 लाख करोड़ रुपए का नगद धन पैदा किया है। बड़े आकार के बावजूद उनका विस्तार धीमा नहीं पड़ा है। ताजा तिमाही में बिक्री 17% बढ़ी है। नियामक एजेंसियों ने टैक्स, प्राइवेसी, प्रतिस्पर्धा में गड़बड़ी के लिए टेक कंपनियों को मामूली दंड दिया है।

टेक्नोलॉजी कंपनियों के विस्तार के अवसर विराट हैं। पश्चिमी देशों में केवल 10% रिटेल बिक्री ऑनलाइन होती है। अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के पास सिर्फ 20% क्लाउड कंप्यूटिंग का भार है। उभरते देशों में अभी डिजिटल टेक्नोलॉजी के विस्तार की गुंजाइश बहुत अधिक है। बड़ी टेक कंपनियों के फैलाव से गैर टेक कंपनियों के मुनाफे में कमी आई है। बड़ी संख्या में लोगों की नौकरी जाने की आशंका है। पांच बड़ी कंपनियों में लगभग 12 लाख कर्मचारी हैं। वे एक साल में 14.40 लाख करोड़ रुपए निवेश करती हैं। सप्लाई रोकने, इनवेस्टमेंट कम करने या कमजोर प्रतिद्वंद्वियों पर हमला करने के उनके फैसलों से विवाद पैदा होंगे। राजनीति में बड़ी टेक कंपनियों की भूमिका विवादों के घेरे में है। सोशल मीडिया ने अमेरिका से लेकर म्यांमार तक चुनावों को प्रभावित किया है। पांच बड़ी टेक कंपनियों के और अधिक बड़े होने का अनुमान है। वैसे, वे जितनी अधिक बड़ी होंगी उनके बने रहने पर संदेह करने के कारण भी होंगे।

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बनावटी उछाल का सवाल उचित है। टेक्नोलॉजी का चक्र आधुनिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा है। 1980 के दशक में सेमीकंडक्टर ने जोर मारा था। 1990 में पर्सनल कंप्यूटर और इंटरनेट आए। ये कमजोर पड़ गए । 2007 में आईफोन लॉन्च के साथ वर्तमान उठाव की शुरुआत हुई थी। 2018 तक लगा कि उसका समय भी बीत रहा है। फेसबुक द्वारा यूजर्स के डेटा में हेराफेरी से टेक कंपनियों के खिलाफ प्राइवेसी के मुद्दे पर गुस्सा बढ़ने लगा।

दरअसल, बड़ी टेक कंपनियों का मूल्य मजबूत बुनियाद पर टिका है। पिछले 12 माह में पांच बड़ी टेक कंपनियों ने पूंजी लगाने के बाद 12.80 लाख करोड़ रुपए का नगद धन पैदा किया है। बड़े आकार के बावजूद उनका विस्तार धीमा नहीं पड़ा है। ताजा तिमाही में बिक्री 17% बढ़ी है। नियामक एजेंसियों ने टैक्स, प्राइवेसी, प्रतिस्पर्धा में गड़बड़ी के लिए टेक कंपनियों को मामूली दंड दिया है।

2018 में सिलिकॉन वैली की शब्दावली में एक नए शब्द टेकलैश का प्रचलन हुआ। सीधे शब्दों में कहें तो बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों के खिलाफ कंज्यूमर और सरकारी नियामक एजेंसियों के विद्रोह का खतरा मंडराने लगा। नए रेगुलेशन नियमों पर बहस और प्राइवेसी के अधिकारों पर एक्टिविस्ट का गुस्सा सामने आया। फिर भी, पांच बड़ी अमेरिकी टेक कंपनियों के शेयर पिछले एक साल में 52 % बढ़ गए। कंपनियों के बाजार मूल्य में 144 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि हो गई। पांच में से चार कंपनियों-अल्फाबेट, अमेजन, एपल और माइक्रोसॉफ्ट- का मूल्य (प्रत्येक का) अब 71.97 लाख करोड़ रुपए है। फेसबुक का मूल्य 44 लाख करोड़ रुपए है।

टेक कंपनियों के शेयरों में ऐसी उछाल से चिंता भी जुड़ी है। क्या इन्वेस्टरों ने बनावटी उछाल की स्थिति बनाई है। पांच कंपनियों का कुल मूल्य 376 लाख करोड़ रुपए है। बीस साल पूर्व व्यापक गिरावट के पहले बाजार में ऐसा ही उछाल आया था। दूसरा पहलू है कि इन्वेस्टर सही भी हो सकते हैं। बड़ी टेक कंपनियों के ऊंचे बाजार मूल्यों से आभास होता है कि उनका मुनाफा अगले दशक में दोगुना हो जाएगा।

बनावटी उछाल का सवाल उचित है। टेक्नोलॉजी का चक्र आधुनिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा है। 1980 के दशक में सेमीकंडक्टर ने जोर मारा था। 1990 में पर्सनल कंप्यूटर और इंटरनेट आए। ये कमजोर पड़ गए । 2007 में आईफोन लॉन्च के साथ वर्तमान उठाव की शुरुआत हुई थी। 2018 तक लगा कि उसका समय भी बीत रहा है। फेसबुक द्वारा यूजर्स के डेटा में हेराफेरी से टेक कंपनियों के खिलाफ प्राइवेसी के मुद्दे पर गुस्सा बढ़ने लगा।

 चीन ने दिग्गज इंटरनेट कंपनियों पर सरकार का नियंत्रण रखा है।

 27 देशों ने डिजिटल टैक्स लगा दिए हैं या लगाने का विचार कर रहे हैं।

 भारत ने ई कॉमर्स और ऑनलाइन संवाद पर नियंत्रण किया है।

 यूरोपियन यूनियन (ईयू) चाहता है कि लोग अपने डेटा के मालिक स्वयं हों।

 ईयू ने इस सप्ताह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर अंकुश लगाने का प्रस्ताव रखा है।

भारत सहित कई देशों में नियंत्रण

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