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सरिस्का बाघ अभयारण्य क्षेत्र में सिर्फ 5 निजी होटल, सभी अप्रैल 2003 से पहले बने: वनमंत्री
शहर विधायक संजय शर्मा ने शुक्रवार को विधानसभा में सरिस्का अभयारण्य क्षेत्र में नियम विरुद्ध बने व अवैध रूप से संचालित होटलों व रिसोर्ट का मामला उठाया। उन्होंने वन मंत्री से पूछा कि क्या उक्त अभयारण्य क्षेत्र में निजी रिसोर्ट व होटल संचालित हैं। यदि हां तो कहां-कहां और किसी-किसी नाम से संचालित हैं।
इसके जबाव में वन राज्य मंत्री सुखराम विश्नोई ने बताया कि सरिस्का अभयारण्य क्षेत्र में सिर्फ 5 निजी होटल संचालित हैं तथा टाइगर रिजर्व कोर में एक होटल संचालित है। इन सभी होटलों का निर्माण 1 अप्रैल 2003 से पहले हुआ, इसके बाद किसी होटल का निर्माण नहीं हुआ। पांच निजी रिसोर्ट, होटलों में सरिस्का पैलेस, सरिस्का (रूंध कालीघाटी), टाइगर डेन, सरिस्का (रूंध कालीघाटी), होटल टाइगर हेवन, अमराकाबास, बैरावास स्थित होटल, बैराबास, सरिस्का ढाणी, इंदोक शामिल हैं। इस पर विधायक शर्मा ने कहा कि जो सूची उन्हें मिली है, उसमें होटल के नाम काफी कम हैं। जबकि सरिस्का वन्य क्षेत्र के आसपास बहुत बड़ी संख्या में रिसोर्ट और होटल्स हैं। विधायक ने कहा कि जिन वन अधिकारियों की देखरेख में होटल्स का निर्माण हुआ, उनके खिलाफ सरकार कार्रवाई क्यों नहीं करती। उन्होंने गुजरात सरकार की तर्ज पर सरिस्का अभयारण्य क्षेत्र में बसे ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने एवं पांडुपोल स्थित हनुमान मन्दिर पर जाने वाले श्रद्धालुओं को पूर्व की भांति मंगलवार व शनिवार के दिन निशुल्क वाहन ले जाने की मांग उठाई। वन राज्य मंत्री ने रोजगार उपलब्ध कराने के सवाल पर कोई विचार नहीं करने का जवाब दिया। वन मंत्री ने प्रश्नकाल में विधायकों द्वारा इस संबंध में पूछे गये पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए कहा कि सरिस्का अभयारण्य क्षेत्र में संचालित 5 निजी होटलों में से सरिस्का पैलेस का निर्माण राजा महाराजाओं के समय में हुआ है, जिसे वर्तमान में मैसर्स शिब्बा व्हील्स प्राइवेट लि. द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसे निरस्त करने की कार्रवाई जारी है।
होटल टाइगर हेवन तथा होटल बैरावास में कोर्ट द्वारा स्थगन आदेश दिए गए हैं। होटल टाइगर हेवन के प्रकरण में अगली पेशी की तारीख 17 मार्च 2020 है। इसके अतिरिक्त होटल टाइगर डैन आरटीडीसी द्वारा संचालित है। इस होटल को 17 मई 1975 को वन विभाग द्वारा आरटीडीसी को सौंपा गया था। होटल सरिस्का ढाणी का संचालन वर्तमान में बंद है तथा सरिस्का टाइगर रिजर्व कोर में एक होटल अमन बाग है, जिसका मामला अजमेर न्यायालय में लंबित है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में बिना अनुमति किसी भी होटल अथवा रिसोर्ट का निर्माण नहीं किया जा रहा है। इससे पहले मंत्री विश्नोई ने विधायक शर्मा के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 33(क) अनुसार अभयारण्य के भीतर वाणिज्यिक पर्यटक लॉज, होटलों, चिड़ियाघरों और सफारी उप वनों का संनिर्माण राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के पूर्व अनुमोदन के पश्चात ही करवाया जा सकता है।