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दो बाल अपचारियों को तीन-तीन साल के लिए विशेष सुरक्षित गृह भेजने के आदेश
किशोर न्याय बोर्ड की प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट सरिता धाकड़, सदस्य रामभरोसा जाट व दीपा गौड़ ने पहलू खां हत्याकांड में शामिल दो बाल अपचारियों को दोषी करार देते हुए तीन-तीन साल के लिए विशेष सुरक्षित सुधार गृह जयपुर भेजे जाने के आदेश दिए हैं। शुक्रवार को बाेर्ड ने अपने फैसले में लिखा कि मॉब लिंचिंग के दोषी बाल अपचारियों के लिए सुधार गृह में शिक्षा, कौशल सहित अन्य क्रियाकलाप का आवश्यक रूप से ध्यान रखा जाए। पर्चा बयान के अनुसार 1 अप्रैल 2017 को पहलू खां अपने दाे बेटों आरिफ व इरशाद खान के साथ पिकअप गाड़ी में जयपुर पशु हटवाड़ा से गोवंश लादकर अपने गांव जयसिंहपुर (नंूह मेवात) ले जा रहा था। रास्ते में बहरोड़ पुलिया के आगे निकलते ही कुछ लोगों ने उनकी पिकअप को रोक लिया था और मारपीट की थी। मारपीट में घायल पहलू खां व उसके दोनों बेटों को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती करवाया था। इसके बाद 4 अप्रैल को इलाज के दौरान पहलू की मौत हो गई थी। बहरोड़ थाना पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मॉब लिंचिंग का मामला दर्ज करते हुए आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया था। अपर जिला सेशन न्यायाधीश संख्या-1 डाॅ. सरिता स्वामी ने 14 अगस्त 2019 को 6 आरोपियों विपिन यादव, रविंद्र, कालू राम, दयानंद, योगेश कुमार व भीम राठी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। इसके अलावा दाे बाल अपचारियों के खिलाफ भी चालान पेश हुअा था, जिनकी सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड की ओर से की जा रही थी। किशोर न्याय बोर्ड ने 5 मार्च 2020 को बाल अपचारियों को दोषी करार दिया था और शुक्रवार, 13 मार्च को दोनों बाल अपचारियों को तीन-तीन साल के लिए विशेष व सुरक्षित सुधार गृह जयपुर भेजने के आदेश दिए।
बाेर्ड ने वीडियो क्लिप, फोटो और मोबाइल लोकेशन को आधार मान सुनाया फैसला
किशाेर न्याय बोर्ड ने घटना के दौरान डिजिटल साक्ष्य जैसे वीडियाेग्राफी व फाेटाेग्राफ सहित मोबाइल लोकेशन को मुख्य अाधार मानते हुए दाेनाें बाल अपचारियों को दोषी माना। इन बाल अपचारियों की घटना स्थल पर मौजूदगी बताने वाली 13 फाेटाेग्राफ व 3 वीडियाे क्लिप बोर्ड में पेश की गई थीं।
किशोर न्याय बाेर्ड ने नहीं माना हार्टअटैक : बोर्ड ने पहलू खां के साथ मारपीट के दौरान उसकी छाती व पेट में आई गंभीर चोटों के कारण हुए रक्तस्त्राव व शॉक को उसकी मौत कारण माना है। बोर्ड ने पहलू खां की हार्टअटैक से मौत के संबंध में डॉ. दीपिका हेमाराजानी, डॉ. जयंती माला सहित पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के बयानों को आधार मनाते हुए मारपीट से पहलू खां के मल्टीपल इंजरी आना माना। साथ ही पहलू खां के ताजा हार्टअटैक के लक्षण नहीं पाए जाने के आधार पर पहलू की मौत हार्टअटैक से नहीं होकर मारपीट से आई चोटों को कारण माना। बोर्ड ने फैसले में कहा कि पहलू खां को किसी प्रकार का कोई ह्रदयाघात हुआ ही नहीं था और उसकी मारपीट कर हत्या की गई।
बाेर्ड ने चिकित्सकों के बयान व रिपोर्ट पर उठाए सवालिया निशान, चिकित्सकों को किया तलब : बोर्ड ने पहलू खां को कैलाश हॉस्पिटल बहरोड़ में भर्ती करवाए जाने के दौरान उसकी चोटों का मुआयना करने वाले डॉ. अखिल सक्सेना, डाॅ. बीडी शर्मा, डाॅ. अारसी यादव व डाॅ. जितेंद्र भताेलिया का आचरण संदिग्ध माना है। बाेर्ड ने फैसले में लिखा कि उक्त चिकित्सकों ने पहलू के शरीर पर आई चोटों के बारे में भिन्न-भिन्न कथन किए हैं। इनमें एक चिकित्सक कहता है कि काेई चोट नहीं थी। दूसरे चिकित्सक ने चोट होने व पसलियों में फ्रेक्चर होने की बात कही। कोई चिकित्सक कहता है कि सोनोग्राफी जांच में चोट नहीं पाई गई। ये चिकित्सक एक स्वर में पहलू खां की मौत का कारण ह्रदयाघात होना भी बताते हैं। ऐसे में चिकित्सकों के उक्त कथन संदेहास्पद हैं। बोर्ड ने कहा कि चिकित्सकों द्वारा पहलू के ह्रदयाघात होने का अाधार गैर जिम्मेदाराना है। चिकित्सक कहता है कि मेरी जांच के अनुसार व अनुभव के अाधार पर पहलू की माैत हार्टअटैक से हुई थी। जबकि इनके द्वारा घायल पहलू की कोई विशेष जांच नहीं कराई गई थी और आनन-फानन में चिकित्सकों की ओर से मृत्यु प्रमाण भी जारी कर दिया गया था। बोर्ड ने कहा कि उक्त चिकित्सकों से पूछा जाए कि बिना किसी जांच के मात्र अनुभव के आधार पर रिपोर्ट कहां तैयार होती है। बोर्ड ने फैसले में उक्त चिकित्सकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किए जाने के निर्देश दिए हैं कि किसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उनके द्वारा गंभीर चोट से कारित मौत का कारण ह्रदयाघात से मृत्यु होने में परिवर्तित किया गया है।
पहलू खां
पहलू खां मॉब लिंचिंग } किशोर न्याय बोर्ड का फैसला, छह आरोपी पहले ही हो चुके हैं बरी