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इतिहास के सबसे बड़े दिशाभ्रम में फंसा है समाज
नागपुर के प्रमुख मजदूर नेता जम्मू अान्नद ने कहा कि देश का हिंदू समाज इस समय इतिहास के सबसे बड़े दिशाभ्रम की स्थिति में फंसा हुअा है। जिस समाज में विवेकानंद जैसे संन्यासी पैदा हुए हों, उसमें कुछ ढाेंगी साधु-संताें ने जनता काे अपने भ्रमजाल में फांस लिया। जो भारतीय समाज अपनी सहिष्णुता और सद्भाव के लिए जाना जाता था, वही इतना अमानवीय कैसे बन गया कि अपने ही देश के नागरिकों की माॅबलिंचिंग कर देता है, यह भारत की जनता को सोचना पड़ेगा।
गुरुवार काे ग्राम मांच में अलवर की प्रसिद्ध गांधी विचारक व सर्वोदयी चिंतक स्व. डाॅ. वेदकुमारी के जन्मदिवस पर मत्स्य मेवात शिक्षा एवं विकास संस्थान की अाेर से आयोजित व्याख्यानमाला में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए उन्हाेंने कहा कि आजादी के बाद संभवत: यह पहला मौका है जब देश की जनता सड़कों पर भारत का संविधान लेकर अपनी उपादेयता का सवाल उठा रही है। यह दौर एक तरफ भारत का संविधान बचाने और दूसरी तरफ देश को बांटने वालों के विरोध में है। अब आपको यह साबित करना होगा कि आप किस तरफ हैं। उन्हाेंने कहा कि सब लोग 2019 के सीएए की बात कर रहे हैं परन्तु नागरिकता कानून में 2003 में जो परिवर्तन लाया गया, उस पर बहस नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि पहली बार केंद्र सरकार ने अपने ही नागरिकों को अपना नागरिक मानने से इन्कार कर दिया है। यह ऐतिहासिक घटना है।
व्याख्यानमाला का विषय प्रर्वतन करते हुए संस्थान के सचिव डाॅ. वीरेंद्र विद्रोही ने आसाम आन्दोलन व आधार कार्ड जैसी घटनाओं मे तारतम्य स्थापित करते हुए कहा कि भारत में अब लोकतंत्र ही खतरे में है। सत्तारूढ़ वर्ग हर व्यक्ति की बराबरी की अवधारणा को सहन नहीं कर पा रहा है। इसलिए योजनाबद्ध तरीके से समाज के कमजोर वर्गों के मतदान के अधिकार पर हमला कर रहा है। एनपीआर इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत है। व्याख्यानमाला में तेजपाल सैनी, राजकुमार बक्शी, सिपात खान, साहिब सिह, हरिशंकर गोयल व गंगाराम यादव ने भी विचार रखे। कार्यक्रम की शुरूआत एनपीआर से जुड़ी कुछ छोटी फिल्मों के प्रदर्शन से हुई। व्याख्यानमाला की अध्यक्षता मौलाना हनीफ ने की।
अलवर. डाॅॅ. वेदकुमारी स्मृति व्याख्यानमाला में बाेलते वक्ता।