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आज दिन और रात बराबर...क्योंकि सूर्य व पृथ्वी ने आज संतुलन बनाया है, जीवन में आप भी बनाएं

एक वर्ष पहले
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अलवर| जीवन में संतुलन और बदलाव, दोनों बहुत जरूरी हैं। प्रकृति भी साल में एक बार दिन और रात की अवधि बराबर कर एेसा करती है। इस बार यह 23 सितंबर को हो रहा है। आज पृथ्वी और सूर्य का केंद्र एक दूसरे के ठीक सामने होंगे। इसकी वजह से दिन पूरे 12 घंटे का और रात भी इतने ही समय की होगी। इस घटना काे अंग्रेजी में इक्विनोक्स और हिंदी में शरद संपात कहा जाता है।

संतुलन को कहते हैं इक्विनोक्स जानिए, मतलब क्या
दरअसल पृथ्वी अपनी धुरी पर साढ़े 23 डिग्री झुक कर सूर्य के चक्कर लगाती है। इसलिए साल भर कभी हम सूर्य से दूर तो कभी पास होते हैं। दिन और रात छोटे व बड़े बनते हैं। मगर साल में दो मौके एेसे भी आते हैं, जब पृथ्वी का झुकाव ना सूर्य के करीब ना ही दूर होता है। सूरज भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर चमकता है। इसे ही ‘संपात’ या ‘इक्विनोक्स’ कहा जाता है। एेसा हर साल में दो बार, 20 से 22 मार्च और 21 से 24 सितंबर के बीच होता है, लेकिन तारीख कलैंडर के हिसाब से बदल जाती है। शरद ऋतु होने से इसे शरद संपात कहते हैं।

शरद संपात के 3 बदलाव, जो आप महसूस करेंगे
23 सितंबर के इक्विनोक्स यानी के कारण सूर्य की रोशनी 12 घंटे तक रहेगी। 24 सितंबर से दिन छोटा और रात बड़ी होने लगेगी।

इस दिन के बाद भारत सहित उत्तरी गोलार्द्ध के देशों में सूरज की गर्मी घटने लगती है। शरद ऋतु के बाद सर्दियां आने लगती हैं।

सूर्य इस अवधि में राशि परिवर्तन करता है। सूर्य सिंह से निकलकर कन्या में प्रवेश कर चुके हैं। राशियों के अनुसार आपके जीवन में भी बदलाव होगा।

इक्विनोक्स से एक दिन पहले भी इसका असर दिखा। रविवार को दिन 12 घंटे का होने से सूर्यास्त के बाद भी उजाला रहा। नजारा रूपारेल नदी का। फोटो : नितिन सिंह तंवर

रोचक बात : आज आप खुद माप सकते हैं पृथ्वी की सटीक परिधि

स्पेस टूरिज्म सोसायटी अमरीका के इंडिया चैप्टर अध्यक्ष सचिन भांबा ने बताया कि इक्विनोक्स के दौरान कुछ क्षण तक धरती पर खड़ी किसी इमारत या छड़ी की परछाईं नहीं बनती। क्योंकि तब सूर्य की किरणें बिल्कुल सीधी गिरती हैं। इस तथ्य को आधार मान करीब 2300 साल पहले यूनान के गणितज्ञ इरैटोस्थनिज ने पहली बार पृथ्वी की परिधि नापी थी। इक्विनोक्स का यह प्रयोग 23 सितंबर को सरिस्का में एस्ट्रोपोर्ट कैंपस में भी स्टूडेंट्स को सिखाया जाएगा।

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