मुनियों की तपोस्थली है जहाज, हनुमान व ब्रह्मा शिव प्रतिमा करती हैं भक्तों की मनोकामना पूर्ण / मुनियों की तपोस्थली है जहाज, हनुमान व ब्रह्मा शिव प्रतिमा करती हैं भक्तों की मनोकामना पूर्ण

Alwar News - सरिस्का वादियों की अरावली पर्वत श्रेणियों की एक सकरी घाटी में स्थित सिद्धतपों भूमि जहाज तपस्वियों का सुरम्य स्थल...

Bhaskar News Network

Nov 11, 2018, 09:25 AM IST
Tahala - shani hanuman and brahma shiva are the statues of munis devotees fulfill their wishes
सरिस्का वादियों की अरावली पर्वत श्रेणियों की एक सकरी घाटी में स्थित सिद्धतपों भूमि जहाज तपस्वियों का सुरम्य स्थल है। नॉडू ग्राम के निकट टहला से 18 किलोमीटर व तालाब ग्राम से 10 किलोमीटर सड़क मार्ग से यहां पहुंचा जा सकता है। कहा जाता है कि पुरातन काल में इस स्थान पर जाजिल नाम के एक ऋषि ने लंबे समय तक तपस्या की थी। इसी कारण इस स्थान का नाम जाजिल ऋषि के नाम पर जहाज पड़ा। यहां चमत्कारिक हनुमान प्रतिमा एवं चार मुख वाले ब्रह्मा शिव परिवार मंदिर है।

यहां साधु संतों के विश्राम स्थल प्राकृतिक प्रवाहित निर्मल गंगा जल के कुंड अनादिकाल से अर्नत बहता है।

ऋषि के तपोबल के प्रभाव से यहां साक्षात गंगा एक गुलर वृक्ष की जड़ों से अनवरत बह रही है। प्राचीन जाजिल ऋषि के तपोस्थल एवं गुफा एवं वट वृक्ष आज भी मौजूद है। यहां पक्षियों का बहुसंख्या में निवास स्थान है। इस स्थल पर पक्षियों के लिए प्रतिदिन 2 क्विटंल चुग्गा डाला जाता है। जिसमें कई हजारों की संख्या में पक्षी आकर चुग्गा खाते है। वह दृश्य बड़ा ही मनोहारी होता है। यहां पक्षियों को डाला जाने वाला चुग्गा कभी खत्म नहीं होता है व हनुमान मंदिर में जल रही अखंड ज्योत भी निरंतर जल रही है। यहां मनोकामना पूर्ण होने पर भक्तों द्वारा श्रीमद् भागवत, रूद्राभिषेक, भजन सत्संग एवं धार्मिक अनुष्ठान के साथ सवामणी आदि धार्मिक अनुष्ठान प्रतिदिन होते रहते है। यहां स्थानीय भक्तों के अलावा राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, गुडगांव सहित अन्य राज्यों से भी भक्त आते है। महंत गोपालदास महाराज ने बताया कि श्रीमद् भागवत पुराण में इसका लेख है कि यहां अनादिकाल से सिद्घ तपो भूमि जहाज पर जाजिल ऋषि ने हजारों साल तक कठोर तप किया था। वट वृक्ष के नीचे महाराजा योगीराज भृर्तहरि एवं राजा गोपीचंद जी का मिलन भी यहां एक बार हुआ था। जब महाराजा भर्तृहरि वन घूमकर तपस्या में लीन थे। उनकी गुमटी आज भी मौजूद है।

लोगों की मान्यता हैं कि यहां दिव्य शक्तियां तपोबल के प्रभाव से आज भी है। क्षेत्रवासियों की मांग है कि यहां ग्राम नाडू से जहाज हनुमान मन्दिर तक पक्का रोड बना दिया जाए तो यहां पर्यटकों के आवागमन में बढ़ावा के साथ ही सरिस्का में घूमने वाले पर्यटक भी इस स्थान का लुत्फ ले सकेंगे।

टहला. मंदिर में सजी प्राचीन प्रतिमा।

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