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होली पर सबसे ज्यादा परंपराएं केवल हमारे वागड़ में, इसलिए घर लौटे प्रवासी, कई घरों के ताले भी इसी त्योहार पर खुलते हैं

आमतौर पर होली दहन और धूलंडी पर हमारे वागड़ में 8 तरह के आयाेजन होते हैं। आयोजन भी ऐसे कि हर एक में हजारों की संख्या...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 02:00 AM IST

होली पर सबसे ज्यादा परंपराएं केवल हमारे वागड़ में, इसलिए घर लौटे प्रवासी, कई घरों के ताले भी इसी त्योहार पर खुलते हैं
आमतौर पर होली दहन और धूलंडी पर हमारे वागड़ में 8 तरह के आयाेजन होते हैं। आयोजन भी ऐसे कि हर एक में हजारों की संख्या में ग्रामीण और शहरवासी शामिल हाेते हैं। पूरा वागड़ होलीमय हो जाता है।

परंपराओं को जीवित रखने में वागड़ पूरे प्रदेश में एक उदाहरण है। उदयपुर संभाग में भी हम होली के आयोजनों में सबसे आगे हैं। बीकानेर, अजमेर जैसे शहरों में भी होली के अवसर पर इतने आयोजन नहीं होते। आयोजनों में अपनापन इतना है कि चाहे दिवाली पर घर नहीं पहुंचे, लेकिन होली पर तो काम के सिलसिले में अन्य राज्यों, देशों में गए वागड़ के प्रवासी लोग अपने घर लौट आते हैं। फिर शुरू होती है होली की ऐसी मस्ती कि घरों से दूर रहने का गम भी भूल जाते हैं। रोजगार के लिए गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश राज्यों की ओर पलायन कर जाते हैं। जिनके अब लौटने का क्रम प्रारंभ हो चुका है। लोग अपनी सुविधा के अनुसार बसों, जीपों, मिनी बसों से घरों को लौट रहे हैं। कई गांवों के हालात तो ऐसे हैं, जहां पूरा परिवार ही बाहर के राज्यों में रहने से मकान पर ताले रहते हैं, जो लोगों के घर लौटने के बाद ही खुलते हैं। इधर रोजगार के लिए विदेशों कुवैत, दुबई, कतर, बेहरीन, अमेरिका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, रूस, चीन गए लोग भी होली के त्योहार पर विशेष रूप से घरों को लौट रहे हैं। जिनमें नौकरी पेशा, विद्यार्थी, व्यापारी वर्ग के लोग शामिल हैं।

होली पर विशेष

यह हैं होली पर वागड़ के आयोजन, जाे कहीं नहीं होते

धूलंडी की शाम को गढ़ भेदन।

होली से लेकर रंग पंचमी तक गैर नृत्य।

रंग पंचमी पर त्रिपुरा सुंदरी मंदिर परिसर में 20 हजार आदिवासी युवक युवती करते हैं गैर नृत्य।

ओबरी में फूतरा पंचमी पर खजूर के पेड़ पर चढ़ का शौर्य प्रदर्शन।

सागवाड़ा में टमाटर की राड़।

शिवपुरा और कोकापुर में दहकते अंगारों पर नंगे पांव चलने की परंपरा।

ढोल कुंडी की थाप पर कंडों की राड़।

तीन दिन में घर लौटे हजारों वागड़वासी, बसों की छतें भी फुल

तीन दिनों से लोग मुंबई, सिलवासा, वापी, सूरत, बड़ौदा, अंकलेश्वर, अहमदाबाद, नवसारी, हिम्मतनगर, आणंद, भावनगर सहित विभिन्न क्षेत्रों से अपने घरों को लौट रहे हैं। जिसका प्रमाण इन सभी क्षेत्रों से होकर रोजाना रोडवेज और निजी ट्रेवेल्स के वाहन यात्रियों से भरे हुए आ रहे हैं। करीब रोजाना इन क्षेत्रों से 40 से 50 वाहनों के आने क्रम बना हुआ है। अहमदाबाद, सूरत, बड़ौदा, मुंबई से बांसवाड़ा आने वाली बसें यात्रियों से भरी हुई आ रही हैं। इसके अलावा उन बसों में जिनमें कैमरे और जीपीएस लगे हुए हैं उनमें सीटों और स्लीपर के अलावा यात्रियों को नहीं बैठाया जा रहा है। मुंबई के दादर, गोरेगांव, मनोहर में वहां बांसवाड़ा, सज्जनगढ़, डूंगरा, कुशलगढ़, गांगड़तलाई, मोनाडूंगर, परतापुर, बागीदौरा, आनंदपुरी, गढ़ी, घाटोल, पालोदा, लोहारिया, दानपुर, तलवाड़ा, अरथूना, छाजा, सागवाड़ा, डूंगरपुर, सीमलवाड़ा, आसपुर, चीखली सहित विभिन्न क्षेत्रों में आने वाले लोगों की संख्या काफी अधिक है। ट्रेवेल्स संचालकों ने बताया कि घर लौटने वाले लोग सीटें नहीं मिलने पर खड़े रह कर भी जल्दी घर पहुंचने की जुगत में रहते हैं। बांसवाड़ा रोडवेज डिपो के महाप्रबंधक काडूराम ने बताया कि होली के मद्देनजर मध्यप्रदेश के खंडवा, बुरहानपुर, इंदौर, धार, आेंकारेश्वर की ओर से आने वाली बसों में 26 फरवरी को ट्रैफिक व्यस्त रहा और 73 प्रतिशत यात्री भार रहा। 27 फरवरी को ट्रैफिक काफी व्यस्त रहा और यात्री भार 68 प्रतिशत रहा। वहीं गुजरात की ओर से 17 बसों के अपडाउन के दौरान 26 को 67 प्रतिशत और 27 फरवरी को 27 प्रतिशत यात्री भार रहा। इसी प्रकार डूंगरपुर रोडवेज डिपो की ओर से बसों की संख्या 18 से बढ़ाकर 20 कर दी है।

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Web Title: होली पर सबसे ज्यादा परंपराएं केवल हमारे वागड़ में, इसलिए घर लौटे प्रवासी, कई घरों के ताले भी इसी त्योहार पर खुलते हैं
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