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पेंदे से करीब 3 मीटर ऊपर आउटलेट के पास रिसाव से टूटा बांध, दो किमी तक भरा पानी

भास्कर न्यूज | मलसीसर/झुंझुनूं कुंभाराम आर्य लिफ्ट केनाल परियोजना का पानी स्टोरेज करने के लिए मलसीसर में बनाए...

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2018, 02:15 AM IST
पेंदे से करीब 3 मीटर ऊपर आउटलेट के पास रिसाव से टूटा बांध, दो किमी तक भरा पानी
भास्कर न्यूज | मलसीसर/झुंझुनूं

कुंभाराम आर्य लिफ्ट केनाल परियोजना का पानी स्टोरेज करने के लिए मलसीसर में बनाए गए दो रिजरवायर में से एक शनिवार को दोपहर करीब एक बजे एक स्थान से टूट गया। झटावा रोड पर बनाए रिजरवायर में भरा करीब नौ मीटर पानी (लाखों क्यूसैक) नहर की तरह बह निकला। इससे मलसीसर का एक हिस्सा जलमग्न हो गया हालांकि आबादी क्षेत्र इससे बच गया और कोई जनहानि भी नहीं हुई, लेकिन परियोजना के वाटर फिल्टर प्लांट, पंपिंग हाउस सहित प्रशासनिक, मुख्य नियंत्रण कक्ष आदि भवन आधे से ज्यादा तक डूब गए। थाने, तहसील व उप कोषागार में भी पानी भर गया। सूचना मिलते ही कलेक्टर, एसपी, पीडब्ल्यूडी, डिस्कॉम, पीएचईडी व संबंधित विभागों के अधिकारी, चूरू पीएचईडी के अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंच कर हालात का जायजा लिया। जयपुर से रेस्क्यू टीम भी शाम छह बजे पहुंची। इस बीच, चूरू बिसाऊ रोड तथा झुंझुनूं से मलसीसर की ओर जाने वाले रास्तों पर ट्रैफिक रोक दिया गया। रात सात बजे तक रिजरवायर का जल स्तर नीचे चले जाने से पानी के प्रवाह मंद हो गया, लेकिन पानी का निकलना जारी था। यह पानी कंकडेऊ की तरफ करीब दो किलोमीटर तक खेतों में भर गया।

गौरतलब है कि झुंझुनूं जिले को हिमालय का मीठा पानी पिलाने के लिए बहुप्रतीक्षित तारानगर-झुंझुनूं-खेतड़ी कुंभाराम लिफ्ट केनाल परियोजना का काम अंतिम चरणों में है। इसका बजट करीब 588 करोड़ रुपए है। मलसीसर में झटावा रोड पर दो रिजरवायर बनाए गए हैं। इनमें से 4.5 लाख वर्गमीटर क्षेत्रफल के नौ मीटर जल स्तर क्षमता वाले रिजरवायर में परियोजना के वाटर फिल्टर प्लांट, पंपिंग हाउस की तरफ एक स्थान पर शनिवार सुबह करीब 10 बजे रिसाव होने लगा। मजदूरों ने देखा तो अधिकारियों को इसकी सूचना और रिसाव को रोकने के लिए मिट्टी के कट्टे व पोकलेन मशीन से मिट्टी डालना शुरू कर दिया। लेकिन रिजरवायर में आठ मीटर से ज्यादा पानी भरा होने से दबाव के कारण दोपहर एक बजकर 8 मिनट पर 20 फीट का हिस्सा टूट गया और पानी पूरे दबाव के साथ निकलने लगा। पानी का दबाव इतना तेज था कि मिट्टी ढहने से टूटा हिस्सा करीब 50 फीट चौड़ा हो गया और कुछ ही मिनटों में पंपिंग हाउस, क्लोरिंग हाउस, फिल्टर प्लांट्स, प्रशासनिक भवन, मुख्य नियंत्रण भवन, तारानगर पीएचईडी के दफ्तर आदि भवन पानी में आधे डूब गए।

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हमीर खां का बास निवासी चालक राजू ने बताया कि वह शनिवार सुबह सम्प के निकट ही पोलेकन मशीन से मिट‌्टी डाल रहा था। उसने देखा कि रिजरवायर की तरफ मिट्टी गीली हो रही है। पास जाकर देखा तो मिट्‌टी में गीलापन ज्यादा होने से उसे रिसाव की आशंका हुई। उस वक्त करीब 10 बजे थे। उसने इसकी सूचना अधिकारियों को दी। झटावा रोड पर बनाए रिजरवायर में रिसाव के मामले में प्रथम दृष्टया सामने आया है कि रिसाव रिजरवायर में पेंदे से करीब तीन मीटर ऊपर हुआ, जहां से पास ही बनाए गए सम्प हाउस (गोलाकार खुली टंकी) तक पानी पहुंचाने के लिए भूमिगत आउटलेट (पाइप लाइन) बनाया गया था।

जिले में हाई अलर्ट, मलसीसर जाने वाले वाहनों काे रोका, थाने में पानी भरा तो बीईओ कार्यालय में रखवाए पांचवीं के पेपर

झुंझुनूं डाइट के प्राचार्य सुभाष महलावत ने बताया कि पांचवीं परीक्षा के पेपर थाने में रखवाने थे। रिजरवायर टूटने से थाने में पानी भर जाने के कारण इन्हें बीईओ राजेंद्र खीचड़ के कार्यालय में सुरक्षित रखवाया गया। मलसीसर में कुंभाराम लिफ्ट परियोजना का रिजरवायर टूटने की खबर पर बिसाऊ पुलिस ने सुरक्षा की दृष्टि से बिसाऊ से जानेवाले वाहनों को रोक दिया। हैड कांस्टेबल बीरबल सिंह के अनुसार मलसीसर में डेम टूटने की सूचना के बाद सुरक्षा की दृष्टि से मलसीसर जाने वाले वाहनों को रोका गया। पुलिस दो बजे थाना सर्किल के पास बैरिकेड लगा कर नाकाबंदी कर मलसीसर जाने वाले वाहनों को रोका। पुलिस ने गांगियासर जाने वाले वाहनों को इजाजत दी।

मिट्‌टी की प्रॉपर कुटाई नहीं होना हो सकता है कारण : सांखला

प्रदेश में करीब तीस साल से छोटे बांध व अर्द्धन डैम (मिट्टी के बांध) बनाने वाले जोधपुर निवासी शैतान सिंह सांखला का कहना है कि किसी भी रिजरवायर या डेम के निर्माण से पहले वहां की मिट्टी की गुणवत्ता की जांच की जाती है। इसके बाद मिट्टी पानी का कितना दबाव झेल सकती है, इसकी डेनसिटी जांच होती है। इस तरह के हादसों में प्राय: यह दोनों जांच प्रॉपर नहीं की जाए तो आउटलेट में रिसाव हो सकता है और क्योंकि यह मिट्टी की दीवार ही होती है इसलिए रिसाव बड़ा हो जाता है। इसके अलावा आउटलेट के आसपास की मिट्टी की कुटाई प्रॉपर तरीके से नहीं की जाए तो भी आउटलेट के आसपास रिसाव होकर ज्यादा क्षेत्र में फैल जाता है। आशंका है कि इस बांध के टूटने के पीछे ये कारण हो सकते हैं। यहां भी मिट्टी के सैंपल की रिपोर्ट, डेनसिटी की जांच रिपोर्ट से ही असली बात सामने आ सकती है।

रिसाव को सबसे पहले देखने वाले मजदूर ने भास्कर को बताया-सम्प के पास में मिट्‌टी डाल रहा था, रिसाव की आशंका हुई तो अधिकारियों को सूचना दी

कलेक्टर दिनेश कुमार यादव ने रात दस बजे बताया कि इस रिजरवायर को बनाने वाली कंपनी ने अभी इस परियोजना को पूरी तरह पीएचईडी को हैंड ओवर नहीं किया है। जिले में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। शाम को पीएचईडी के प्रमुख शासन सचिव रजत मिश्रा भी मलसीसर पहुंचे। राहत की बात रही कि इस परियोजना के तहत तारानगर हैड से पानी की आवक दो दिन से बंद थी, अन्यथा पानी का प्रवाह और तेज हो सकता था। घटना की सूचना मिलने के बाद सांसद संतोष अहलावत, मंडावा विधायक नरेंद्र कुमार, पूर्व विधायक रीटा चौधरी, अलसीसर प्रधान गिरधारी लाल खीचड़, कलेक्टर दिनेश कुमार यादव, एडीएम मुन्नीराम बागड़िया, एसपी मनीष अग्रवाल आदि मौके पर पहुंचे।

एक्सपर्ट व्यू

पानी में डूबा पंपिंग हाउस, फिल्टर हाउस, स्टोरेज, बिजलीघर, तहसील आदि भवन।

बहते पानी में डूबे बिजली के खंभे।

पहले स्थानीय ठेकेदारों को दिया था काम, फिर बजट की कमी के चलते हटाया

नागार्जुना कंस्ट्रक्शन कंपनी (एनसीसी) हैदराबाद के पास मलसीसर परियोजना का पूरा काम है। कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर बी प्रसाद ने बताया कि परियोजना के शुरुआत में स्थानीय कुछ ठेकेदारों को काम दिया गया था, लेकिन उनके काम की धीमी गति और बजट की कमी के चलते उन्हें हटा दिया गया। इसके बाद कंपनी ने अपने ही कर्मचारी और मजदूर लाकर काम कराया था। ये अधिकांश बिहार व यूपी के हैं। इस कंपनी के संस्थापक चेयरमैन डॉ. एवीएस राजू हैं। यहां से आगे एलएनटी काम देख रही है।

इमरजेंसी आउटलेट होना चाहिए था : एसई मीणा

आरयूआईडीपी के एसई मोहनलाल मीणा का कहना है कि इस रिजरवायर में इमरजेंसी आउटलेट बनाया जाना था ताकि ऐसी स्थिति में पानी सुरक्षित निकाला जा सके। जहां आउटलेट बनाया है, उसके पास तीन से पांच फीट पक्का निर्माण होना चाहिए ताकि रिसाव की आशंका न हो। इस बांध में एेसा था या नहीं यह जांच का विषय है।

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